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Sant Kabir Nagar News: येलो जोन से शुरू हुई पड़ताल, महाराष्ट्र का युवक निकला साइबर ठग

Fri, 24 Jul 2026 11:29 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 11:29 PM IST
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Investigation initiated from the 'Yellow Zone'; Maharashtra youth turns out to be a cyber fraudster.
संतकबीरनगर। गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम मॉनिटरिंग सिस्टम के येलो जोन में आए एक संदिग्ध मोबाइल नंबर को लेकर शुरू हुई जांच आखिरकार साइबर ठगी के मामले तक पहुंच गई। प्रारंभिक पड़ताल के बाद पुलिस को मिले साक्ष्यों और विभिन्न राज्यों के पीड़ितों के बयानों से आरोप सही पाए गए। इसके बाद साइबर थाना संतकबीरनगर में प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। मामले में अब आरोपी तक पहुंचने और उसके पूरे साइबर नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।
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करीब एक सप्ताह पहले प्रदेश के साइबर क्राइम मुख्यालय ने गृह मंत्रालय के अलर्ट के आधार पर एक संदिग्ध मोबाइल नंबर को येलो जोन में चिह्नित कर जांच के निर्देश दिए थे। साइबर क्राइम थाने की टीम ने मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल, आईएमईआई और उससे जुड़े दूसरे नंबर की तकनीकी जांच की। जांच में दोनों नंबर महाराष्ट्र के पालघर जिले के निवासी सी. यादव के नाम पर मिले।
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जांच आगे बढ़ी तो बड़ा खुलासा हुआ। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर संबंधित मोबाइल नंबर के खिलाफ पहले से चार अलग-अलग साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिलीं। इनमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान के पीड़ित शामिल हैं।
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पुलिस ने शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर पूछताछ की तो सभी ने ऑनलाइन ठगी की पुष्टि की। किसी से रेलवे टिकट बुक कराने के नाम पर रुपये लिए गए तो किसी को ऑनलाइन भुगतान और अन्य सेवाओं का झांसा देकर रकम ऐंठी गई। रकम वापस मांगने पर आरोपी ने पीड़ितों के मोबाइल नंबर तक ब्लॉक कर दिए।
प्रभारी साइबर क्राइम थाना जय प्रकाश चौबे का कहना है कि तकनीकी जांच और पीड़ितों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
अब आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ यह भी खंगाला जा रहा है कि उसके साथ कोई संगठित साइबर गिरोह तो सक्रिय नहीं है और इस तरह की ठगी से कितने अन्य लोग प्रभावित हुए हैं।

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क्या है येलो जोन?
साइबर सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध मोबाइल नंबरों, खातों और डिजिटल पहचान की गतिविधियों का लगातार विश्लेषण करती हैं। जिन नंबरों पर संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिलते हैं, उन्हें निगरानी के लिए येलो जोन में रखा जाता है। इसके बाद स्थानीय पुलिस तकनीकी और तथ्यात्मक जांच करती है। इस मामले में भी जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होने पर एफआईआर दर्ज की गई।
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