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पांच बाल रोग विशेषज्ञों पर तीन लाख नौनिहालों के स्वास्थ्य का जिम्मा
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जिला अस्पताल की फोटो।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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पांच बाल रोग विशेषज्ञों पर तीन लाख नौनिहालों के स्वास्थ्य का जिम्मा
- जिले में आठ बाल रोग विशेषज्ञ तैनात, इनमें से तीन अपर सीएमओ के पद पर कर रहे कार्य
- डब्लूएचओ के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक चिकित्सक का होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सरकार स्वास्थ्य महकमे की बेहतरी के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन इससे इतर यहां पर चिकित्सकों की कमी नौनिहालों के इलाज पर भारी पड़ रहा है। जिले की आबादी के अनुसार चिकित्सक ही नहीं है। जिले में कुल दो लाख 96 हजार बच्चे पंजीकृत हैं, इनके इलाज के लिए कुल आठ बाल रोग चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से भी तीन सीएमओ कार्यालय पर अपर सीएमओ के पद को सुशोभित कर रहे हैं। ऐसे में कुल पांच चिकित्सकों पर ही तीन लाख बच्चों के स्वास्थ्य का जिम्मा है।
डब्लूएचओ के मानक के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक चिकित्सक का होना जरूरी है। जिले में एक जिला अस्पताल, छह सीएचसी और करीब 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बने हुए हैं। इसमें जिला अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, जबकि खलीलाबाद और मेंहदावल में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं। सेमरियावां, मलौली, नाथनगर और सांथा में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है।
सीएमओ कार्यालय में तीन अपर सीएमओ स्तर के अधिकारी बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिले में कुल आठ बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें से मात्र पांच ही कार्यरत हैं। जिले में शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के दो लाख 96 हजार बच्चे चिह्नित हैं।
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जिला अस्पताल में बच्चो के लिए अलग से 20 बेड का पीकू वार्ड (पीडियाट्रिक इटेंसिव केयर यूनिट) भी बना हुआ है। इनमें से कुछ लोग तो जिला अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं और ग्रामीण क्षेत्रो के लोगों को अगर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिलते है तो प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेते हैं। जिससे उन्हें अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है।
सीएमओ कार्यालय ने इस बावत स्वास्थ्य महानिदेशालय को बाल रोग विशेषज्ञ भेजने के लिए पत्र भी भेजा है, लेकिन अभी तक बाल रोग विशेषज्ञ जिले को नहीं मिल पाए हैं।
बच्चों के इलाज में होती है परेशानी
जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी से बच्चों को इलाज में परेशानी उठानी पड़ रही है। मलौली, सेमरियावां, सांथा और नाथनगर सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में अगर किसी बच्चे की तबियत खराब होती है बच्चों को दूसरी जगह दिखाना पड़ता है। गरीब तबके के लोगों को बाहर इलाज कराने में अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। जिले में बाल रोग विशेषज्ञ के प्राइवेट चिकित्सक भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।
बच्चों की संख्या के अनुसार बाल रोग विशेषज्ञ कम है। जिनकी तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। वर्तमान में जो भी चिकित्सक हैं वह बच्चों का इलाज कर रहे हैं।
- डॉ. मोहन झा, अपर सीएमओ
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- जिले में आठ बाल रोग विशेषज्ञ तैनात, इनमें से तीन अपर सीएमओ के पद पर कर रहे कार्य
- डब्लूएचओ के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक चिकित्सक का होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सरकार स्वास्थ्य महकमे की बेहतरी के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन इससे इतर यहां पर चिकित्सकों की कमी नौनिहालों के इलाज पर भारी पड़ रहा है। जिले की आबादी के अनुसार चिकित्सक ही नहीं है। जिले में कुल दो लाख 96 हजार बच्चे पंजीकृत हैं, इनके इलाज के लिए कुल आठ बाल रोग चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से भी तीन सीएमओ कार्यालय पर अपर सीएमओ के पद को सुशोभित कर रहे हैं। ऐसे में कुल पांच चिकित्सकों पर ही तीन लाख बच्चों के स्वास्थ्य का जिम्मा है।
डब्लूएचओ के मानक के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक चिकित्सक का होना जरूरी है। जिले में एक जिला अस्पताल, छह सीएचसी और करीब 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बने हुए हैं। इसमें जिला अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, जबकि खलीलाबाद और मेंहदावल में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं। सेमरियावां, मलौली, नाथनगर और सांथा में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है।
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सीएमओ कार्यालय में तीन अपर सीएमओ स्तर के अधिकारी बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिले में कुल आठ बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें से मात्र पांच ही कार्यरत हैं। जिले में शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के दो लाख 96 हजार बच्चे चिह्नित हैं।
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जिला अस्पताल में बच्चो के लिए अलग से 20 बेड का पीकू वार्ड (पीडियाट्रिक इटेंसिव केयर यूनिट) भी बना हुआ है। इनमें से कुछ लोग तो जिला अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं और ग्रामीण क्षेत्रो के लोगों को अगर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिलते है तो प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेते हैं। जिससे उन्हें अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है।
सीएमओ कार्यालय ने इस बावत स्वास्थ्य महानिदेशालय को बाल रोग विशेषज्ञ भेजने के लिए पत्र भी भेजा है, लेकिन अभी तक बाल रोग विशेषज्ञ जिले को नहीं मिल पाए हैं।
बच्चों के इलाज में होती है परेशानी
जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी से बच्चों को इलाज में परेशानी उठानी पड़ रही है। मलौली, सेमरियावां, सांथा और नाथनगर सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में अगर किसी बच्चे की तबियत खराब होती है बच्चों को दूसरी जगह दिखाना पड़ता है। गरीब तबके के लोगों को बाहर इलाज कराने में अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। जिले में बाल रोग विशेषज्ञ के प्राइवेट चिकित्सक भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।
बच्चों की संख्या के अनुसार बाल रोग विशेषज्ञ कम है। जिनकी तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। वर्तमान में जो भी चिकित्सक हैं वह बच्चों का इलाज कर रहे हैं।
- डॉ. मोहन झा, अपर सीएमओ