{"_id":"6632951967566315e6035444","slug":"encroachment-took-away-the-beauty-of-pavdo-tal-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1040-113673-2024-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: अतिक्रमण ने लील ली पवड़ों ताल की खूबसूरती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: अतिक्रमण ने लील ली पवड़ों ताल की खूबसूरती
Thu, 02 May 2024 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 02 May 2024 12:46 AM IST
विज्ञापन
विकास खंड बेलहर कलां के बालेपार गांव में स्थित पवड़ों ताल। संवाद
बेलहर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बालेपार गांव में स्थित है ताल
- सिंघाड़ा, कमलगट्टा व विदेशी पक्षियों के लिए मशहूर था ताल
- बस्ती, सिद्धार्थनगर व संतकबीरनगर जनपद की सीमा पर स्थित
- सुंदरीकरण होने पर पर्यटन का केंद्र बन सकता है पवड़ों ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
लोहरौली। बेलहर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बालेपार गांव में स्थित पवड़ों ताल अतिक्रमण की चपेट में है। लोगों ने कब्जा करके आसपास मकान तक बना लिया है। लेकिन अतिक्रमण हटाने के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं है। जिससे ताल बदहाली का शिकार है।
पवड़ों ताल कभी लोगों के लिए पर्यटन का केंद्र हुआ करता था। आसपास के ग्रामीण यहां सुबह-शाम सैर सपाटे के लिए आते थे। ताल की खूबसूरती लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित करती थी। लेकिन अतिक्रमण के कारण यह ताल सिकुड़ रहा है। बेलहर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव के लोग इस ताल पर काफी समय पहले तक निर्भर थे। पशुओं के लिए चारागाह तो विदेशी पक्षियों का कलरव देखते बनता था। लेकिन वर्तमान स्थिति में इस ताल पर अतिक्रमण ने दाग लगा दिया है।
उल्लेखनीय है कि बीते एक दशक पूर्व तक ताल में विदेशी पक्षियों के आने से ताल की खूबसूरती देखते बनती थी। कवलगट्टा, सेरकी व कोइना की ताल में भरमार हुआ करती थी। लेकिन ताल में पानी कम होने व आसपास लोगों की मौजूदगी होने के कारण ताल से विदेशी पक्षियों ने नाता तोड़ लिया। यहां के ग्रामीण पवड़ों ताल की तुलना बखिरा झील से भी करते हैं। यह ताल बस्ती, सिद्धार्थनगर व संतकबीरनगर जनपद के सीमा पर स्थित है।
विज्ञापन
पशुपालकों के लिए वरदान था ताल
पवड़ों ताल बेलहर क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान से कम नहीं था। इस ताल के आसपास गांव के पशुओं की मौजूदगी सुबह-शाम हुआ करती थी। विभिन्न प्रकार की मछलियां ताल में पाई जाती थीं। जिससे स्थानीय मछुआरों को रोजगार मिलता था। पशुओं के लिए चारागाह तो आसपास के लोगों के लिए सैर-सपाटे का प्रमुख केंद्र था। आसपास के गांव के लोग ताल से सिंघाड़ा, कमलगट्टा, सेरकी निकालते थे। लेकिन समय बीतने के साथ ताल की खूबसूरती धुंधली होती चली गई। हालांकि अभी भी यहां पर पशुओं की मौजूदगी व पक्षियों का कलरव सुबह-शाम सुनाई देता है। लेकिन पहले जैसी स्थिति अब नहीं है।
पवड़ों ताल पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं है। हल्का लेखपाल के नेतृत्व में टीम का गठन कर ताल की पैमाइश कराई जाएगी। जिन लोगों ने ताल पर अवैध अतिक्रमण किया है उन्हें हटाया जाएगा। ताल अतिक्रमण मुक्त होगा।
- अरुण कुमार, उपजिलाधिकारी, मेंहदावल
विज्ञापन
- सिंघाड़ा, कमलगट्टा व विदेशी पक्षियों के लिए मशहूर था ताल
- बस्ती, सिद्धार्थनगर व संतकबीरनगर जनपद की सीमा पर स्थित
- सुंदरीकरण होने पर पर्यटन का केंद्र बन सकता है पवड़ों ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
लोहरौली। बेलहर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बालेपार गांव में स्थित पवड़ों ताल अतिक्रमण की चपेट में है। लोगों ने कब्जा करके आसपास मकान तक बना लिया है। लेकिन अतिक्रमण हटाने के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं है। जिससे ताल बदहाली का शिकार है।
पवड़ों ताल कभी लोगों के लिए पर्यटन का केंद्र हुआ करता था। आसपास के ग्रामीण यहां सुबह-शाम सैर सपाटे के लिए आते थे। ताल की खूबसूरती लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित करती थी। लेकिन अतिक्रमण के कारण यह ताल सिकुड़ रहा है। बेलहर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव के लोग इस ताल पर काफी समय पहले तक निर्भर थे। पशुओं के लिए चारागाह तो विदेशी पक्षियों का कलरव देखते बनता था। लेकिन वर्तमान स्थिति में इस ताल पर अतिक्रमण ने दाग लगा दिया है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि बीते एक दशक पूर्व तक ताल में विदेशी पक्षियों के आने से ताल की खूबसूरती देखते बनती थी। कवलगट्टा, सेरकी व कोइना की ताल में भरमार हुआ करती थी। लेकिन ताल में पानी कम होने व आसपास लोगों की मौजूदगी होने के कारण ताल से विदेशी पक्षियों ने नाता तोड़ लिया। यहां के ग्रामीण पवड़ों ताल की तुलना बखिरा झील से भी करते हैं। यह ताल बस्ती, सिद्धार्थनगर व संतकबीरनगर जनपद के सीमा पर स्थित है।
विज्ञापन
पशुपालकों के लिए वरदान था ताल
पवड़ों ताल बेलहर क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान से कम नहीं था। इस ताल के आसपास गांव के पशुओं की मौजूदगी सुबह-शाम हुआ करती थी। विभिन्न प्रकार की मछलियां ताल में पाई जाती थीं। जिससे स्थानीय मछुआरों को रोजगार मिलता था। पशुओं के लिए चारागाह तो आसपास के लोगों के लिए सैर-सपाटे का प्रमुख केंद्र था। आसपास के गांव के लोग ताल से सिंघाड़ा, कमलगट्टा, सेरकी निकालते थे। लेकिन समय बीतने के साथ ताल की खूबसूरती धुंधली होती चली गई। हालांकि अभी भी यहां पर पशुओं की मौजूदगी व पक्षियों का कलरव सुबह-शाम सुनाई देता है। लेकिन पहले जैसी स्थिति अब नहीं है।
पवड़ों ताल पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं है। हल्का लेखपाल के नेतृत्व में टीम का गठन कर ताल की पैमाइश कराई जाएगी। जिन लोगों ने ताल पर अवैध अतिक्रमण किया है उन्हें हटाया जाएगा। ताल अतिक्रमण मुक्त होगा।
- अरुण कुमार, उपजिलाधिकारी, मेंहदावल