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Sant Kabir Nagar News: किस्त आसान बता फंसाते हैं जालसाज, नहीं बताते ब्याज दर
Thu, 27 Mar 2025 11:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 27 Mar 2025 11:20 PM IST
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मेंहदावल क्षेत्र के श्रीनगर गांव की माइक्रोफाइनेंस कंपनी से पीड़ित महिलाए
सांथा। जिले में समूह लोन के मामले में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट महिलाओं व मजदूरों को ब्याज दरें नहीं बताते हैं। केवल हफ्तावार व महीनावार किस्त बताते हैं। जो लोगों को कम लगती हैं। नतीजा यह होता है कि वह लोन लेने पर राजी हो जाते हैं। हर माइक्रो फाइनेंस कंपनी की अलग अलग किस्तों की बात सामने आई है।
मेंहदावल क्षेत्र के श्रीनगर गांव में महिलाओं ने भी इस मामले को लेकर अपनी कहानी बताई। एक व्यक्ति ने जबरिया वसूली की बात कही। धनघटा क्षेत्र में प्रदर्शन के बाद डीएम ने जांच कराई। इसके बाद वसूली सम्मानित तरीके से करने का निर्देश दिया। इससे महिलाओं को राहत मिली है। कई माइक्रो फाइनेंस कंपनियों ने विकास खंड मेंहदावल के श्रीनगर गांव के तीन दर्जन से अधिक महिलाओं को लोन दिया है। हर माइक्रोफाइनेंस कंपनी की ब्याज दरों के साथ उनकी किस्तें भी अलग-अलग हैं।
गांव की इंद्रावती ने कहा कि एक ऐसे ही बैंक से 58 हजार रुपये लोन लिए थे। 1400 रुपये प्रति हफ्ता दो साल तक जमा करना है। एक आदमी से जब इसके बारे में बात किया तो उन्होंने बताया कि लोेन की रकम के ढाई गुने से अधिक रकम जमा करनी पड़ेगी। इतने ही राशि का उन्होंने एक दूसरे बैंक से भी कर्ज लिया है। बैंक इसके 1470 रुपये हफ्ता लेता है। गांव की ममता बताती हैं कि माइक्रोफाइनेंस कंपनी वाले ब्याज की दर नहीं बताते हैं। किस्त बताकर अधिक पैसों की वसूली करते हैं। अब लोन ले लिया है तो हर हफ्ते किस्त चुकाने की परेशानी सामने आती है।
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वह बताती हैं कि एक अन्य महिला ने दूसरे बैंक से 40 हजार हजार लोन लिया है। उसकी किस्त महीने पर बनी है। 2400 रुपये प्रति महीना दो साल तक देना है। गांव की इंद्रावती, शीला, शर्मीला, ने कहा कि ब्याज की राशि नहीं बताते हैं, केवल प्रति हफ्ता कितना देना है यही बताते हैं। महिलाएं गुणा गणित लगा नहीं पाती हैं, जिससे वह उनको मूर्ख बनाने में सफल हो जाते हैं।
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कुदाल लेकर दौड़ा लिया एजेंट को
श्रीनगर गांव के श्यामसुन्दर बताते हैं कि उन्होंने एक बैंक से लोन लिया था। किस्तों को बराबर समय पर चुकाया। एक किस्त टूट गई तो एजेंट गांव में आया और घूम घूमकर मेरी बुराई कर रहा था। बाद में आया तो घर पर चढ़कर गाली भी देने लगा। इसके बाद जब लाठी लेकर उस एजेंट को दौड़ाया, तब जाकर वह भाग खड़ा हुआ। मैंने कहा कि किस्त देंगे ही, लेकिन गाली देकर कोई किस्त मांगेगा तो उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा।
