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Sant Kabir Nagar News: सेवा में रहते की है पीजी तो एक करोड़ की रिकवरी
Sun, 30 Mar 2025 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 30 Mar 2025 01:04 AM IST
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संतकबीरनगर। जिले के तीन चिकित्सकों पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कार्रवाई का निर्देश प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को दिया है। डिप्टी सीएम के इस फरमान के बाद विभाग अब इन चिकित्सकों पर कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
यह भी देख रहा है कि अगर इसमें से किसी चिकित्सक ने सरकारी सेवा में रहते हुए सरकारी खर्चे पर पीजी की है तो उसे एक करोड़ जुर्माना भी भरना होगा। अगर ऐसा नहीं करता है तो उस चिकित्सक पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
जिला अस्पताल में कार्यरत तीन चिकित्सक सर्जन डॉ. संदीप कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार गुप्त, ईएनटी सर्जन डॉ. धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप लगे हैं। शासन में शिकायत मिलने पर इन चिकित्सकों पर कार्रवाई का निर्देश डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा को दिया है।
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हालांकि, इन सभी चिकित्सकों ने पूर्व में ही शासन को अपना इस्तीफा भेज दिया था। बताया जा रहा है कि अभी तक इनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। हालांकि, विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पहले से ही शासन को पत्र भेजा था।
अब विभाग इन चिकित्सकों का रिकाॅर्ड खंगाल रहा है कि अगर इसमें से कोई चिकित्सक ड्यूटी के दौरान सरकारी खर्च पर पीजी का प्रशिक्षण लिए होंगे तो उन्हें एक करोड़ रुपये जुर्माना भरना होगा।
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यह भी देख रहा है कि अगर इसमें से किसी चिकित्सक ने सरकारी सेवा में रहते हुए सरकारी खर्चे पर पीजी की है तो उसे एक करोड़ जुर्माना भी भरना होगा। अगर ऐसा नहीं करता है तो उस चिकित्सक पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
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जिला अस्पताल में कार्यरत तीन चिकित्सक सर्जन डॉ. संदीप कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार गुप्त, ईएनटी सर्जन डॉ. धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप लगे हैं। शासन में शिकायत मिलने पर इन चिकित्सकों पर कार्रवाई का निर्देश डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा को दिया है।
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हालांकि, इन सभी चिकित्सकों ने पूर्व में ही शासन को अपना इस्तीफा भेज दिया था। बताया जा रहा है कि अभी तक इनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। हालांकि, विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पहले से ही शासन को पत्र भेजा था।
अब विभाग इन चिकित्सकों का रिकाॅर्ड खंगाल रहा है कि अगर इसमें से कोई चिकित्सक ड्यूटी के दौरान सरकारी खर्च पर पीजी का प्रशिक्षण लिए होंगे तो उन्हें एक करोड़ रुपये जुर्माना भरना होगा।