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Sant Kabir Nagar News: अविश्वास प्रस्ताव की याचिका हाईकोर्ट ने भी खारिज की,DM ने पहले किया था, जुर्माना भी लगा

Sun, 22 Sep 2024 01:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 22 Sep 2024 01:34 PM IST
सार

27 जुलाई को सेमरियावां ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे जिलाधिकारी ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ हाजरा खातून की अविश्वास प्रस्ताव के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने भी इसे खारिज कर दिया। जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा एवं जयंत बनर्जी की पीठ ने न्यायालय को गुमराह करने पर याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। ये जुर्माना सीएम राहत कोष में जमा करना होगा।

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High Court rejected the petition of no-confidence motion, imposed 50 thousand damages
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संतकबीरनगर के क्षेत्र पंचायत सेमरियावां में चल रही उठापटक के बीच हाईकोर्ट ने हाजरा खातून की अविश्वास प्रस्ताव के लिए दायर याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा एवं जयंत बनर्जी की पीठ ने न्यायालय को गुमराह करने पर याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।
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डीएम के अविश्वास प्रस्ताव खारिज करने पर हाजरा खातून ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 27 जुलाई को सेमरियावां ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था जिसे जिलाधिकारी ने खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट में हाजरा खातून के वकील की ओर से बताया गया कि 91 नोटरीकृत हलफनामों के साथ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
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डीएम कार्यालय, संत कबीर नगर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिलाधिकारी ने इसे खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात डिस्पैच क्लर्क को तलब किया था। क्लर्क की रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट ने जारी आदेश में कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव की सूचना अवैध है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि याचिका और पूरक हलफनामे के अवलोकन से पता चलता है कि हलफनामा में महमूद अहमद पुत्र मशहूर आलम चौधरी द्वारा शपथ पत्र दिया गया है। दोनों हलफनामों में कहा गया है कि वह एक मात्र याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे हैं।

हलफनामे में अभिसाक्षी का कोई विवरण नहीं है। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि महमूद अहमद याचिकाकर्ता के पति व क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जान-बूझकर गुमराह करने का प्रयास किया है। आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं हैं, आरोप सुनी-सुनाई बातों पर आधारित है।

मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होगी हर्जाने की रकम
याचिका में जिलाधिकारी पर जान-बूझकर प्रस्ताव खारिज करने के आरोप लगाए गए थे। इस पर कोर्ट ने कहा है कि हाजरा के पति महमूद अहमद को रिकॉर्ड तक कैसे पहुंच मिली जिसके आधार पर जिलाधिकारी के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाने के साथ ही याचिका खारिज कर दी। हर्जाने की रकम एक माह के भीतर मुख्यमंत्री राहत कोष में बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट को सौंपने का आदेश दिया है।
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