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‘जो सर्वव्यापी है उसे ढूंढना बेवकूफी’
संतकबीरनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Mar 2017 11:30 PM IST
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कथा सुनाते कथा वाचक
- फोटो : अमर उजाला
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ईश्वर सर्व व्यापी है। संसार के प्रत्येक जीव में ईश्वर विद्यमान है। ईश्वर के भीतर ही सुख, शांति और आनंद का वास है। संसार में सुख, शांति और आनंद खोजने वाले मूर्ख हैं। जो ईश्वर प्रत्येक इंसान के भीतर वास करता हो उसे प्राप्त करने का प्रयास करने वाले महामूर्ख की श्रेणी में आते हैं। उक्त बातें शनिवार को अवध धाम से पधारे कथा व्यास पंडित विजय राघव दास रामायणी जी महराज ने पौली ब्लॉक क्षेत्र के मडपौना शिव मंदिर पर आयोजित श्रीराम कथा में कही। कथा व्यास ने पुष्प वाटिका प्रसंग का मनोहारी रूप का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि ईश्वर को हमने खोया ही कब था जो उन्हें प्राप्त करने के प्रयास में लगे हैं। कथा के मर्म को समझाते हुए उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से उस परमात्मा को जानने की आवश्यकता है जिन्हें हम संसार में ढूंढने का प्रयास करते हैं। आज मनुष्य के जीवन में सुख, शान्ति और आनन्द नहीं है। क्योंकि हम इन्हें संसार में खोजने का प्रयास करते हैं। जो संसार में है ही नहीं अपितु ईश्वर में समाहित है। सांसारिक मोह माया के कारण मनुष्य को सच्चा सुख प्राप्त नहीं हो पाता है। मनुष्य जितना भी इस संसार में ईश्वर को ढूंढने का प्रयास करता है उतना ही उलझता जाता है और ईश्वर की सच्ची भक्ति उससे दूर होती जाती है। कथा व्यास ने कहा कि लोभ, मोह, क्षोभ और माया के वशीभूत होकर मानव ईश्वर की भक्ति से जाने अनजाने विरत होने लगता है और सांसारिक माया के बीच ईश्वर को ढूंढने के लिए भटकने लगता है। कथा के मुख्य यजमान राकेश चौबे व उनकी धर्म पत्नी प्रमीला देवी रही। इस दौरान प्रेमनारायण, गुड्डू चौबे, विजय, राजू चौबे, राजाराम यादव, धनंजय, रामवृक्ष सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि ईश्वर को हमने खोया ही कब था जो उन्हें प्राप्त करने के प्रयास में लगे हैं। कथा के मर्म को समझाते हुए उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से उस परमात्मा को जानने की आवश्यकता है जिन्हें हम संसार में ढूंढने का प्रयास करते हैं। आज मनुष्य के जीवन में सुख, शान्ति और आनन्द नहीं है। क्योंकि हम इन्हें संसार में खोजने का प्रयास करते हैं। जो संसार में है ही नहीं अपितु ईश्वर में समाहित है। सांसारिक मोह माया के कारण मनुष्य को सच्चा सुख प्राप्त नहीं हो पाता है। मनुष्य जितना भी इस संसार में ईश्वर को ढूंढने का प्रयास करता है उतना ही उलझता जाता है और ईश्वर की सच्ची भक्ति उससे दूर होती जाती है। कथा व्यास ने कहा कि लोभ, मोह, क्षोभ और माया के वशीभूत होकर मानव ईश्वर की भक्ति से जाने अनजाने विरत होने लगता है और सांसारिक माया के बीच ईश्वर को ढूंढने के लिए भटकने लगता है। कथा के मुख्य यजमान राकेश चौबे व उनकी धर्म पत्नी प्रमीला देवी रही। इस दौरान प्रेमनारायण, गुड्डू चौबे, विजय, राजू चौबे, राजाराम यादव, धनंजय, रामवृक्ष सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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