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Sant kabir nagar Flood: एमबीडी बांध पर बढ़ा खतरा, लोगों की नींद उड़ी
Wed, 10 Aug 2022 10:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 10:21 AM IST
सार
नदी ने तुरकौलिया नायक गांव में पिछले वर्ष जिस स्थान पर कटान कर बांध के लिए खतरा उत्पन्न कर दी थी, उस स्थान पर सिंचाई विभाग ने बोल्डर बिछाकर एमबीडी बांध को सुरक्षित कर लिया है। अब नदी यहां से करीब 500 मीटर पश्चिम पटौआ गांव के पास से कटान करते हुए बांध की तरफ बढ़ रही है।
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तुर्कवलिया नायक गांव के खेतों में भरा घाघरा का पानी।
- फोटो : KHALILABAD
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विस्तार
घाघरा नदी ने बढ़ते जलस्तर के साथ फिर कटान तेज कर दी है। नदी की बाढ़ से दियारा की फसल जलमग्न होने लगी है। तुर्कवलिया नायक गांव के पश्चिमी कटान को रोकने के लिए लगाए गए बोरे के नौ कटर नदी में बह गए। अब नदी एमबीडी बांध की तरफ बढ़ने लगी है। बाढ़ और कटान से एमबीडी बांध और नदी के बीच बसे गांव के लोग भयभीत हैं।
घाघरा नदी की कटान से गायघाट दक्षिणी गांव के 54 लोगों का मकान तीन वर्ष के भीतर नदी की धारा में समाहित हो चुके हैं। 50 अधिक मकान कटान की जद में आ गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों की फसल जलमग्न हो गई है। पानी गांव के चारों तरफ फैलने लगा है। हालांकि पानी का दबाव कम है।
नदी ने तुरकौलिया नायक गांव में पिछले वर्ष जिस स्थान पर कटान कर बांध के लिए खतरा उत्पन्न कर दी थी, उस स्थान पर सिंचाई विभाग ने बोल्डर बिछाकर एमबीडी बांध को सुरक्षित कर लिया है। अब नदी यहां से करीब 500 मीटर पश्चिम पटौआ गांव के पास से कटान करते हुए बांध की तरफ बढ़ रही है।
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क्षेत्र के लालजी, लालचंद, नंदलाल, रमेश आदि किसानों ने बताया कि नदी की कटान से उनका और गांव के लोगों के करीब 100 बीघे से अधिक फसल नदी के धारा में विलीन हो गई है।
कटान और बांध के बीच केवल 200 मीटर का फासला रह गया है। गांव वालों का कहना है कि इस स्थान पर न तो बोल्डर लगाए गए हैं और न ही बांध मजबूत है। इसी तरह कटान होती रही तो बांध को बचा पाना मुश्किल होगा।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र का कहना है कि बांध पूरी तरह से सुरक्षित है। जिस स्थान पर कटान हो रही है, वहां पर भी कटान रोकने का उपाय किए जाएंगे। दिन भर में 10 सेंटीमीटर नदी बढ़ी है। नदी अभी खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
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घाघरा नदी की कटान से गायघाट दक्षिणी गांव के 54 लोगों का मकान तीन वर्ष के भीतर नदी की धारा में समाहित हो चुके हैं। 50 अधिक मकान कटान की जद में आ गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों की फसल जलमग्न हो गई है। पानी गांव के चारों तरफ फैलने लगा है। हालांकि पानी का दबाव कम है।
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नदी ने तुरकौलिया नायक गांव में पिछले वर्ष जिस स्थान पर कटान कर बांध के लिए खतरा उत्पन्न कर दी थी, उस स्थान पर सिंचाई विभाग ने बोल्डर बिछाकर एमबीडी बांध को सुरक्षित कर लिया है। अब नदी यहां से करीब 500 मीटर पश्चिम पटौआ गांव के पास से कटान करते हुए बांध की तरफ बढ़ रही है।
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क्षेत्र के लालजी, लालचंद, नंदलाल, रमेश आदि किसानों ने बताया कि नदी की कटान से उनका और गांव के लोगों के करीब 100 बीघे से अधिक फसल नदी के धारा में विलीन हो गई है।
कटान और बांध के बीच केवल 200 मीटर का फासला रह गया है। गांव वालों का कहना है कि इस स्थान पर न तो बोल्डर लगाए गए हैं और न ही बांध मजबूत है। इसी तरह कटान होती रही तो बांध को बचा पाना मुश्किल होगा।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र का कहना है कि बांध पूरी तरह से सुरक्षित है। जिस स्थान पर कटान हो रही है, वहां पर भी कटान रोकने का उपाय किए जाएंगे। दिन भर में 10 सेंटीमीटर नदी बढ़ी है। नदी अभी खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।