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Sant Kabir Nagar News: याधीश बने, फिर भी संजो रखा है राम-लक्ष्मण का किरदार
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सेवानिवृत जज राघवेंद्र प्रसाद पांडे
धर्मसिंहवा। विद्यार्थी जीवन में रामलीला के मंच पर भगवान राम और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले राघवेंद्र प्रसाद पांडेय आज न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपने गांव की माटी और संस्कृति से जुड़े हैं। धर्मसिंहवा क्षेत्र के मेंहदूपार निवासी व वर्ष 1950 से चली आ रही रामलीला से उनका जुड़ाव आज भी बरकरार है। कभी न्याय की कुर्सी पर बैठकर अपनी जिम्मेदारियां निभाने वाले राघवेंद्र पांडेय आज रामलीला के मंचन को बेहतर और प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राघवेंद्र प्रसाद पांडेय अपने विद्यार्थी जीवन में मेंहदूपार की रामलीला में राम और लक्ष्मण का किरदार निभाते थे। मेधावी छात्र होने के कारण उन्होंने पीसीएस-जे की परीक्षा उत्तीर्ण की और न्यायाधीश बने। न्यायिक सेवा में रहते हुए उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया लेकिन इस दौरान भी गांव की माटी, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराओं से उनका लगाव कम नहीं हुआ।
आठ साल पूर्व सेवानिवृत्त हुए राघवेंद्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि भगवान श्रीराम की कृपा से उन्हें न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का अवसर मिला। अपने जीवन की यात्रा का पूरा श्रेय उन्होंने ईश्वर को दिया। उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान भी गांव की संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों से उनका जुड़ाव बना रहा।
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सेवानिवृत्ति के बाद राघवेंद्र प्रसाद पांडेय प्रत्येक वर्ष मेंहदूपार की रामलीला में समय दे रहे हैं। रामलीला के संचालन से लेकर मंचन की प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने तक में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कार्यक्रम को किस तरह प्रस्तुत किया जाए, इसके लिए वह रामलीला के कलाकारों और व्यास के साथ चर्चा करते रहते हैं।
उनके अनुभव का लाभ रामलीला का मंचन करने वाले कलाकारों को भी मिल रहा है। कलाकार पुरानी और नई मंचन शैलियों का समन्वय करते हुए उनसे मार्ग दर्शन प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह न्यायाधीश के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले राघवेंद्र प्रसाद पांडेय आज भी भगवान श्रीराम की लीला से जुड़े रहकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने में योगदान दे रहे हैं। संवाद
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राघवेंद्र प्रसाद पांडेय अपने विद्यार्थी जीवन में मेंहदूपार की रामलीला में राम और लक्ष्मण का किरदार निभाते थे। मेधावी छात्र होने के कारण उन्होंने पीसीएस-जे की परीक्षा उत्तीर्ण की और न्यायाधीश बने। न्यायिक सेवा में रहते हुए उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया लेकिन इस दौरान भी गांव की माटी, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराओं से उनका लगाव कम नहीं हुआ।
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आठ साल पूर्व सेवानिवृत्त हुए राघवेंद्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि भगवान श्रीराम की कृपा से उन्हें न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का अवसर मिला। अपने जीवन की यात्रा का पूरा श्रेय उन्होंने ईश्वर को दिया। उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान भी गांव की संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों से उनका जुड़ाव बना रहा।
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सेवानिवृत्ति के बाद राघवेंद्र प्रसाद पांडेय प्रत्येक वर्ष मेंहदूपार की रामलीला में समय दे रहे हैं। रामलीला के संचालन से लेकर मंचन की प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने तक में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कार्यक्रम को किस तरह प्रस्तुत किया जाए, इसके लिए वह रामलीला के कलाकारों और व्यास के साथ चर्चा करते रहते हैं।
उनके अनुभव का लाभ रामलीला का मंचन करने वाले कलाकारों को भी मिल रहा है। कलाकार पुरानी और नई मंचन शैलियों का समन्वय करते हुए उनसे मार्ग दर्शन प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह न्यायाधीश के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले राघवेंद्र प्रसाद पांडेय आज भी भगवान श्रीराम की लीला से जुड़े रहकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने में योगदान दे रहे हैं। संवाद