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भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध है: जिला जज
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Fri, 10 Jun 2016 11:37 PM IST
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कार्यशाला का आयोजन हुआ।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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जिला जज उमेश कुमार ने कहा कि भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध है। इसको रोकने के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 लागू हैं। इसका शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए। वे शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय के सभागार में जनपदस्तरीय अभिमुखिकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि लड़का-लड़की एक समान है। इसके प्रति समाज में जन जागरूकता हेतु कार्यशालाएं एवं सेमिनार का आयोजन काफी उपयोगी सिद्ध होगा। सामाजिक संतुलन के लिए स्त्री एवं पुरुष का एक निश्चित अनुपात जरूरी है। प्रसव पूर्व बच्चे का परीक्षण जघन्य अपराध है। उन्होंने कहा कि अल्ट्रसाउंड सेंटर का पंजीकरण नितांत आवश्यक है और रजिस्टर मेंटेन होने चाहिए तथा समय- समय पर उन सेंटर की जांच मजिस्ट्रेट के माध्यम से कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अल्ट्रा साउंड सेंटर चलाने वाले डॉक्टर का प्रशिक्षण अवश्य कराए जाए, तथा चिकित्सक के पास छह माह का प्रमाण पत्र होना चाहिए। यह सुनिश्चित हो कि बिना पंजीकृत कोई भी सेंटर जनपद में संचालित न हो। उन्होंने सजा के विधिक प्राविधानों से भी अवगत कराया। इस अवसर पर सीजेएम संजय गौड़ ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भ्रूण हत्या रोकने प्रति जन जागरूकता लाना है। देश में भ्रूण हत्या को समाप्त करने के उद्देश्य से एक्ट लागू किया गया है। लड़का-लड़की के भेद-भाव को मिटाने तथा भ्रूण हत्या को समाप्त करने के प्रति हम सब दृढ़ संकल्पित हो। कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी कमला प्रसाद यादव ने भी प्रकाश डाला। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने उपस्थित सभी अथितियों का आभार जताते हुए कहा कि जनपद में कुल 17 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत है तथा इनकी समय समय पर मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जांच की जाती है तथा गड़बड़ी पाए जाने पर उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है। इस अवसर पर एसडीएम गौरव श्रीवास्तव, एसडीएम इंद्रभान तिवारी, सीएचसी अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव, अपर सीएमओ डॉ. कपिल मुनि मिश्र, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. वीके शुक्ला, डॉ. अनिल कुमार सिंह, मनीष मिश्र, सौरभ, डॉ. निहालुद्दीन, डॉ. रतन लाल, सुनील चौधरी समेत अन्य मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि लड़का-लड़की एक समान है। इसके प्रति समाज में जन जागरूकता हेतु कार्यशालाएं एवं सेमिनार का आयोजन काफी उपयोगी सिद्ध होगा। सामाजिक संतुलन के लिए स्त्री एवं पुरुष का एक निश्चित अनुपात जरूरी है। प्रसव पूर्व बच्चे का परीक्षण जघन्य अपराध है। उन्होंने कहा कि अल्ट्रसाउंड सेंटर का पंजीकरण नितांत आवश्यक है और रजिस्टर मेंटेन होने चाहिए तथा समय- समय पर उन सेंटर की जांच मजिस्ट्रेट के माध्यम से कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अल्ट्रा साउंड सेंटर चलाने वाले डॉक्टर का प्रशिक्षण अवश्य कराए जाए, तथा चिकित्सक के पास छह माह का प्रमाण पत्र होना चाहिए। यह सुनिश्चित हो कि बिना पंजीकृत कोई भी सेंटर जनपद में संचालित न हो। उन्होंने सजा के विधिक प्राविधानों से भी अवगत कराया। इस अवसर पर सीजेएम संजय गौड़ ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भ्रूण हत्या रोकने प्रति जन जागरूकता लाना है। देश में भ्रूण हत्या को समाप्त करने के उद्देश्य से एक्ट लागू किया गया है। लड़का-लड़की के भेद-भाव को मिटाने तथा भ्रूण हत्या को समाप्त करने के प्रति हम सब दृढ़ संकल्पित हो। कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी कमला प्रसाद यादव ने भी प्रकाश डाला। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने उपस्थित सभी अथितियों का आभार जताते हुए कहा कि जनपद में कुल 17 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत है तथा इनकी समय समय पर मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जांच की जाती है तथा गड़बड़ी पाए जाने पर उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है। इस अवसर पर एसडीएम गौरव श्रीवास्तव, एसडीएम इंद्रभान तिवारी, सीएचसी अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव, अपर सीएमओ डॉ. कपिल मुनि मिश्र, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. वीके शुक्ला, डॉ. अनिल कुमार सिंह, मनीष मिश्र, सौरभ, डॉ. निहालुद्दीन, डॉ. रतन लाल, सुनील चौधरी समेत अन्य मौजूद रहे।
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