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प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद निजी बैंकों से कर्ज लेने वालों को मिली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। निजी बैंकों से कर्ज लेकर आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना संजोने वाली महिलाओं को कर्ज के मकड़जाल से थोड़ी राहत तब मिली जब जिलाधिकारी के आदेश पर तीन सदस्यीय टीम जांच के बाद निजी बैंकों पर कर्ज के वसूली में अंकुश लगाया था। धनघटा क्षेत्र के कटया गांव निवासी शकुंतला, पार्वती, सुभावती, कौशल्या, आरती, किस्मती, सुभागी, राधिका समेत 66 महिलाएं निजी बैंक से कर्ज ली थी। कुछ दिन बाद बैंक के कर्मचारी किस्त वसूली में पहुंचे और दो प्रतिशत के जगह 25 प्रतिशत ब्याज के साथ किस्त की मांग किए। कुछ लोग तो तीन महीने तक किस्त अदा करते रहे। उसके बाद समय पर किस्त चुकता करने में असमर्थ हो गए। जिस पर बैंक के कर्मचारी उनके घरों में घुसकर तांडव मचाने लगे। जिससे पीड़ित होकर महिलाएं थाने और तहसील में पहुंचकर प्रदर्शन के बाद न्याय की मांग की। महिलाएं निजी बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध केस दर्ज कराने की अपील भी की लेकिन पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं किया। धीरे-धीरे कर्ज लेने वाले कटार मिश्र, बरांव, गोपीपुर, बेलमा गांव के कर्ज लेने वाले लोग निजी बैंक कर्मियों के तांडव से परेशान होकर अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने लगे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अक्टूबर 2024 में जिला अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने तीन सदस्यीय टीम का गठन करके पूरे प्रकरण के जांच का आदेश दिया। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में 25 प्रतिशत ब्याज लेने की उल्लेख किया। जिसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने निजी बैंकों को नियम के सीमा में रहकर काम करने का आदेश दिया। कर्ज लेने वाली शकुंतला, पार्वती, सुभद्रा, राधिका आदि कहना है कि निजी बैंक के लोग किस्त की वसूली के लिए आते तो हैं लेकिन समय पर किस्त अदा न कर पाने पर पहले के भांति उपद्रव नहीं करते हैं। यह तो जरूर है कि दो प्रतिशत कह कर 25 प्रतिशत ब्याज आज भी लिया जा रहा है। संवाद
कोट
माइक्रो फाइनेंस बैंक अगर किसी को भी समूह लोन देते हैं तो उनको कितना ब्याज देना होगा। इस बात की जानकारी अवश्य दें। वहीं वसूली में किसी के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम
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मेंहदावल क्षेत्र के श्रीनगर गांव में महिलाओं ने भी इस मामले को लेकर अपनी कहानी बताई। एक व्यक्ति ने जबरिया वसूली की बात कही। धनघटा क्षेत्र में प्रदर्शन के बाद डीएम ने जांच कराई। इसके बाद वसूली सम्मानित तरीके से करने का निर्देश दिया। इससे महिलाओं को राहत मिली है। कई माइक्रो फाइनेंस कंपनियों ने विकास खंड मेंहदावल के श्रीनगर गांव के तीन दर्जन से अधिक महिलाओं को लोन दिया है। हर माइक्रोफाइनेंस कंपनी की ब्याज दरों के साथ उनकी किस्तें भी अलग-अलग हैं।
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गांव की इंद्रावती ने कहा कि एक ऐसे ही बैंक से 58 हजार रुपये लोन लिए थे। 1400 रुपये प्रति हफ्ता दो साल तक जमा करना है। एक आदमी से जब इसके बारे में बात किया तो उन्होंने बताया कि लोेन की रकम के ढाई गुने से अधिक रकम जमा करनी पड़ेगी। इतने ही राशि का उन्होंने एक दूसरे बैंक से भी कर्ज लिया है। बैंक इसके 1470 रुपये हफ्ता लेता है। गांव की ममता बताती हैं कि माइक्रोफाइनेंस कंपनी वाले ब्याज की दर नहीं बताते हैं। किस्त बताकर अधिक पैसों की वसूली करते हैं। अब लोन ले लिया है तो हर हफ्ते किस्त चुकाने की परेशानी सामने आती है।
