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Sant Kabir Nagar News: बनता है मददगार, होता है निजी अस्पताल का दलाल
Sun, 25 Jun 2023 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 25 Jun 2023 11:19 PM IST
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जिलाअस्पताल से 2.15 बजे स्टेचर पर बीमार को बाहर जांच कराने ले जाते परिजन।संवाद
संतकबीरनगर। जिले में सरकारी अस्पतालों से साठगांठ कर मुन्ना भाई अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। सरकार डॉक्टरों से गठजोड़ इतना है कि वह अल्ट्रासाउंड, खून जांच, सीटी स्कैन कर मालामाल हो रहे हैं। यही नहीं जिला अस्पताल में दिन रात बिचौलिए डेरा जमाए हुए हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को दवा खरीदवानी हो या उनकी जांच कराना हो तो बिचौलिए हावी हैं। निजी लैब से बाकायदा स्ट्रेचर भी भेजते हैं, और परिजन मरीज को पैथालॉजी में ले जाकर जांच कराते हैं।
यह नजारा रविवार को अस्पताल की इमरजेंसी में देखने को मिला। वैसे अन्य दिनों में भी ओपीडी से लगते महिला अस्पताल तक यह खेल चलता है। शहर समेत जिले के कई बड़े निजी अस्पतालों का काम सरकारी अस्पतालों से मरीज उठाकर बिचौलिए चला रहे हैं। जिला अस्पताल में दिन रात बिचौलियों का डेरा जमा रहता है। यही नहीं, अस्पताल के बाहर खुली दवा की दुकानों का धंधा भी इन्हीं दलालों के जरिये चल रहा है।
ओपीडी में यह दलाल प्रतिदिन सक्रिय रहते हैं और चिकित्सक के कक्ष में मौजूद रहकर मरीजों को दवा दिलाने बाहर दुकान पर ले जाते हैं। इसमें चिकित्सकों की भी शह दलालों को रहती है। जिला अस्पताल में बिचौलिए घूमते रहते हैं और डॉक्टरों से सेटिंग कर दवा लिखवाते हैं। यही नहीं जच्चा-बच्चा वार्ड में भी केस निजी अस्पतालों को रेफर कर मोटी कमाई करते हैं। बिचौलियों के इस खेल में मुन्ना भाई की चांदी रहती है। दवा खरीदवाकर बिचौलिए कमीशन बनाते हैं। सूत्र बताते हैं कि यह धंधा प्रत्येक दिन डेढ़ से दो लाख के बीच होता है।
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केस 1-
2.15 बजे, इमरजेंसी में पहुंचे मरीज का तत्काल कराया सीटी स्कैन
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को एक 60 वर्षीय मरीज पहुंचा। चिकित्सक ने उसे देखते हुए तत्काल अस्पताल के बाहर सीटी स्कैन कराने के लिए भेज दिया। मरीज के साथ आए सुग्रीव ने बताया कि बाहर सीटी स्कैन के लिए 2400 रुपये मांग रहे थे, लेकिन दो हजार में तय हुआ है। मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर खुद सीटी स्कैन वाले ने दिया है। उसका कहना है कि उनका आदमी जाएगा तो कोई फोटो खींच लेगा।
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केस दो-
1.50 बजे महिलाओं ने खुद खींचा स्ट्रेचर
अस्पताल की इमरजेंसी में 55 वर्षीय महिला को साथ लेकर दो महिलाएं पहुंची थीं। महिला के शरीर में दर्द था और कमजोरी थी, जिसके बाद चिकित्सक ने सीटी स्कैन कराने के लिए कहा। महिलाएं अस्पताल के बाहर पहुंची और पैथालॉजी से खुद स्ट्रेचर खींच कर इमरजेंसी तक लाई, लेकिन बुजुर्ग महिला ने बैठने से इन्कार कर दिया। फिर महिला ने स्ट्रेचर खींच कर पैथालॉजी तक पहुंचाया। संगीता ने बताया कि सीटी स्कैन के लिए दो हजार रुपये लिए गए हैं।
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पांच माह पहले पकड़े गए थे तीन बिचौलिए
जिला अस्पताल की ओपीडी में पांच माह पहले तीन बिचौलिए पकड़े गए थे, तत्कालीन सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने इन बिचौलियों को पुलिस के हवाले कर दिया था, लेकिन अस्पताल से कोई तहरीर न मिलने पर पुलिस ने इनको छोड़ दिया है।
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निजी अस्पतालों पर मेहरबान रहते हैं सरकारी चिकित्सक
शहर के कुछ ऐसे निजी अस्पताल हैं, जिसमें सरकारी चिकित्सक मेहरबान रहते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीज का अगर ऑपरेेशन होना होता है तो उन्हें निजी अस्पताल बुलाते हैं और वहीं ऑपरेशन करते हैं। चिकित्सक की ओपीडी से दो बजे ड्यूटी खत्म होती है तो वह तत्काल अपने निजी अस्पताल पहुंच जाते हैं, और वहीं मरीजों का इलाज करते हैं। शहर में तीन ऐसे अस्पताल चर्चा में हैं।
