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शादी अनुदान राशि में इजाफा, फिर भी नहीं मिल रहे आवेदक
Wed, 13 Feb 2019 11:50 PM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Wed, 13 Feb 2019 11:50 PM IST
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शादी अनुदान राशि में इजाफा, फिर भी नहीं मिल रहे आवेदक
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। शादियां दो व्यक्तियों और दो परिवारों के मिलन से ज्यादा अब स्टेटस सिंबल बन चुकी हैं। लोग बेटे-बेटियों की शादी में खर्च के लिए कर्ज लेने से लेकर जमीन, मकान तक गिरवी रख देते हैं, जबकि सरकार की सामूहिक विवाह समारोह के लिए वर-वधु नहीं मिल रहे हैं। यह हालत तब है जब शादी अनुदान की धनराशि 35 से बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दी गई है। नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए अफसर और सांसद, विधायक तक शामिल हो रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग की तरफ से शादी अनुदान की योजना पुरानी है, लेकिन प्रदेश की योगी सरकार ने इसे सामाजिक बदलाव का जरिया बनाने के लिए नई पहल करते हुए इसके लिए कार्यक्रम आयोजित कराना शुरू कर दिया। पहले शादी करने वाले जोड़ों को 90 दिन के भीतर विभाग में आवेदन करना होता था जिस पर उन्हें अनुदान राशि दी जाती थी। अब सामूहिक कार्यक्रम आयोजित कर वधू को धनराशि के साथ-साथ उपहार दिया जा रहा है। लोग इन कार्यक्रमों में बेटे-बेटियों की शादी नहीं कराना चाहते। जिले को इस वर्ष 1500 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य मिला। पहला कार्यक्रम नवंबर में मेंहदावल में आयोजित हुआ। तमाम प्रयास के बावजूद 48 जोड़ों का ही विवाह हो पाया। दिसंबर में खलीलाबाद में आयोजित कार्यक्रम में 127 जोड़ों का विवाह कराया गया। जनवरी में सरकार ने अनुदान की राशि बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दी। नौ फरवरी को खलीलाबाद में आयोजित कार्यक्रम में बहुत प्रयास के बाद 221 जोड़ों का विवाह संपन्न हो पाया। कुल मिलाकर 396 जोड़ों का ही विवाह हो पाया। लक्ष्य पूरा करने के लिए 1104 जोड़ों का विवाह 31 मार्च कतक कराया जाना है।
समाज कल्याण विभाग की तरफ से शादी अनुदान की योजना पुरानी है, लेकिन प्रदेश की योगी सरकार ने इसे सामाजिक बदलाव का जरिया बनाने के लिए नई पहल करते हुए इसके लिए कार्यक्रम आयोजित कराना शुरू कर दिया। पहले शादी करने वाले जोड़ों को 90 दिन के भीतर विभाग में आवेदन करना होता था जिस पर उन्हें अनुदान राशि दी जाती थी। अब सामूहिक कार्यक्रम आयोजित कर वधू को धनराशि के साथ-साथ उपहार दिया जा रहा है। लोग इन कार्यक्रमों में बेटे-बेटियों की शादी नहीं कराना चाहते। जिले को इस वर्ष 1500 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य मिला। पहला कार्यक्रम नवंबर में मेंहदावल में आयोजित हुआ। तमाम प्रयास के बावजूद 48 जोड़ों का ही विवाह हो पाया। दिसंबर में खलीलाबाद में आयोजित कार्यक्रम में 127 जोड़ों का विवाह कराया गया। जनवरी में सरकार ने अनुदान की राशि बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दी। नौ फरवरी को खलीलाबाद में आयोजित कार्यक्रम में बहुत प्रयास के बाद 221 जोड़ों का विवाह संपन्न हो पाया। कुल मिलाकर 396 जोड़ों का ही विवाह हो पाया। लक्ष्य पूरा करने के लिए 1104 जोड़ों का विवाह 31 मार्च कतक कराया जाना है।
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