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वह बताती हैं कि एक अन्य महिला ने दूसरे बैंक से 40 हजार हजार लोन लिया है। उसकी किस्त महीने पर बनी है। 2400 रुपये प्रति महीना दो साल तक देना है। गांव की इंद्रावती, शीला, शर्मीला, ने कहा कि ब्याज की राशि नहीं बताते हैं, केवल प्रति हफ्ता कितना देना है यही बताते हैं। महिलाएं गुणा गणित लगा नहीं पाती हैं, जिससे वह उनको मूर्ख बनाने में सफल हो जाते हैं।
कुदाल लेकर दौड़ा लिया एजेंट को
श्रीनगर गांव के श्यामसुन्दर बताते हैं कि उन्होंने एक बैंक से लोन लिया था। किस्तों को बराबर समय पर चुकाया। एक किस्त टूट गई तो एजेंट गांव में आया और घूम घूमकर मेरी बुराई कर रहा था। बाद में आया तो घर पर चढ़कर गाली भी देने लगा। इसके बाद जब लाठी लेकर उस एजेंट को दौड़ाया, तब जाकर वह भाग खड़ा हुआ। मैंने कहा कि किस्त देंगे ही, लेकिन गाली देकर कोई किस्त मांगेगा तो उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद निजी बैंकों से कर्ज लेने वालों को मिली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। निजी बैंकों से कर्ज लेकर आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना संजोने वाली महिलाओं को कर्ज के मकड़जाल से थोड़ी राहत तब मिली जब जिलाधिकारी के आदेश पर तीन सदस्यीय टीम जांच के बाद निजी बैंकों पर कर्ज के वसूली में अंकुश लगाया था। धनघटा क्षेत्र के कटया गांव निवासी शकुंतला, पार्वती, सुभावती, कौशल्या, आरती, किस्मती, सुभागी, राधिका समेत 66 महिलाएं निजी बैंक से कर्ज ली थी। कुछ दिन बाद बैंक के कर्मचारी किस्त वसूली में पहुंचे और दो प्रतिशत के जगह 25 प्रतिशत ब्याज के साथ किस्त की मांग किए। कुछ लोग तो तीन महीने तक किस्त अदा करते रहे। उसके बाद समय पर किस्त चुकता करने में असमर्थ हो गए। जिस पर बैंक के कर्मचारी उनके घरों में घुसकर तांडव मचाने लगे। जिससे पीड़ित होकर महिलाएं थाने और तहसील में पहुंचकर प्रदर्शन के बाद न्याय की मांग की। महिलाएं निजी बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध केस दर्ज कराने की अपील भी की लेकिन पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं किया। धीरे-धीरे कर्ज लेने वाले कटार मिश्र, बरांव, गोपीपुर, बेलमा गांव के कर्ज लेने वाले लोग निजी बैंक कर्मियों के तांडव से परेशान होकर अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने लगे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अक्टूबर 2024 में जिला अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने तीन सदस्यीय टीम का गठन करके पूरे प्रकरण के जांच का आदेश दिया। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में 25 प्रतिशत ब्याज लेने की उल्लेख किया। जिसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने निजी बैंकों को नियम के सीमा में रहकर काम करने का आदेश दिया। कर्ज लेने वाली शकुंतला, पार्वती, सुभद्रा, राधिका आदि कहना है कि निजी बैंक के लोग किस्त की वसूली के लिए आते तो हैं लेकिन समय पर किस्त अदा न कर पाने पर पहले के भांति उपद्रव नहीं करते हैं। यह तो जरूर है कि दो प्रतिशत कह कर 25 प्रतिशत ब्याज आज भी लिया जा रहा है। संवाद
कोट
माइक्रो फाइनेंस बैंक अगर किसी को भी समूह लोन देते हैं तो उनको कितना ब्याज देना होगा। इस बात की जानकारी अवश्य दें। वहीं वसूली में किसी के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम