फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   Health department launches investigation after newborn dies due to lack of ventilator

Sant Kabir Nagar News: वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में जांच शुरू

Sun, 13 Sep 2026 12:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 12:57 AM IST
विज्ञापन
Health department launches investigation after newborn dies due to lack of ventilator
जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात
संतकबीरनगर। सुल्तानपुर में वेंटिलेटर की कमी के चलते नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे में जिला अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों को लेकर जांच-पड़ताल शुरू हो गई है। संयुक्त जिला अस्पताल में 30 बेड के पीकू वार्ड में सभी 30 बेड पर बच्चे भर्ती हैं। वहीं 18 बेड की एसएनसीयू में 20 नवजात भर्ती हैं। अस्पताल में 10 बेड की बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई भी बनी है। इसके बावजूद गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू की सुविधा नहीं है। ऐसे मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। इससे जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन

100 बेड के जिला अस्पताल में बच्चों और नवजातों के इलाज के लिए पीकू और एसएनसीयू वार्ड बनाए गए हैं। पीकू में 30 और एसएनसीयू में 18 बेड हैं। एसएनसीयू में पीलिया, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित नवजातों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए प्लांट लगा है। इसके अलावा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध हैं। बच्चों के इलाज के लिए तीन बेड का कंगारू मदर्स केयर वार्ड भी बनाया गया है। यहां कम वजन और अन्य समस्याओं से पीड़ित बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
विज्ञापन

अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2025 से अब तक विभिन्न बीमारियों के चलते 35 नवजातों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा चुका है। एसएनसीयू से रेफर किए गए नवजातों की जानकारी दर्ज की जाती है। परिजन के मोबाइल नंबर भी पंजिका में दर्ज रहते हैं ताकि अस्पताल कर्मी बाद में बच्चों की स्थिति की जानकारी ले सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू की सुविधा नहीं है। हार्ट और न्यूरो से जुड़े गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां हृदय और न्यूरो विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र भेजना पड़ता है।

नवजात और बड़े मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। बच्चों के लिए बाल रोग विशेषज्ञ पर्याप्त संख्या में हैं और नवजात व बच्चों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा भी उपलब्ध है। अस्पताल में हार्ट और न्यूरो के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं, इसलिए आईसीयू की स्थापना नहीं हो सकी है। इसके लिए शासन को पत्राचार किया गया है।
- डॉ. रमाशंकर, सीएमएस, जिला अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed