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Sant Kabir Nagar News: तड़पे या जाए जान, पहले पुलिस से मजरूबी चिट्ठी लाएं, तब होगा उपचार
Tue, 08 Aug 2023 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 08 Aug 2023 12:13 AM IST
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- थाने न पहुंच कर सीधे जिला अस्पताल पहुंचने वाले घायल के तीमारदार हो रहे परेशान
- घायलों के उपचार में देरी होने से जान जाने का भी बना रहता है खतरा
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। मारपीट की घटनाओं में घायल यदि थाने न जाकर सीधे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं तो उनके इलाज में रुकावट आ रही है। घायल का इलाज करने से चिकित्सक कतरा जा रहे हैं। घायलों के परिजनों को पहले पुलिस से मजरूबी चिट्ठी लाने का फरमान सुना रहे हैं, उसके बाद ही उपचार की बात कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में गंभीर रूप से घायल की जान भी जा सकती है।
पुलिस के मुताबिक, नियम है कि यदि मारपीट अथवा अपराध से संबंधित घायल जिला अस्पताल अथवा सीएचसी ,पीएचसी पहुंचे तो पहले चिकित्सक को घायल का उपचार करना चाहिए। बाद में इसकी सूचना पुलिस को दी जाए और फिर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो। मानवीय दृष्टिकोण से भी घायल का उपचार पहले होना चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल में ऐसे कई मामले पहुंच चुके हैं, जिसमें घायल का उपचार न करके पहले उन्हें पुलिस से मजरूबी चिट्ठी लाने के लिए कहा गया। ऐसे में मरीज को समय से उपचार नहीं मिल पाया। जब पुलिस मजरूबी चिट्ठी लेकर पहुंची तब उन्हें उपचार मिला। संवाद
केस नंबर- एक
करीब 25 दिन पूर्व दुधारा क्षेत्र के परसा झकरिया में हीरालाल और उनके बेटे दिलीप के बीच कहासुनी हुई। बेटा दिलीप गलत संगत में पड़कर नशा करने लगा था। हीरालाल की बाइक लेकर कहीं चला गया था। इसी बीच हीरा लाल को कहीं जाना था और बेटा दिलीप समय से बाइक लेकर नहीं पहुंचा। उसी विवाद में बाप-बेटे में चाकूबाजी हुई। जिसमें दोनों घायल हो गए थे। दोनों घायलों को अलग-अलग एबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने बेटे दिलीप को मृत घोषित कर दिया। जबकि घायल हीरालाल का उपचार डॉक्टर ने यह कहते हुए नहीं किया यह पुलिस का प्रकरण है, इसमें रेफरल रिपोर्ट चाहिए। उसके बाद पुलिस घायल को लेकर सीएचसी सेमरियावां गई और वहां से रेफरल रिपोर्ट लेकर जिला अस्पताल घायल को लाई, तब जाकर घायल का उपचार हो सका।
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केस-दो
महुली क्षेत्र के कड़सरा गांव में तीन जुलाई की देर शाम जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हुई थी। जिसमें एक पक्ष के दयाराम यादव की पत्नी को गंभीर चोटे आई। पीड़ित पति दयाराम अपनी घायल पत्नी को लेकर शुक्रवार को सीधे जिला अस्पताल पहुंचे,जहां डॉक्टर ने यह कहते हुए इलाज करने से मना कर दिया कि पहले थाने से मजरूबी चिट्ठी लाएं। दयाराम के एक परिचित वकील ने एसपी को फोन करके मामले की जानकारी दी। एसपी ने फिर सीएमओ को फोन किया, उसके बाद सीएमओ ने पहल की तो घायल का उपचार हुआ। शनिवार को महुली पुलिस ने घायल का मेडिकल कराया।
इंसेट
यदि गंभीर रूप से घायल जिला अस्पताल पहुंचे तो पहले उसका इलाज होना चाहिए, लेकिन यदि मारपीट की घटना में जैसे किसी को चाकू लगा हो और डॉक्टर टांका लगा देते हैं तो मेडिकल जांच में दिक्कत आती है। मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट नहीं होगी। फिलहाल सीएमएस से वार्ता करेंगे कि घायलों का उपचार हो। -डॉक्टर अनिरुद्ध सिंह, सीएमओ
थानों पर पहुंचने वाले घायलों को पुलिस तत्काल मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाती है। यदि कोई घायल सीधे जिला अस्पताल पहुंचे तो पहले डॉक्टर को उसका उपचार करना चाहिए। बाद में पुलिस सूचना पर कानूनी कार्रवाई करेगी। इसके बाबत सीएमओ से वार्ता करेंगे, ताकि सीधे जिला अस्पताल पहुंचने वाले घायलों को समय से उपचार मिल सकें। -सत्यजीत गुप्ता, एसपी
तीमारदार से डॉक्टर ने किया अमर्यादित व्यवहार
शहर के रहने वाले साहिल खान ने डीएम को तीन जुलाई को प्रार्थना पत्र दिया। उन्होंने बताया कि वह अपनी छह साल की बेटी साहिया को पैर में तकलीफ होने पर जिला अस्पताल ले गए। इमरजेंसी के चिकित्सक ने आईसीयू के चिकित्सक से सलाह लेने के लिए कहा। आईसीयू में चिकित्सक नहीं थे। स्टॉफ नर्स के बताने पर आईसीयू के चिकित्सक से फोन पर वार्ता की तो वह नाराज हो गए। फिर चिकित्सक से मिला तो उन्होंने अमर्यादित व्यवहार किया। इस वजह से बेटी का उपचार बाहर कराना पड़ा। डीएम संदीप कुमार ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आने पर जांच समिति गठित कर दी है। टीम में एएसडीएम रमेश चंद्र और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर महेंद्र प्रसाद को शामिल किया है। जांच टीम से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
