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मोहब्बत का पैगाम देता है इस्लाम: अबुल कलाम
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Thu, 12 May 2016 12:03 AM IST
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पौली में दो दीनी जलसे का हुआ आयोजन।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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ब्लॉक मुख्यालय स्थित मदरसा अरबिया बुस्तानुल उलूम पर दो दिसवसी जलसा नूरानी इजलास का आयोजन हुआ। इस दौरान देश के कई इस्लामिक विद्वानों ने लोगों को संबोधित किया और शायरों ने अपने नातिया कलाम प्रस्तुत किया।
जलसा मौलाना अबूजर मदनी के जरिए किए गए तिलावते कुरान से शुुरू हुआ। इसके बाद देवबंद से आए मौलाना इरफान अहमद ने कहा कि इस्लाम का अर्थ ही शांति है। खुदा ने अपने आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद को सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि पूरी कायनात केलिए रहमत बना कर भेजा। आज कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि इस्लाम तलवार के जोर पर फैला, जबकि इस्लाम अपने सिद्धांतों की वजह से पसंद किया गया। आज भी दुनिया में बड़ी तेजी से लोग इस्लाम मजहब को अपना रहे हैं।
मौलाना अबुल कलाम मजाहिरी ने कहा कि पर्दा औरतों की जीनत है। उन्होंने कहा कि समाज में फैल रही बुराइयों को रोकने के लिए पर्दा एक बेहतर तरीका है। उन्होंने लोगों से नमाज की फजीलत बयान किया और नमाज की पाबंदी अपनाने को कहा। शायरे इस्लाम तारिक जमील और रियाज मुजीबी ने अपने बेहतरीन अंदाज में नातेपाक प्रस्तुत किया और लोगों की वाहवाही लूटी। जलसे का संचालन मौलाना गुफरान अहमद और अध्यक्षता नबीह मोहम्मद ने किया। इस दौरान मौलाना रियाजुल हक कासिमी, मौलाना वसीम, मौलाना शुजाउद्दीन, ताहिर बाबा, हाफिज गयासुद्दीन, डॉ. मोहम्मद आरिफ आदि उपस्थित रहे।
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इस्लाम के सिद्धांतों पर अमल करने की जरूरत
अंजुमन शाहजहां समिति सोनाड़ी के तत्वाधान में मंगलवार की रात में ख्वाजा गरीबनवाज कांफ्रेंस का अयोजन किया गया। इस दौरान देश के कई प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वानों ने लोगों को संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुफ्ती मोफीद आलम के जरिए कुरान पाक की तिलावत से हुई। इसके पश्चात नूरुन्नबी आजमी का संबोधन हुआ। उन्होंने कहा कि पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद लोगों से मुहब्बत करते थे और दीन के बारे में घर-घर जाकर खुदा के पैगाम की तब्लीग करते थे। जैसे जैसे लोगों को उनकी बात पसंद आने लगी वैसे वैसे उनको मानने वालों की संख्या बढ़ती गई। इसी तरह इस्लाम किसी नफरत और तलवारों के साए में नहीं बल्कि प्रेम और मोहब्बत के जरिए फैला। मौलाना ने मुस्लिम महिलाओं के पर्दा के अंदर रहने के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इस्लाम में
पर्दे को विशेष महत्तव दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम की बुनियाद पांच सिद्धांतों पर आधारित है। ये हैं कलमा, रोजा, नमाज, हज और जकात। हजरत मोहम्मद ने हुक्म दिया था कि जो कोइ इन पांचों सिद्धांतों पर अमल करेगा वह खुदा के करीब और उसका महबूब हो जाएगा। कार्यक्रम का संचालन मासूम रजा ने और अध्यक्षता मो0 रजा ने किया। इस दौरान मिर्जा याकूब बेग, आरिफ मिर्जा, मौलाना हैदर अली, एबाद बेग, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि जुबैर अहमद, ग्राम प्रधान नफीस उर्फ लादेन, महमूद आलम, साहिल, बसपा के धनघटा विधान सभा प्रभारी नीलमणि, जिला पंचायत सदस्य संजय सिंह आदि उपस्थित रहे।
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जलसा मौलाना अबूजर मदनी के जरिए किए गए तिलावते कुरान से शुुरू हुआ। इसके बाद देवबंद से आए मौलाना इरफान अहमद ने कहा कि इस्लाम का अर्थ ही शांति है। खुदा ने अपने आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद को सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि पूरी कायनात केलिए रहमत बना कर भेजा। आज कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि इस्लाम तलवार के जोर पर फैला, जबकि इस्लाम अपने सिद्धांतों की वजह से पसंद किया गया। आज भी दुनिया में बड़ी तेजी से लोग इस्लाम मजहब को अपना रहे हैं।
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मौलाना अबुल कलाम मजाहिरी ने कहा कि पर्दा औरतों की जीनत है। उन्होंने कहा कि समाज में फैल रही बुराइयों को रोकने के लिए पर्दा एक बेहतर तरीका है। उन्होंने लोगों से नमाज की फजीलत बयान किया और नमाज की पाबंदी अपनाने को कहा। शायरे इस्लाम तारिक जमील और रियाज मुजीबी ने अपने बेहतरीन अंदाज में नातेपाक प्रस्तुत किया और लोगों की वाहवाही लूटी। जलसे का संचालन मौलाना गुफरान अहमद और अध्यक्षता नबीह मोहम्मद ने किया। इस दौरान मौलाना रियाजुल हक कासिमी, मौलाना वसीम, मौलाना शुजाउद्दीन, ताहिर बाबा, हाफिज गयासुद्दीन, डॉ. मोहम्मद आरिफ आदि उपस्थित रहे।
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इस्लाम के सिद्धांतों पर अमल करने की जरूरत
अंजुमन शाहजहां समिति सोनाड़ी के तत्वाधान में मंगलवार की रात में ख्वाजा गरीबनवाज कांफ्रेंस का अयोजन किया गया। इस दौरान देश के कई प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वानों ने लोगों को संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुफ्ती मोफीद आलम के जरिए कुरान पाक की तिलावत से हुई। इसके पश्चात नूरुन्नबी आजमी का संबोधन हुआ। उन्होंने कहा कि पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद लोगों से मुहब्बत करते थे और दीन के बारे में घर-घर जाकर खुदा के पैगाम की तब्लीग करते थे। जैसे जैसे लोगों को उनकी बात पसंद आने लगी वैसे वैसे उनको मानने वालों की संख्या बढ़ती गई। इसी तरह इस्लाम किसी नफरत और तलवारों के साए में नहीं बल्कि प्रेम और मोहब्बत के जरिए फैला। मौलाना ने मुस्लिम महिलाओं के पर्दा के अंदर रहने के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इस्लाम में
पर्दे को विशेष महत्तव दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम की बुनियाद पांच सिद्धांतों पर आधारित है। ये हैं कलमा, रोजा, नमाज, हज और जकात। हजरत मोहम्मद ने हुक्म दिया था कि जो कोइ इन पांचों सिद्धांतों पर अमल करेगा वह खुदा के करीब और उसका महबूब हो जाएगा। कार्यक्रम का संचालन मासूम रजा ने और अध्यक्षता मो0 रजा ने किया। इस दौरान मिर्जा याकूब बेग, आरिफ मिर्जा, मौलाना हैदर अली, एबाद बेग, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि जुबैर अहमद, ग्राम प्रधान नफीस उर्फ लादेन, महमूद आलम, साहिल, बसपा के धनघटा विधान सभा प्रभारी नीलमणि, जिला पंचायत सदस्य संजय सिंह आदि उपस्थित रहे।