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महिलाओं ने विधिवत की गोवर्धन पूजा
संतकबीरनगर/ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2016 11:05 PM IST
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गाेवर्धन पूजा
- फोटो : अंबरीष मिश्र
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संतकबीरनगर। मंगलवार को जिले में कई जगहों पर गोवर्धन पूजा की गई। खलीलाबाद के किशोर धर्मशाला परिसर में युवतियों और महिलाओं ने एकत्र होकर विधिवत गोवर्धन पूजा की।
इस दौरान अच्छत, चंदन, धूप, दीप से पूजा के बाद भोग चढ़ाए। इस अवसर पर मोनी, शिल्पी वर्मा, प्रीति गुप्ता, मुस्कान, रोमा, गुड़िया, माधुरी आदि लड़कियां व महिलाएं मौजूद रहीं। इसी प्रकार बखिरा कसबे मे महिलाओं ने गोवर्धन पूजा करते हुए गीत गाए और आरती के बाद प्रसाद वितरण किए। मंगलवार को बखिरा कसबे की महिलाओं ने गोवर्धन पूजा किया। इस दिन भाई दूज पर्व भी महिलाएं मनाती है। बहनों के घर जाकर भाई चना व अन्न ग्रहण करते है। दिवाली के बाद होने वाली गोवर्धन पूजा का खास महत्व है।
इस पूजन में घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते हैं। इसके बाद ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पानी, रोली, चावल, फूल दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा करते हैं और साथ में परिक्रमा की जाती है। इसके बाद चना को ओखली में कूटा जाता है। जिसे महिलाएं अपने भाई को प्रसाद स्वरूप चना देती है।
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इस दौरान अच्छत, चंदन, धूप, दीप से पूजा के बाद भोग चढ़ाए। इस अवसर पर मोनी, शिल्पी वर्मा, प्रीति गुप्ता, मुस्कान, रोमा, गुड़िया, माधुरी आदि लड़कियां व महिलाएं मौजूद रहीं। इसी प्रकार बखिरा कसबे मे महिलाओं ने गोवर्धन पूजा करते हुए गीत गाए और आरती के बाद प्रसाद वितरण किए। मंगलवार को बखिरा कसबे की महिलाओं ने गोवर्धन पूजा किया। इस दिन भाई दूज पर्व भी महिलाएं मनाती है। बहनों के घर जाकर भाई चना व अन्न ग्रहण करते है। दिवाली के बाद होने वाली गोवर्धन पूजा का खास महत्व है।
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इस पूजन में घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते हैं। इसके बाद ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पानी, रोली, चावल, फूल दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा करते हैं और साथ में परिक्रमा की जाती है। इसके बाद चना को ओखली में कूटा जाता है। जिसे महिलाएं अपने भाई को प्रसाद स्वरूप चना देती है।