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- घायलों के उपचार में देरी होने से जान जाने का भी बना रहता है खतरा
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। मारपीट की घटनाओं में घायल यदि थाने न जाकर सीधे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं तो उनके इलाज में रुकावट आ रही है। घायल का इलाज करने से चिकित्सक कतरा जा रहे हैं। घायलों के परिजनों को पहले पुलिस से मजरूबी चिट्ठी लाने का फरमान सुना रहे हैं, उसके बाद ही उपचार की बात कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में गंभीर रूप से घायल की जान भी जा सकती है।
पुलिस के मुताबिक, नियम है कि यदि मारपीट अथवा अपराध से संबंधित घायल जिला अस्पताल अथवा सीएचसी ,पीएचसी पहुंचे तो पहले चिकित्सक को घायल का उपचार करना चाहिए। बाद में इसकी सूचना पुलिस को दी जाए और फिर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो। मानवीय दृष्टिकोण से भी घायल का उपचार पहले होना चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल में ऐसे कई मामले पहुंच चुके हैं, जिसमें घायल का उपचार न करके पहले उन्हें पुलिस से मजरूबी चिट्ठी लाने के लिए कहा गया। ऐसे में मरीज को समय से उपचार नहीं मिल पाया। जब पुलिस मजरूबी चिट्ठी लेकर पहुंची तब उन्हें उपचार मिला। संवाद
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केस नंबर- एक
करीब 25 दिन पूर्व दुधारा क्षेत्र के परसा झकरिया में हीरालाल और उनके बेटे दिलीप के बीच कहासुनी हुई। बेटा दिलीप गलत संगत में पड़कर नशा करने लगा था। हीरालाल की बाइक लेकर कहीं चला गया था। इसी बीच हीरा लाल को कहीं जाना था और बेटा दिलीप समय से बाइक लेकर नहीं पहुंचा। उसी विवाद में बाप-बेटे में चाकूबाजी हुई। जिसमें दोनों घायल हो गए थे। दोनों घायलों को अलग-अलग एबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने बेटे दिलीप को मृत घोषित कर दिया। जबकि घायल हीरालाल का उपचार डॉक्टर ने यह कहते हुए नहीं किया यह पुलिस का प्रकरण है, इसमें रेफरल रिपोर्ट चाहिए। उसके बाद पुलिस घायल को लेकर सीएचसी सेमरियावां गई और वहां से रेफरल रिपोर्ट लेकर जिला अस्पताल घायल को लाई, तब जाकर घायल का उपचार हो सका।
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केस-दो
महुली क्षेत्र के कड़सरा गांव में तीन जुलाई की देर शाम जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हुई थी। जिसमें एक पक्ष के दयाराम यादव की पत्नी को गंभीर चोटे आई। पीड़ित पति दयाराम अपनी घायल पत्नी को लेकर शुक्रवार को सीधे जिला अस्पताल पहुंचे,जहां डॉक्टर ने यह कहते हुए इलाज करने से मना कर दिया कि पहले थाने से मजरूबी चिट्ठी लाएं। दयाराम के एक परिचित वकील ने एसपी को फोन करके मामले की जानकारी दी। एसपी ने फिर सीएमओ को फोन किया, उसके बाद सीएमओ ने पहल की तो घायल का उपचार हुआ। शनिवार को महुली पुलिस ने घायल का मेडिकल कराया।
इंसेट
यदि गंभीर रूप से घायल जिला अस्पताल पहुंचे तो पहले उसका इलाज होना चाहिए, लेकिन यदि मारपीट की घटना में जैसे किसी को चाकू लगा हो और डॉक्टर टांका लगा देते हैं तो मेडिकल जांच में दिक्कत आती है। मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट नहीं होगी। फिलहाल सीएमएस से वार्ता करेंगे कि घायलों का उपचार हो। -डॉक्टर अनिरुद्ध सिंह, सीएमओ
थानों पर पहुंचने वाले घायलों को पुलिस तत्काल मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाती है। यदि कोई घायल सीधे जिला अस्पताल पहुंचे तो पहले डॉक्टर को उसका उपचार करना चाहिए। बाद में पुलिस सूचना पर कानूनी कार्रवाई करेगी। इसके बाबत सीएमओ से वार्ता करेंगे, ताकि सीधे जिला अस्पताल पहुंचने वाले घायलों को समय से उपचार मिल सकें। -सत्यजीत गुप्ता, एसपी
तीमारदार से डॉक्टर ने किया अमर्यादित व्यवहार
शहर के रहने वाले साहिल खान ने डीएम को तीन जुलाई को प्रार्थना पत्र दिया। उन्होंने बताया कि वह अपनी छह साल की बेटी साहिया को पैर में तकलीफ होने पर जिला अस्पताल ले गए। इमरजेंसी के चिकित्सक ने आईसीयू के चिकित्सक से सलाह लेने के लिए कहा। आईसीयू में चिकित्सक नहीं थे। स्टॉफ नर्स के बताने पर आईसीयू के चिकित्सक से फोन पर वार्ता की तो वह नाराज हो गए। फिर चिकित्सक से मिला तो उन्होंने अमर्यादित व्यवहार किया। इस वजह से बेटी का उपचार बाहर कराना पड़ा। डीएम संदीप कुमार ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आने पर जांच समिति गठित कर दी है। टीम में एएसडीएम रमेश चंद्र और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर महेंद्र प्रसाद को शामिल किया है। जांच टीम से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।