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ग्रामीण चिंतित, नहीं थम रही घाघरा नदी की कटान
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी की कटान रोके नहीं रुक रही। ऐसा नहीं कि सिंचाई विभाग इसे रोकने की कोशिश नहीं कर रहा। एमबीडी बांध के बचाव में सिंचाई विभाग सतत प्रयास में जुटा है। कटान को रोकने के लिए कटान स्थल पर बोल्डर और मिट्टी भरी बोरी डाले जा रहे हैं। अब तक 800 घन मीटर बोल्डर और हजारों बोरी मिट्टी और बालू नदी में समाहित हो गए है, लेकिन कटान नहीं रुकी। कटान न थमने से बंधे के किनारे बसे गांवों के लोग चिंतित हैं।
घाघरा नदी की धारा दक्षिण दिशा की जगह बिडहर घाट पुल से पूरब उत्तर की दिशा में बहते हुए तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध से करीब 100 मीटर की दूरी पर थी। तभी से सिंचाई विभाग कटान रोकने का प्रयास करना शुरू किया, लेकिन कटान रुकने की जगह बढ़ती गई। 500 मीटर की लंबाई में नदी कभी बांध से सट जाती है तो कभी सिंचाई विभाग के प्रयास से 10 मीटर हट जाती है। सोमवार को ऐसा लगा कि बोल्डर ने कटान को रोक दिया है, लेकिन मंगलवार को कटान को रोकने वाले बोल्डर नदी में कहां समा गए। वर्ष 2014 से एमबीडी बांध पर स्टाक के रूप में रखे गए बोल्डर जब कम पड़ गए तो सिंचाई विभाग बोल्डर मंगाना शुरू कर दिया। बुधवार को पांच ट्रक बोल्डर आ गए थे, शेष 20 ट्रक बोल्डर और मंगाए जा रहे हैं। घाघरा नदी की कटान दिन पर दिन खतरनाक होती जा रही है। तुर्कवलिया नायक के बाबूलाल निषाद, वीरेंद्र और जगदीशपुर के रामप्रसाद, भिखारीपुर के रामपलक, असरकपुर के अशोक ने कहा कि जब नदी बंधे से 500 मीटर दूर थी और वे लोग बचाव के लिए कह रहे थे तो सिंचाई विभाग ने ध्यान नहीं दिया। अब जब नदी बंधे के निकट आई तो पहले बालू, मिट्टी का सहारा लिया गया। बात नहीं बनी तो बोल्डर डाले गए। बावजूद इसके थोड़ा थमने के बाद नदी फिर कटान शुरू कर दे रही है। कटान उसी स्थान पर हो रहा है जहां 2013 में बंधा कटा था। इस बार बंधा कटा तो भारी तबाही होगी। गांव वालों का कहना है कि कभी-कभी ऐसा लग रहा है कि बांध बचना मुश्किल है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि अब तक करीब 800 घन मीटर बोल्डर नदी में समाहित हो चुके होंगे, लेकिन बोल्डर की कमी नहीं होने पाएगी। पांच ट्रक बोल्डर बुधवार को यहां पर आकर गिर गए है, शेष बीस ट्रक बोल्डर और आ रहे हैं। जरूरत पड़ने पर और भी बोल्डर मंगाए जाएंगे, लेकिन बांध को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
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धनघटा। घाघरा नदी की कटान रोके नहीं रुक रही। ऐसा नहीं कि सिंचाई विभाग इसे रोकने की कोशिश नहीं कर रहा। एमबीडी बांध के बचाव में सिंचाई विभाग सतत प्रयास में जुटा है। कटान को रोकने के लिए कटान स्थल पर बोल्डर और मिट्टी भरी बोरी डाले जा रहे हैं। अब तक 800 घन मीटर बोल्डर और हजारों बोरी मिट्टी और बालू नदी में समाहित हो गए है, लेकिन कटान नहीं रुकी। कटान न थमने से बंधे के किनारे बसे गांवों के लोग चिंतित हैं।
घाघरा नदी की धारा दक्षिण दिशा की जगह बिडहर घाट पुल से पूरब उत्तर की दिशा में बहते हुए तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध से करीब 100 मीटर की दूरी पर थी। तभी से सिंचाई विभाग कटान रोकने का प्रयास करना शुरू किया, लेकिन कटान रुकने की जगह बढ़ती गई। 500 मीटर की लंबाई में नदी कभी बांध से सट जाती है तो कभी सिंचाई विभाग के प्रयास से 10 मीटर हट जाती है। सोमवार को ऐसा लगा कि बोल्डर ने कटान को रोक दिया है, लेकिन मंगलवार को कटान को रोकने वाले बोल्डर नदी में कहां समा गए। वर्ष 2014 से एमबीडी बांध पर स्टाक के रूप में रखे गए बोल्डर जब कम पड़ गए तो सिंचाई विभाग बोल्डर मंगाना शुरू कर दिया। बुधवार को पांच ट्रक बोल्डर आ गए थे, शेष 20 ट्रक बोल्डर और मंगाए जा रहे हैं। घाघरा नदी की कटान दिन पर दिन खतरनाक होती जा रही है। तुर्कवलिया नायक के बाबूलाल निषाद, वीरेंद्र और जगदीशपुर के रामप्रसाद, भिखारीपुर के रामपलक, असरकपुर के अशोक ने कहा कि जब नदी बंधे से 500 मीटर दूर थी और वे लोग बचाव के लिए कह रहे थे तो सिंचाई विभाग ने ध्यान नहीं दिया। अब जब नदी बंधे के निकट आई तो पहले बालू, मिट्टी का सहारा लिया गया। बात नहीं बनी तो बोल्डर डाले गए। बावजूद इसके थोड़ा थमने के बाद नदी फिर कटान शुरू कर दे रही है। कटान उसी स्थान पर हो रहा है जहां 2013 में बंधा कटा था। इस बार बंधा कटा तो भारी तबाही होगी। गांव वालों का कहना है कि कभी-कभी ऐसा लग रहा है कि बांध बचना मुश्किल है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि अब तक करीब 800 घन मीटर बोल्डर नदी में समाहित हो चुके होंगे, लेकिन बोल्डर की कमी नहीं होने पाएगी। पांच ट्रक बोल्डर बुधवार को यहां पर आकर गिर गए है, शेष बीस ट्रक बोल्डर और आ रहे हैं। जरूरत पड़ने पर और भी बोल्डर मंगाए जाएंगे, लेकिन बांध को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
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