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Sant Kabir Nagar News: मदरसा ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई 18 को, प्रशासन की अटकी सांसें
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई 18 मई को होगी। इससे पहले हाईकोर्ट में दो बार सुनवाई की डेट पड़ चुकी है, जिस पर सुनवाई नहीं हो सकी। अप्रैल में मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होने के बाद अगले ही दिन उसे रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट में सुनवाई की अगली तारीख पड़ी है।
मोतीनगर मोहल्ला स्थित मदरसा पर 26 अप्रैल को बुलडोजर की कार्रवाई भारी पुलिस फोर्स व दो मजिस्ट्रेट और दो सीओ की देखरेख में शुरू हुई थी। इसके बाद अगले दिन 27 अप्रैल की दोपहर करीब 12:00 बजे के बाद ध्वस्तीकरण का काम रोक दिया गया। वहीं 27 अप्रैल को ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ मदरसा प्रबंधतंत्र की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इस पर चार मई को सुनवाई की तिथि तय हुई थी, लेकिन चार मई को सुनवाई न हो पाने की वजह से 11 मई की डेट पड़ी।
फिर 11 को भी कोर्ट में सुनवाई न हो पाने की वजह से अब 18 मई को कोर्ट नंबर-21 में सुनवाई की तिथि नियत होना जानकार बता रहे हैं। इसे लेकर प्रशासन की सांसें अटकी हुई हैं।
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यह है मामला
खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित जमीन के गाटा संख्या-154 की 640 वर्गमीटर भूमि पर मदरसा का निर्माण हुआ है। सोसाइटी की ओर से वर्ष 2018 में भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया था। आरोप था कि नियत प्राधिकारी द्वारा समय पर कोई निर्णय न देने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया, जिसे बाद में अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया गया। कमिश्नर कोर्ट में सोसाइटी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि मानचित्र नियमों के तहत स्वतः स्वीकृत माना जाना चाहिए था और संबंधित अधिकारियों ने बिना पूरी सुनवाई के कार्रवाई की।
वहीं सरकारी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विवादित भूमि पहले ही राजस्व संहिता के तहत राज्य सरकार में निहित हो चुकी है। ऐसे में मानचित्र स्वीकृति का आवेदन निरस्त करना पूरी तरह उचित है।
बस्ती मंडल आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि नियत प्राधिकारी, एसडीएम और जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेशों में कोई कानूनी या क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि नहीं है। आयुक्त ने निगरानी याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया था।
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मदरसा ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई होईकोर्ट में चल रही है। कोर्ट का जो आदेश होगा उसका अनुपालन किया जाएगा।
-हृदयराम त्रिपाठी, एसडीएम, खलीलाबाद
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मोतीनगर मोहल्ला स्थित मदरसा पर 26 अप्रैल को बुलडोजर की कार्रवाई भारी पुलिस फोर्स व दो मजिस्ट्रेट और दो सीओ की देखरेख में शुरू हुई थी। इसके बाद अगले दिन 27 अप्रैल की दोपहर करीब 12:00 बजे के बाद ध्वस्तीकरण का काम रोक दिया गया। वहीं 27 अप्रैल को ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ मदरसा प्रबंधतंत्र की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इस पर चार मई को सुनवाई की तिथि तय हुई थी, लेकिन चार मई को सुनवाई न हो पाने की वजह से 11 मई की डेट पड़ी।
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फिर 11 को भी कोर्ट में सुनवाई न हो पाने की वजह से अब 18 मई को कोर्ट नंबर-21 में सुनवाई की तिथि नियत होना जानकार बता रहे हैं। इसे लेकर प्रशासन की सांसें अटकी हुई हैं।
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यह है मामला
खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित जमीन के गाटा संख्या-154 की 640 वर्गमीटर भूमि पर मदरसा का निर्माण हुआ है। सोसाइटी की ओर से वर्ष 2018 में भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया था। आरोप था कि नियत प्राधिकारी द्वारा समय पर कोई निर्णय न देने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया, जिसे बाद में अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया गया। कमिश्नर कोर्ट में सोसाइटी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि मानचित्र नियमों के तहत स्वतः स्वीकृत माना जाना चाहिए था और संबंधित अधिकारियों ने बिना पूरी सुनवाई के कार्रवाई की।
वहीं सरकारी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विवादित भूमि पहले ही राजस्व संहिता के तहत राज्य सरकार में निहित हो चुकी है। ऐसे में मानचित्र स्वीकृति का आवेदन निरस्त करना पूरी तरह उचित है।
बस्ती मंडल आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि नियत प्राधिकारी, एसडीएम और जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेशों में कोई कानूनी या क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि नहीं है। आयुक्त ने निगरानी याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया था।
मदरसा ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई होईकोर्ट में चल रही है। कोर्ट का जो आदेश होगा उसका अनुपालन किया जाएगा।
-हृदयराम त्रिपाठी, एसडीएम, खलीलाबाद