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रोशन हुए नगर और गांव, दिवाली आज
Sant Kabir Nagar
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:28 PM IST
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दिवाली
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिवाली को लेकर नगर से लेकर गांव में लोगों तैयारी पूरी कर ली। दीपावली की पूर्व संध्या पर शनिवार को लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। लोगों ने दीपपर्व को श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाने की पूरी तैयारी कर रखी है। चाहे घर हो या फिर व्यवसायिक प्रतिष्ठान, सुख व समृद्धि के इस त्योहार को रविवार को पूरी आस्था एवं परंपरा के साथ मनाया जाएगा। इंतजार है तो बस उस पल का जब मां लक्ष्मी व गणेश की पूजा-अर्चना के बाद पूरा शहर रोशनी से नहा उठेगा और आतिशबाजी की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी। शनिवार को नरक चतुर्दशी के मौके पर लोगों ने घरों में दीपदान किया। शाम होते ही शहर झिलमिल रोशनी से नहा उठा।
मान्यता है कि इस दिन घर के बाहर घूर पर दीपदान से नरक से मुक्ति मिलती है। वहीं पूजा पंडालों पर मां लक्ष्मी की विधिविधान से पूजा की गई। इस बीच पूरे दिन पंडालों से गूंजते वेद मंत्र और भजनों से शहर का माहौल देवीमय हो गया। धनतेरस के बाद से दिवाली की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं। शनिवार को पूरे दिन बाजार में भारी भीड़ रही। कपड़े, फूल, मिठाई, लाई-गट्टा, सजावट के सामान, इलेक्ट्रानिक उपकरण, फर्नीचर की दुकानों पर देर शाम तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहा। जो किसी कारणवश धनतेरस की खरीदारी नहीं कर सके थे, उन्होंने की संख्या बाजार में ज्यादा दिखी। खलीलाबाद के गोलाबाजार में खरीदारों की भीड़ शनिवार को धनतेरस से भी अधिक रही। इसी का आलम था कि दोपहर में बैंकों के एटीएम जवाब देते नजर आए। जहां रकम निकल रही थी, वहां लंबी कतार लगी दिखी। धनघटा, हैंसर, पौली, मेंहदावल, सेमरियावां, बखिरा, बेलहर, सांथा, नंदौर आदि जगहों पर भी लोग खरीदारी करते देखे गए।
पंडित दयानंद शुक्ला ने बताया कि दीवापली में प्रदोष काल में दीपक जला कर लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी गणेश और हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा , वृष और सिंह लग्र में करावें। सूर्यास्त होने के बाद लोग दीपक जलाएं। पहला दीपक आंगन और फिर देवी -देवताओं के मंदिर, तुलसी के विरवा के पास जलाएं। रविवार की शाम छह बजकर 15 मिनट से आठ बज कर 11 मिनट तक प्रदोष काल वृष लग्न है। उसी बीच में लक्ष्मी, गणेश,कलम , दवात,कुबेेेर, बहीखाता का पूजन करावें। महानिशा पूजन के लिए रात 12 बज कर 40 मिनट से दो बज कर 57 मिनट तक विशेष लाभप्रद है। प्रत्येक हिंदू के घर में व्यवसायिक प्रतिष्ठान दीप कन्याओं से पहले जलवाना चाहिए।
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मान्यता है कि इस दिन घर के बाहर घूर पर दीपदान से नरक से मुक्ति मिलती है। वहीं पूजा पंडालों पर मां लक्ष्मी की विधिविधान से पूजा की गई। इस बीच पूरे दिन पंडालों से गूंजते वेद मंत्र और भजनों से शहर का माहौल देवीमय हो गया। धनतेरस के बाद से दिवाली की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं। शनिवार को पूरे दिन बाजार में भारी भीड़ रही। कपड़े, फूल, मिठाई, लाई-गट्टा, सजावट के सामान, इलेक्ट्रानिक उपकरण, फर्नीचर की दुकानों पर देर शाम तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहा। जो किसी कारणवश धनतेरस की खरीदारी नहीं कर सके थे, उन्होंने की संख्या बाजार में ज्यादा दिखी। खलीलाबाद के गोलाबाजार में खरीदारों की भीड़ शनिवार को धनतेरस से भी अधिक रही। इसी का आलम था कि दोपहर में बैंकों के एटीएम जवाब देते नजर आए। जहां रकम निकल रही थी, वहां लंबी कतार लगी दिखी। धनघटा, हैंसर, पौली, मेंहदावल, सेमरियावां, बखिरा, बेलहर, सांथा, नंदौर आदि जगहों पर भी लोग खरीदारी करते देखे गए।
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पंडित दयानंद शुक्ला ने बताया कि दीवापली में प्रदोष काल में दीपक जला कर लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी गणेश और हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा , वृष और सिंह लग्र में करावें। सूर्यास्त होने के बाद लोग दीपक जलाएं। पहला दीपक आंगन और फिर देवी -देवताओं के मंदिर, तुलसी के विरवा के पास जलाएं। रविवार की शाम छह बजकर 15 मिनट से आठ बज कर 11 मिनट तक प्रदोष काल वृष लग्न है। उसी बीच में लक्ष्मी, गणेश,कलम , दवात,कुबेेेर, बहीखाता का पूजन करावें। महानिशा पूजन के लिए रात 12 बज कर 40 मिनट से दो बज कर 57 मिनट तक विशेष लाभप्रद है। प्रत्येक हिंदू के घर में व्यवसायिक प्रतिष्ठान दीप कन्याओं से पहले जलवाना चाहिए।
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