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‘कहत कबीर’ कछु लेना न देना, मगन रहना

Thu, 16 Jun 2022 11:58 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2022 11:58 PM IST
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kahat kabir drama played
भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के कलाकारों द्वारा ,कहत कबीर,, का मंचन करते।संवाद - फोटो : KHALILABAD
‘कहत कबीर’ कछु लेना न देना, मगन रहना
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कबीर महोत्सव में कहत कबीर की संगीतमय नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को मोहा
भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के कलाकारों के द्वारा हुआ नाट्य मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। कबीर महोत्सव के अवसर पर संतकबीर अकादमी के ऑडिटोरियम में बृहस्पतिवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ की टीम ने ‘कहत कबीर’ की संगीतमय नाट्य प्रस्तुति की। नाटक में संतों, साधुओं के जीवन में आने वाली कठिनाइयों, कबीर की निर्गुण भक्ति परंपरा का प्रभाव साफ तौर पर नजर आया। नाटक का संदेश था कि साधुओं का जीवन ही सद्मार्ग और सच्चा मार्ग है।
इस नाटक की परिकल्पना और निर्देशन भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के निदेशक दिनेश खन्ना, संगीत ज्ञानदीप और आलेख अनिल शर्मा का था। प्रस्तुति में घूंघट के पट खोल तोहे पिया मिलेंगे और कछु लेना न देना मगन रहना जैसे भजन सुनाकर लोगों को भक्ति रस में डुबो दिया। लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इसी तरह निरंजन अलह मेरा, अलह मेरा, हमन है इश्क मस्ताना के भावपूर्ण संगीत और बोल से दर्शक भावविभोर हो गए। तालबद्ध, प्रकाश रमन, मंच, वस्त्र पूजा, नृत्य आदि संरचना कलाकार विशाल कृष्णा का था। अभिनय कलाकारों में मार्टिना मेधी, रितेश अस्थाना, रितु पांडेय, विक्की, अब्दुल सलाम अंसारी, नीतीश झा, कविता यादव, अंकुर वर्मा, रोहित श्रीवास्तव, अभिषेक, श्यामा, मनीषा, अंजली आदि हैं। नाटक का निर्देशन दिनेश खन्ना, आलेख अनिल शर्मा, संगीत ज्ञानदीप, वेश भूषा पूजा, रूबी, प्रकाश व्यवस्था रमन, समन्वयन मनोज शर्मा आदि का था।
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कबीर निर्गुण के व्याख्याता थे
नाट्य प्रस्तुति और संगीत के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई कि कबीर निर्गुण के एक अलह निरंजन का व्याख्याता हैं। कबीर के दर्शन में एक सहजता हर जगह परिलक्षित होती है। वे तो प्रेयसी हैं, माशूका हैं, कहीं पिया है तो कहीं साहिब है। कहीं गुरु, कहीं गुसाई, कहीं राम ...। एक अंतर्मयी समर्पण अपने महबूबा के लिए कबीर की देह के जख़्मों से निकालकर आत्मा के दर्शन और उसमें लिपट के चरम की यात्रा पर ले जाता है, जहां स्व मिट जाता है। इस मौके पर महंत विचारदास, निदेशक प्रोफेसर सुरेश शर्मा, अमृत द्विवेदी, अरविंद शास्त्री, डॉक्टर हरिशरण शास्त्री, पूर्व चेयरमैन नूरुज्जमा अंसारी, अवधेश सिंह, राम कुमार वर्मा, नागेंद्र श्रीवस्त्व, रविप्रकाश पांडेय, गुलाम हुसेन, अवर अभियंता संतोष यादव, समीर यादव, विजय तिवारी आदि मौजूद रहे।
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