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बेवफा वह रहा जिदंगी भर मगर...
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खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में आयोजित जन साहित्यक मंच के काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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बेवफा वह रहा जिदंगी भर मगर...
- जन साहित्यिक मंच की ओर से कवि गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया।
कवि विजय कुमार अजीज ने बेवफा वह रहा जिदंगी भर मगर, जब लगी ठोकरे बावफा हो गया सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। सरदार हरिभजन सिंह भजन ने न हिंदू चाहिए न मुसलमान चाहिए, सबसे करे जो प्यार वो इंसान चाहिए, सुनाकर सामाजिक एकता की कामना की। राधेश्याम मिश्र श्याम ने गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनको याद करें, उनके कर्मों पर आओ हम सब संवाद करें। रचनाकार पवन सबा ने तू मिस्ले चांद मेरी आंखों में उतर आए, जिधर भी देखू उधर तू ही तू नजर आए। युवा कवि शिवा पांडेय ने जो प्राप्त है वही पर्याप्त है, वही सुखी है जिसे यह ज्ञात है सुनाया। महमूद खान ने एक दिन एक साल लगता है, जाने कैसा ये हाल लगता है सुनाया। नरसिंह नाराया कमल ने गांधी जी खुद देखिए आज देश का हाल, सत्य अहिंसा रो रहा चलता रोज बवाल सुनाया। हामिद खलीलाबादी ने जाना पहचाना सा लगता है मुझे उसका दयार उसकी हर राह गुजर मुझको चली लगती है सुनाया। कवि श्याम कार्तिकेय ने कैसे करू मै स्वयं को सोच रहा है पेट, मुख को जब भाने लगे गुटखा और सिगरेट सुनाकर खान पान सही रखने की सलाह दी। इस दौरान शरद भटनागर, विजय कुमार समेत अन्य कवि मौजूद रहे।
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- जन साहित्यिक मंच की ओर से कवि गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया।
कवि विजय कुमार अजीज ने बेवफा वह रहा जिदंगी भर मगर, जब लगी ठोकरे बावफा हो गया सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। सरदार हरिभजन सिंह भजन ने न हिंदू चाहिए न मुसलमान चाहिए, सबसे करे जो प्यार वो इंसान चाहिए, सुनाकर सामाजिक एकता की कामना की। राधेश्याम मिश्र श्याम ने गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनको याद करें, उनके कर्मों पर आओ हम सब संवाद करें। रचनाकार पवन सबा ने तू मिस्ले चांद मेरी आंखों में उतर आए, जिधर भी देखू उधर तू ही तू नजर आए। युवा कवि शिवा पांडेय ने जो प्राप्त है वही पर्याप्त है, वही सुखी है जिसे यह ज्ञात है सुनाया। महमूद खान ने एक दिन एक साल लगता है, जाने कैसा ये हाल लगता है सुनाया। नरसिंह नाराया कमल ने गांधी जी खुद देखिए आज देश का हाल, सत्य अहिंसा रो रहा चलता रोज बवाल सुनाया। हामिद खलीलाबादी ने जाना पहचाना सा लगता है मुझे उसका दयार उसकी हर राह गुजर मुझको चली लगती है सुनाया। कवि श्याम कार्तिकेय ने कैसे करू मै स्वयं को सोच रहा है पेट, मुख को जब भाने लगे गुटखा और सिगरेट सुनाकर खान पान सही रखने की सलाह दी। इस दौरान शरद भटनागर, विजय कुमार समेत अन्य कवि मौजूद रहे।
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