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Sant Kabir Nagar News: ऑटो चालकों की सवारी बिठा ले रहे ई-रिक्शा चालक
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद से गिरधरपुर और शिवापार रूट पर चलने वाले ऑटो चालक ई-रिक्शा चालकों से परेशान हैं। यह ई-रिक्शा चालक इनकी सवारियां बिठा ले रहे हैं और यह खाली वाहन लेकर सड़कों पर दौड़ते रहते हैं।
ऑटो चालकों का कहना है कि हमारा रूट तय है और ई-रिक्शा चालकों का रूट तय नहीं है। वह बिना निश्चित रूट के चलते हैं और हमारे रास्ते की सवारी को बैठा लेते हैं। इससे हमें आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती है। ऑटो चालकों का कहना है कि कई बार तो हमें दिन भर सवारी का इंतजार करना पड़ता है। दिन भर में एक चक्कर भी लगाना मुश्किल होता है। इस महंगाई में घर चलाने में परेशानी हो रही है, ऊपर से ई-रिक्शा चालक हमारी सवारी बिठा ले रहे हैं। इससे और भी दिक्कत खड़ी हो रही है।
ऑटो चालक नागेंद्र यादव ने कहा कि हम लोगों को नंबर के हिसाब से चलना पड़ता है। शहर में ई-रिक्शा की संख्या ज्यादा हो गई है, इनके लिए प्रशासन की तरफ से कोई रूट निर्धारित नहीं किया गया है। यह रिक्शा चालक हम लोगों के रूट की सवारियां ढो रहे हैं, जिससे हम लोगों को सवारी कम मिल रही है।
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रामभवन यादव ने कहा कि हम लोगों का ऑटो डीजल से चलता है, अगर सवारी पूरी नहीं होगी तो हम लोगों का खर्चा और लागत नहीं निकल पाएगा, जबकि ई-रिक्शा बैटरी से चलता है वह चार सवारी लेकर भी निकल जाते हैं, जिससे हम लोगों का काफ़ी नुकसान होता है।
अब्दुलरब ने बताया कि बैटरी रिक्शा पर प्रशासन की तरफ से नियंत्रण नहीं है न उनका पंजीकरण है न कोई रूट निर्धारित है, जिससे सभी स्टैंड पर ऑटो चालक परेशान हैं।
बबकू ने कहा कि प्रशासन द्वारा हम लोगों के लिए साफ सुथरा स्टैंड मिलना चाहिए। सवारियों को बैठने के लिए न कोई बेंच है न कोई साफ-सुथरी जगह। हरकेश ने कहा कि सवारी हो या ऑटो चालक, किसी के लिए यहां पीने के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
अशोक ने कहा कि स्टैंड पर महिला यात्री भी आती है, यहां उनके लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ता है।
ऑटो चालक लल्लू ने कहा कि चालान के डर से सड़क पर चलना मुश्किल हो जा रहा है। चलती गाड़ी का फोटो खींचकर चालान कर दिया जाता है। दिन भर में किसी तरह 1000 कमाया जाता है, 4 से 5 हजार का चालान कैसे भरा जाएगा। परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। कई साथी परेशान होकर गाड़ी बेचने को मजबूर हो गए।
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ऑटो चालकों का कहना है कि हमारा रूट तय है और ई-रिक्शा चालकों का रूट तय नहीं है। वह बिना निश्चित रूट के चलते हैं और हमारे रास्ते की सवारी को बैठा लेते हैं। इससे हमें आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती है। ऑटो चालकों का कहना है कि कई बार तो हमें दिन भर सवारी का इंतजार करना पड़ता है। दिन भर में एक चक्कर भी लगाना मुश्किल होता है। इस महंगाई में घर चलाने में परेशानी हो रही है, ऊपर से ई-रिक्शा चालक हमारी सवारी बिठा ले रहे हैं। इससे और भी दिक्कत खड़ी हो रही है।
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ऑटो चालक नागेंद्र यादव ने कहा कि हम लोगों को नंबर के हिसाब से चलना पड़ता है। शहर में ई-रिक्शा की संख्या ज्यादा हो गई है, इनके लिए प्रशासन की तरफ से कोई रूट निर्धारित नहीं किया गया है। यह रिक्शा चालक हम लोगों के रूट की सवारियां ढो रहे हैं, जिससे हम लोगों को सवारी कम मिल रही है।
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रामभवन यादव ने कहा कि हम लोगों का ऑटो डीजल से चलता है, अगर सवारी पूरी नहीं होगी तो हम लोगों का खर्चा और लागत नहीं निकल पाएगा, जबकि ई-रिक्शा बैटरी से चलता है वह चार सवारी लेकर भी निकल जाते हैं, जिससे हम लोगों का काफ़ी नुकसान होता है।
अब्दुलरब ने बताया कि बैटरी रिक्शा पर प्रशासन की तरफ से नियंत्रण नहीं है न उनका पंजीकरण है न कोई रूट निर्धारित है, जिससे सभी स्टैंड पर ऑटो चालक परेशान हैं।
बबकू ने कहा कि प्रशासन द्वारा हम लोगों के लिए साफ सुथरा स्टैंड मिलना चाहिए। सवारियों को बैठने के लिए न कोई बेंच है न कोई साफ-सुथरी जगह। हरकेश ने कहा कि सवारी हो या ऑटो चालक, किसी के लिए यहां पीने के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
अशोक ने कहा कि स्टैंड पर महिला यात्री भी आती है, यहां उनके लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ता है।
ऑटो चालक लल्लू ने कहा कि चालान के डर से सड़क पर चलना मुश्किल हो जा रहा है। चलती गाड़ी का फोटो खींचकर चालान कर दिया जाता है। दिन भर में किसी तरह 1000 कमाया जाता है, 4 से 5 हजार का चालान कैसे भरा जाएगा। परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। कई साथी परेशान होकर गाड़ी बेचने को मजबूर हो गए।