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फर्जी शिक्षक नियुक्ति प्रकरण : कार्रवाई की जद में आ सकते हैं कई बड़े चेहरे

Mon, 23 Oct 2023 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Mon, 23 Oct 2023 12:49 AM IST
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Fake teacher appointment case: Many big faces may come under the scanner of action
संतकबीरनगर। छह फर्जी शिक्षकों के नियुक्ति प्रकरण की विवेचना अभिलेख नहीं मिलने से अटकी हुई है। तीन साल में अब तक नौ से अधिक विवेचक बदल गए, लेकिन बीएसए कार्यालय अभिलेख उपलब्ध नहीं करवा रहा है। मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अशोक सिंह को सौंपी गई है। अब तक की विवेचना में फर्जी नियुक्ति कराने में एक दलाल की भूमिका सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि इसमें कई बड़े चेहरे शामिल हैं। ठीक से जांच हुई तो कई लोग कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
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तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ध्रुव प्रसाद ने वर्ष 2020 में गलत तरीके से विकास खंड नाथनगर के विद्यालयों में तैनाती पाने वाले छह शिक्षकों के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने 13 फरवरी 2020 को उनका बयान दर्ज किया था। तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया था कि विकास खंड में कथित अध्यापक रणजीत सिंह निवासी ग्राम बरी जनपद बस्ती, श्रेयांश निवासी गोला गोकरनाथ खीरी, राधेश्याम यादव निवासी हुमायूंपुर उत्तरी गोरखपुर, विनायक कुमार त्रिपाठी, निवासी तिनहरी जनपद मऊ, अभिनाश कुमार पांडेय निवासी बिलंदपुर गोरखपुर, राम मोहन शुक्ला केवटहिया बस्ती ने गलत तरीके से सहायक अध्यापक पद पर तैनाती करा ली है। जांच में मामला फर्जी तरीके से नियुक्ति का पाए जाने पर इनकी सेवा समाप्त कर दी गई। जांच प्रकिया उनके कार्यकाल के पहले से शुरू की गई थी। इस मामले में विवेचक बदलते गए और अभिलेख नहीं मिलने से विवेचना अटकी हुई है।
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एसपी ने प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अशोक सिंह को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर विवेचक अशोक सिंह ने बताया कि विवेचना से पाया गया है कि रणजीत सिंह नाम के एक शिक्षक की नियुक्ति बस्ती जिले में है। उन्हीं के नाम से बस्ती जिले के मुंडेरवा क्षेत्र के रहने वाले पूरन दूबे ने गलत तरीके से रणजीत सिंह बनकर वर्ष 2009 में तैनाती करा ली थी। जबकि अन्य पांच शिक्षकों ने वर्ष 2015 में फर्जी तरीके से नियुक्त करा ली। इन पांचों फर्जी शिक्षकों का नाम चयन समिति की सूची तक में नहीं है। इन फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति कराने में एक दलाल की भूमिका सामने आ रही है। फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान तैनात रहे दो पूर्व बीएसए, दो पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी और पटल लिपिक भी कार्रवाई की लपेटे में आ सकते हैं। बीएसए कार्यालय से अभिलेख मांगे जाने पर भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
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इंसेट
मुझे तैनाती पाए तीन महीने हो गए हैं। अब तक इस प्रकरण में कोई बीएसए कार्यालय आकर फर्जी शिक्षक नियुक्ति प्रकरण से संबंधित अभिलेख मांगने नहीं आया है और न ही कोई पत्र ही मिला है। यदि अभिलेख मांगने विवेचक आएंगे तो उन्हें उपलब्ध करा दिया जाएगा। विवेचना में पूरी मदद की जाएगी। -अमित कुमार सिंह, बीएसए
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