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Sant Kabir Nagar News: बजट मिलने के बाद भी जमीन के अभाव में नहीं बन सका सीसीबी
Thu, 20 Feb 2025 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 20 Feb 2025 11:06 PM IST
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जिला अस्पताल।
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में गंभीर रोगियों के उपचार की सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। शासन ने क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) की स्थापना के 27 करोड़ रुपये 14 माह पहले जारी किए थे।
लेकिन जिला अस्पताल परिसर में जमीन न होने से योजना अधर में अटक गई। जिससे गंभीर रोगियों को इलाज के लिए महानगरों का रुख करना पड़ रहा है। जिले में जिला अस्पताल व आठ सीएचसी हैं। ऐसे में गंभीर मरीज गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिए जाते हैं।
मरीजों को होने वाली असुविधा को देखते हुए वर्ष 2023 के दिसंबर माह में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने शासन को क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण का प्रस्ताव भेजा था, इसकी मंजूरी दिसंबर में मिल गई थी।
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इसके निर्माण के लिए 27 करोड़ रुपये भी जारी हो गए थे। यह यूनिट जिला अस्पताल परिसर में ही बनाई जानी थी। सीएमओ ने जिला अस्पताल परिसर में जमीन चिह्नित की, लेकिन वह कम पड़ गई। कार्यदायी संस्था ने वहां पर निर्माण कराने से इंकार कर दिया था। 27 करोड़ रुपये से बनने वाले चार मंजिला भवन में लिफ्ट की भी सुविधा मिलनी थी। करीब 35 कमरों के इस भवन में आईसीयू, आइसोलेशन बेड के अलावा वेंटिलेटर व ऑक्सीजन जैसी सुविधाएं भी मिलनी थी। साथ ही, गंभीर रूप से अस्वस्थ मरीजों का इलाज किया जाना था।
इसके लिए अलग से चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही अत्याधुनिक मशीनें लगाई जानी थी और सभी प्रकार की जांच सुविधा उपलब्ध होनी थी। लेकिन जमीन न मिलने से मामला अधर में अटक गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने यह भवन अस्पताल के आसपास ही बनाया जाना है ताकि गंभीर मरीज को जिला अस्पताल से वही पर भेजा जा सके।
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लेकिन जिला अस्पताल परिसर में जमीन न होने से योजना अधर में अटक गई। जिससे गंभीर रोगियों को इलाज के लिए महानगरों का रुख करना पड़ रहा है। जिले में जिला अस्पताल व आठ सीएचसी हैं। ऐसे में गंभीर मरीज गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिए जाते हैं।
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मरीजों को होने वाली असुविधा को देखते हुए वर्ष 2023 के दिसंबर माह में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने शासन को क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण का प्रस्ताव भेजा था, इसकी मंजूरी दिसंबर में मिल गई थी।
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इसके निर्माण के लिए 27 करोड़ रुपये भी जारी हो गए थे। यह यूनिट जिला अस्पताल परिसर में ही बनाई जानी थी। सीएमओ ने जिला अस्पताल परिसर में जमीन चिह्नित की, लेकिन वह कम पड़ गई। कार्यदायी संस्था ने वहां पर निर्माण कराने से इंकार कर दिया था। 27 करोड़ रुपये से बनने वाले चार मंजिला भवन में लिफ्ट की भी सुविधा मिलनी थी। करीब 35 कमरों के इस भवन में आईसीयू, आइसोलेशन बेड के अलावा वेंटिलेटर व ऑक्सीजन जैसी सुविधाएं भी मिलनी थी। साथ ही, गंभीर रूप से अस्वस्थ मरीजों का इलाज किया जाना था।
इसके लिए अलग से चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही अत्याधुनिक मशीनें लगाई जानी थी और सभी प्रकार की जांच सुविधा उपलब्ध होनी थी। लेकिन जमीन न मिलने से मामला अधर में अटक गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने यह भवन अस्पताल के आसपास ही बनाया जाना है ताकि गंभीर मरीज को जिला अस्पताल से वही पर भेजा जा सके।