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अधूरे शौचालय महिला समूहों को कर दिए हस्तांतरित
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अधूरे शौचालय महिला समूहों को कर दिए हस्तांतरित
हैंसर ब्लॉक के सामुदायिक शौचालयों का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। विकास खंड हैंसर बाजार में बनाए गए अधूरे सामुदायिक शौचालयों को महिला समूहों के हवाले कर दिया गया। जिसका प्रयोग गांव के लोग चाह कर भी नहीं कर पा रहे हैं।
गांवों में स्वच्छता के लिए पहले घर-घर शौचालय बनाए ही गए, उसके बाद भी शासन ने सभी ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर सामुदायिक शौचालय बनवाने का आदेश दिया। जिसका निर्माण भी विकास खंड की 75 ग्राम पंचायतों ने शुरू कर दिया। 11 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक भूमि न मिलने के कारण निर्माण कार्य आरंभ नहीं हो सका। सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य चल ही रहा था कि दिसबंर माह में तात्कालिक प्रधानों का कार्यभार समाप्त हो गया। उसके बाद प्रधान कार्य पर कम चुनाव पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिए। जिसका नतीजा हुआ कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य अधूरा रह गया। 75 में से 34 सामुदायिक शौचालय में जहां अभी तक सीट नहीं बैठी है, वहीं, कहीं विद्युत कनेक्शन नहीं तो कही मोटर ही नहीं लगा है। इसके कारण सामुदायिक शौचालयों पर ताला लटक रहा है। कहीं-कहीं तो फाटक और जंगला भी नहीं लगाए गए हैं। इधर, सभी सामुदायिक शौचालयों को समूहों को हस्तांतरित कर दिया गया। इतना ही नहीं समूह के खाता में शौचालय की सफाई करने के लिए 27-27 हजार रुपये भी भेज दिए गए हैं। कई महिला समूह के लोगों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि सामुदायिक शौचालय प्रयोग के योग्य अभी बनकर तैयार ही नहीं हुआ है। इसके कारण उनका प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इतना जरूर है कि सामुदायिक शौचालयों की बाहर से इस तरह रंगाई-पुताई कर दी गई है कि देखने में वे बेहतर हैं। इस संबंध में एडीओ पंचायत शिवकुमार तिवारी का कहना है कि सामुदायिक शौचालय एकदम प्रयोग के योग्य बनकर तैयार हैं। अगर कहीं कमी रह गई है तो उसे पूरा कराया जा रहा है। गांव को गंदगी से मुक्त रखने के लिए लोगों को शौचालय का प्रयोग करना चाहिए। समूह के लोग सामुदायिक शौचालयों की सफाई में लगे हैं। समूह के खाते में तीन-तीन माह का भुगतान कर दिया गया है।
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हैंसर ब्लॉक के सामुदायिक शौचालयों का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। विकास खंड हैंसर बाजार में बनाए गए अधूरे सामुदायिक शौचालयों को महिला समूहों के हवाले कर दिया गया। जिसका प्रयोग गांव के लोग चाह कर भी नहीं कर पा रहे हैं।
गांवों में स्वच्छता के लिए पहले घर-घर शौचालय बनाए ही गए, उसके बाद भी शासन ने सभी ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर सामुदायिक शौचालय बनवाने का आदेश दिया। जिसका निर्माण भी विकास खंड की 75 ग्राम पंचायतों ने शुरू कर दिया। 11 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक भूमि न मिलने के कारण निर्माण कार्य आरंभ नहीं हो सका। सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य चल ही रहा था कि दिसबंर माह में तात्कालिक प्रधानों का कार्यभार समाप्त हो गया। उसके बाद प्रधान कार्य पर कम चुनाव पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिए। जिसका नतीजा हुआ कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य अधूरा रह गया। 75 में से 34 सामुदायिक शौचालय में जहां अभी तक सीट नहीं बैठी है, वहीं, कहीं विद्युत कनेक्शन नहीं तो कही मोटर ही नहीं लगा है। इसके कारण सामुदायिक शौचालयों पर ताला लटक रहा है। कहीं-कहीं तो फाटक और जंगला भी नहीं लगाए गए हैं। इधर, सभी सामुदायिक शौचालयों को समूहों को हस्तांतरित कर दिया गया। इतना ही नहीं समूह के खाता में शौचालय की सफाई करने के लिए 27-27 हजार रुपये भी भेज दिए गए हैं। कई महिला समूह के लोगों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि सामुदायिक शौचालय प्रयोग के योग्य अभी बनकर तैयार ही नहीं हुआ है। इसके कारण उनका प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इतना जरूर है कि सामुदायिक शौचालयों की बाहर से इस तरह रंगाई-पुताई कर दी गई है कि देखने में वे बेहतर हैं। इस संबंध में एडीओ पंचायत शिवकुमार तिवारी का कहना है कि सामुदायिक शौचालय एकदम प्रयोग के योग्य बनकर तैयार हैं। अगर कहीं कमी रह गई है तो उसे पूरा कराया जा रहा है। गांव को गंदगी से मुक्त रखने के लिए लोगों को शौचालय का प्रयोग करना चाहिए। समूह के लोग सामुदायिक शौचालयों की सफाई में लगे हैं। समूह के खाते में तीन-तीन माह का भुगतान कर दिया गया है।
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