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पल भर में गीतों की गुनगुनाहट बदल गई चीत्कार में
वीरेंद्र यादव/sant kabir nagar
Updated Tue, 31 Jan 2017 12:17 AM IST
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हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की टीम के साथ बचाव कार्य में सहयोग किया।
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर जिले के खजनी थानाक्षेत्र के कुआं बुजुर्ग गांव निवासी पूर्व ग्राम प्रधान रामचंद्र मौर्य के परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। बडे़ अरमान के साथ रामचंद्र ने पोते उत्कर्ष का मुंडन अयोध्या में कराने का मन बनाया।
इस खुशी में गांव के लोगों को भी शामिल करने की मंशा से उन्होंने एक निजी बस बुक कराई। बस गांव से रवाना हुई तो परिवार के साथ ही गांव के लोग काफी खुश थे। महिलाएं मंगलगीत गा रहीं थी, जबकि लोग जल्द अयोध्या पहुंचने को बेताब थे। लेकिन बस में सवार लोगों को यह नहीं मालूम था कि यह यात्रा उनके जीवन को काल में मुंह मेें ले जा रही है। बस में सवार छह लोगों के लिए तो कांटे के पास हुआ हादसा अंतिम यात्रा के रूप में तब्दील हो गया। मरने वालों में पूर्व प्रधान रामचंद्र के साथ ही उनकी साली सावित्री देवी भी शामिल हैं।
हादसे के समय बस में सफर कर रहे उत्कर्ष के पिता सत्येंद्र कुमार खुद भी चोटिल हैं, लेकिन उनका रो-रोकर बुरा हाल है। पूछने पर बोले कि पिता रामचंद्र ने उत्कर्ष के मुंडन के लिए अयोध्या चलने का प्लान बनाया। पिता को खो चुके सत्येंद्र ने कहा कि वह बस में पिछली सीट पर थे, शायद इसीलिए बच गए, लेकिन अगली सीट पर बैठे पिता व उनकी मौसी हादसे की शिकार हो गईं।
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खुद संयमित करते हुए कहा कि यदि पता होता कि यह दिन देखना पडे़गा तो अयोध्या जाने की नहीं सोचते। उनके परिवार के साथ ही हादसे में चार अन्य लोग भी दुनिया छोड़ गए है। जिला अस्पताल पर आए गांव के लोगों के चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई थी। हर कोई बदहवास होकर अपने को तलाश रहा था। गांव के लोग इस हादसे में जान गवाने वालों की बात कहकर गमगीन थे। कुछ लोगों ने बताया कि बस रास्ते में थी लोग काफी खुश थे, कुछ महिलाएं गीत भी गा रही थी, लेकिन अचानक सबकुछ बिखर गया।
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इस खुशी में गांव के लोगों को भी शामिल करने की मंशा से उन्होंने एक निजी बस बुक कराई। बस गांव से रवाना हुई तो परिवार के साथ ही गांव के लोग काफी खुश थे। महिलाएं मंगलगीत गा रहीं थी, जबकि लोग जल्द अयोध्या पहुंचने को बेताब थे। लेकिन बस में सवार लोगों को यह नहीं मालूम था कि यह यात्रा उनके जीवन को काल में मुंह मेें ले जा रही है। बस में सवार छह लोगों के लिए तो कांटे के पास हुआ हादसा अंतिम यात्रा के रूप में तब्दील हो गया। मरने वालों में पूर्व प्रधान रामचंद्र के साथ ही उनकी साली सावित्री देवी भी शामिल हैं।
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हादसे के समय बस में सफर कर रहे उत्कर्ष के पिता सत्येंद्र कुमार खुद भी चोटिल हैं, लेकिन उनका रो-रोकर बुरा हाल है। पूछने पर बोले कि पिता रामचंद्र ने उत्कर्ष के मुंडन के लिए अयोध्या चलने का प्लान बनाया। पिता को खो चुके सत्येंद्र ने कहा कि वह बस में पिछली सीट पर थे, शायद इसीलिए बच गए, लेकिन अगली सीट पर बैठे पिता व उनकी मौसी हादसे की शिकार हो गईं।
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खुद संयमित करते हुए कहा कि यदि पता होता कि यह दिन देखना पडे़गा तो अयोध्या जाने की नहीं सोचते। उनके परिवार के साथ ही हादसे में चार अन्य लोग भी दुनिया छोड़ गए है। जिला अस्पताल पर आए गांव के लोगों के चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई थी। हर कोई बदहवास होकर अपने को तलाश रहा था। गांव के लोग इस हादसे में जान गवाने वालों की बात कहकर गमगीन थे। कुछ लोगों ने बताया कि बस रास्ते में थी लोग काफी खुश थे, कुछ महिलाएं गीत भी गा रही थी, लेकिन अचानक सबकुछ बिखर गया।