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Sant Kabir Nagar News: सर्दियों में लापरवाही से बढ़ रहा फेफड़ों का संक्रमण
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जिलाअस्पताल के ओपीडी में मरीज की जांच करते चिकित्सक।
संतकबीरनगर। ठंड के बढ़ते प्रकोप के बीच सेहत के प्रति जरा सी लापरवाही से बच्चे व बुजुर्ग फेफड़ों के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी और आरोग्य मेला में ऐसे मरीजों की कतार लग रही है।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर कुमार सिद्धार्थ के मुताबिक रात में ठंड और दिन में धूप के चलते तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। यह बच्चों और बुजुर्गों की सेहत बिगाड़ रहा है। जाने-अनजाने में ठंडे पेय पदार्थ का सेवन, ठंड में ज्यादा देर रहने, दूषित खानपान आदि वजहों से वे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जल्द ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। शुरुआत फेफड़ों में जकड़न, जुकाम, खांसी से होती है। सही इलाज न मिलने पर श्वास नलिकाओं में बैक्टीरिया का संक्रमण होता है। सूजन आने पर लगातार खांसी आती है और बुखार आने लगता है।
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निमोनिया के मिल रहे लक्षण
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह के मुताबिक बढ़ती ठंड से इलाज के लिए पहुंच रहे ज्यादातर बच्चों में निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। जिनकी हालत गंभीर मिलती है उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण
खांसी, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, थकान, वजन कम होना, रात में पसीना आना, भूख न लगना, घरघराहट, हृदय गति बढ़ना, बलगम में खून आना समेत अन्य लक्षण फेफड़ों के संक्रमण के होते हैं। अधिकतम दो दिन में अगर तबीयत सामान्य न हो तो चिकित्सक से मिलें।
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बचाव के उपाय
- गंदे हाथों से चेहरे और मुंह को न छुएं
- निमोनिया, फ्लू का टीका जरूर लगवाएं
- धुएं के पास न रहें और भीड़ से बचें
- कोहरा, धुंध होने पर बाहर कम निकलें
- पौष्टिक भोजन लें व बासी के सेवन से बचें
- तीन-चार बार गुनगुने पानी से गरारा करें
- बच्चों को हल्का गुनगुना दूध पीने को दें
- तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर को दिखाएं
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जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर कुमार सिद्धार्थ के मुताबिक रात में ठंड और दिन में धूप के चलते तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। यह बच्चों और बुजुर्गों की सेहत बिगाड़ रहा है। जाने-अनजाने में ठंडे पेय पदार्थ का सेवन, ठंड में ज्यादा देर रहने, दूषित खानपान आदि वजहों से वे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जल्द ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। शुरुआत फेफड़ों में जकड़न, जुकाम, खांसी से होती है। सही इलाज न मिलने पर श्वास नलिकाओं में बैक्टीरिया का संक्रमण होता है। सूजन आने पर लगातार खांसी आती है और बुखार आने लगता है।
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निमोनिया के मिल रहे लक्षण
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह के मुताबिक बढ़ती ठंड से इलाज के लिए पहुंच रहे ज्यादातर बच्चों में निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। जिनकी हालत गंभीर मिलती है उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण
खांसी, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, थकान, वजन कम होना, रात में पसीना आना, भूख न लगना, घरघराहट, हृदय गति बढ़ना, बलगम में खून आना समेत अन्य लक्षण फेफड़ों के संक्रमण के होते हैं। अधिकतम दो दिन में अगर तबीयत सामान्य न हो तो चिकित्सक से मिलें।
बचाव के उपाय
- गंदे हाथों से चेहरे और मुंह को न छुएं
- निमोनिया, फ्लू का टीका जरूर लगवाएं
- धुएं के पास न रहें और भीड़ से बचें
- कोहरा, धुंध होने पर बाहर कम निकलें
- पौष्टिक भोजन लें व बासी के सेवन से बचें
- तीन-चार बार गुनगुने पानी से गरारा करें
- बच्चों को हल्का गुनगुना दूध पीने को दें
- तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर को दिखाएं