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Sant Kabir Nagar News: फर्म में निवेश के नाम पर ठगी के मामले में चार और नाम आए सामने
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संतकबीरनगर। फर्म में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में चार और लोगों के नाम जांच के दायरे में आए हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क केवल संतकबीरनगर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि गोरखपुर, सहजनवां, खलीलाबाद और आसपास के कई जिलों तक फैला था।
पुलिस ने जांच में पाया कि गिरोह का सरगना धनंजय शुक्ल निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर रकम जुटाता था। इस धन का उपयोग जमीन, मकान, वाहन और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया। उसने महुली थाना क्षेत्र में फर्म का ऑफिस खोला था।
धनंजय कुशीनगर के हाटा थाना क्षेत्र स्थित मुंडेरा उपाध्याय गांव का रहने वाला है। पुलिस को गोरखपुर, सहजनवां और खलीलाबाद में भी ऐसी संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनकी खरीद में निवेशकों की रकम लगाए जाने की आशंका है। यहीं नहीं आरोपियों ने कई फर्जी और संदिग्ध फर्मों का नेटवर्क तैयार किया था। इन्हीं फर्मों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था।
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शुरुआत में निवेशकों पर समय पर लाभ देकर विश्वास जताया गया, लेकिन बाद में बड़ी धनराशि जुटाने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया।
जांच में यह भी पता चला है कि फर्मों के मोबाइल नंबर, बैंक खाते और दस्तावेज कई लोगों के नाम पर संचालित किए जा रहे थे। अब पुलिस उन लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिनके नाम पर खाते, मोबाइल सिम और फर्मों का पंजीकरण कराया गया था।
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जांच के घेरे में आए चार नए चेहरे
आरोपी के पास से मिले दस्तावेजों और बैंकिंग लेन-देन की जांच में चार और व्यक्तियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। इन पर फर्जी फर्मों के संचालन, निवेशकों से संपर्क स्थापित करने और रकम के हस्तांतरण में सहयोग करने का संदेह है। पुलिस इन सभी से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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करोड़ों की संपत्ति और संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
जांच के दौरान अब तक करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस के अनुसार कई संपत्तियां ऐसी मिली हैं जिनकी खरीद का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया है। इनमें आवासीय भवन, भूखंड और व्यावसायिक निवेश शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
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पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं मुख्य आरोपी
मामले में मुख्य आरोपी धनंजय शुक्ल और उसकी महिला सहयोगी को पुलिस पहले ही जेल भिजवा चुकी है। दोनों से पूछताछ के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी।
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निवेशकों को रकम वापस दिलाने की तैयारी
पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर निवेशकों की रकम की भरपाई के लिए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की संपत्तियों का मूल्यांकन कराया जा रहा है। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कुर्की और नीलामी की कार्रवाई कर पीड़ितों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।
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मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। साक्ष्य की जांच पड़ताल की जा रही है। साक्ष्य संकलन के आधार पर जो भी नाम सामने आएगा, उसे नामजद करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अभयनाथ मिश्रा, सीओ धनघटा
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पुलिस ने जांच में पाया कि गिरोह का सरगना धनंजय शुक्ल निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर रकम जुटाता था। इस धन का उपयोग जमीन, मकान, वाहन और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया। उसने महुली थाना क्षेत्र में फर्म का ऑफिस खोला था।
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धनंजय कुशीनगर के हाटा थाना क्षेत्र स्थित मुंडेरा उपाध्याय गांव का रहने वाला है। पुलिस को गोरखपुर, सहजनवां और खलीलाबाद में भी ऐसी संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनकी खरीद में निवेशकों की रकम लगाए जाने की आशंका है। यहीं नहीं आरोपियों ने कई फर्जी और संदिग्ध फर्मों का नेटवर्क तैयार किया था। इन्हीं फर्मों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था।
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शुरुआत में निवेशकों पर समय पर लाभ देकर विश्वास जताया गया, लेकिन बाद में बड़ी धनराशि जुटाने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया।
जांच में यह भी पता चला है कि फर्मों के मोबाइल नंबर, बैंक खाते और दस्तावेज कई लोगों के नाम पर संचालित किए जा रहे थे। अब पुलिस उन लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिनके नाम पर खाते, मोबाइल सिम और फर्मों का पंजीकरण कराया गया था।
जांच के घेरे में आए चार नए चेहरे
आरोपी के पास से मिले दस्तावेजों और बैंकिंग लेन-देन की जांच में चार और व्यक्तियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। इन पर फर्जी फर्मों के संचालन, निवेशकों से संपर्क स्थापित करने और रकम के हस्तांतरण में सहयोग करने का संदेह है। पुलिस इन सभी से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
करोड़ों की संपत्ति और संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
जांच के दौरान अब तक करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस के अनुसार कई संपत्तियां ऐसी मिली हैं जिनकी खरीद का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया है। इनमें आवासीय भवन, भूखंड और व्यावसायिक निवेश शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं मुख्य आरोपी
मामले में मुख्य आरोपी धनंजय शुक्ल और उसकी महिला सहयोगी को पुलिस पहले ही जेल भिजवा चुकी है। दोनों से पूछताछ के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी।
निवेशकों को रकम वापस दिलाने की तैयारी
पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर निवेशकों की रकम की भरपाई के लिए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की संपत्तियों का मूल्यांकन कराया जा रहा है। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कुर्की और नीलामी की कार्रवाई कर पीड़ितों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। साक्ष्य की जांच पड़ताल की जा रही है। साक्ष्य संकलन के आधार पर जो भी नाम सामने आएगा, उसे नामजद करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अभयनाथ मिश्रा, सीओ धनघटा