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अस्पताल में सभी प्रकार की जांच होती है, छुट़्टी के दिन उन्हीं मरीजों की जांच बाहर कराई जा सकती है, जो गंभीर होते हैं। वैसे उन्हें अस्पताल में दूसरे दिन बुलाने का निर्देश इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों को दिया गया है, फिर भी अगर कोई ऐसी शिकायत आती है, तो उसकी जांच कराई जाएगी, ओपीडी के चिकित्सकों को सख्त हिदायत दी गई है कि अपने कक्ष में किसी भी बाहरी को न बिठाएं।
-डॉ. महेश प्रसाद, सीएमएस, जिला अस्पताल
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यह नजारा रविवार को अस्पताल की इमरजेंसी में देखने को मिला। वैसे अन्य दिनों में भी ओपीडी से लगते महिला अस्पताल तक यह खेल चलता है। शहर समेत जिले के कई बड़े निजी अस्पतालों का काम सरकारी अस्पतालों से मरीज उठाकर बिचौलिए चला रहे हैं। जिला अस्पताल में दिन रात बिचौलियों का डेरा जमा रहता है। यही नहीं, अस्पताल के बाहर खुली दवा की दुकानों का धंधा भी इन्हीं दलालों के जरिये चल रहा है।
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ओपीडी में यह दलाल प्रतिदिन सक्रिय रहते हैं और चिकित्सक के कक्ष में मौजूद रहकर मरीजों को दवा दिलाने बाहर दुकान पर ले जाते हैं। इसमें चिकित्सकों की भी शह दलालों को रहती है। जिला अस्पताल में बिचौलिए घूमते रहते हैं और डॉक्टरों से सेटिंग कर दवा लिखवाते हैं। यही नहीं जच्चा-बच्चा वार्ड में भी केस निजी अस्पतालों को रेफर कर मोटी कमाई करते हैं। बिचौलियों के इस खेल में मुन्ना भाई की चांदी रहती है। दवा खरीदवाकर बिचौलिए कमीशन बनाते हैं। सूत्र बताते हैं कि यह धंधा प्रत्येक दिन डेढ़ से दो लाख के बीच होता है।
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केस 1-
2.15 बजे, इमरजेंसी में पहुंचे मरीज का तत्काल कराया सीटी स्कैन
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को एक 60 वर्षीय मरीज पहुंचा। चिकित्सक ने उसे देखते हुए तत्काल अस्पताल के बाहर सीटी स्कैन कराने के लिए भेज दिया। मरीज के साथ आए सुग्रीव ने बताया कि बाहर सीटी स्कैन के लिए 2400 रुपये मांग रहे थे, लेकिन दो हजार में तय हुआ है। मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर खुद सीटी स्कैन वाले ने दिया है। उसका कहना है कि उनका आदमी जाएगा तो कोई फोटो खींच लेगा।
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केस दो-
1.50 बजे महिलाओं ने खुद खींचा स्ट्रेचर
अस्पताल की इमरजेंसी में 55 वर्षीय महिला को साथ लेकर दो महिलाएं पहुंची थीं। महिला के शरीर में दर्द था और कमजोरी थी, जिसके बाद चिकित्सक ने सीटी स्कैन कराने के लिए कहा। महिलाएं अस्पताल के बाहर पहुंची और पैथालॉजी से खुद स्ट्रेचर खींच कर इमरजेंसी तक लाई, लेकिन बुजुर्ग महिला ने बैठने से इन्कार कर दिया। फिर महिला ने स्ट्रेचर खींच कर पैथालॉजी तक पहुंचाया। संगीता ने बताया कि सीटी स्कैन के लिए दो हजार रुपये लिए गए हैं।
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पांच माह पहले पकड़े गए थे तीन बिचौलिए
जिला अस्पताल की ओपीडी में पांच माह पहले तीन बिचौलिए पकड़े गए थे, तत्कालीन सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने इन बिचौलियों को पुलिस के हवाले कर दिया था, लेकिन अस्पताल से कोई तहरीर न मिलने पर पुलिस ने इनको छोड़ दिया है।
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निजी अस्पतालों पर मेहरबान रहते हैं सरकारी चिकित्सक
शहर के कुछ ऐसे निजी अस्पताल हैं, जिसमें सरकारी चिकित्सक मेहरबान रहते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीज का अगर ऑपरेेशन होना होता है तो उन्हें निजी अस्पताल बुलाते हैं और वहीं ऑपरेशन करते हैं। चिकित्सक की ओपीडी से दो बजे ड्यूटी खत्म होती है तो वह तत्काल अपने निजी अस्पताल पहुंच जाते हैं, और वहीं मरीजों का इलाज करते हैं। शहर में तीन ऐसे अस्पताल चर्चा में हैं।
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अस्पताल में सभी प्रकार की जांच होती है, छुट़्टी के दिन उन्हीं मरीजों की जांच बाहर कराई जा सकती है, जो गंभीर होते हैं। वैसे उन्हें अस्पताल में दूसरे दिन बुलाने का निर्देश इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों को दिया गया है, फिर भी अगर कोई ऐसी शिकायत आती है, तो उसकी जांच कराई जाएगी, ओपीडी के चिकित्सकों को सख्त हिदायत दी गई है कि अपने कक्ष में किसी भी बाहरी को न बिठाएं।
-डॉ. महेश प्रसाद, सीएमएस, जिला अस्पताल