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खरना के बाद शुरू हुआ निर्जल व्रत
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:25 PM IST
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खरीदारी करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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सूर्य की उपासना और छठ पूजा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के पोखरे और नदी के किनारे स्थित पूजा स्थलों पर साफ सफाई के बाद प्रकाश आदि की व्यवस्था की गई है। बाजार में डलिया, नारियल सभी प्रकार के फल, जमीरी नीबू, गन्ना, पत्ते सहित हल्दी, अदरक, सिंघाडा़, कच्ची मूंगफली, गट्टा, बताशा, मिठाई आदि के दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही।
खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर के पोखरे, सुगर मिल और बिधियानी के पोखरे के पास साफ सफाई नगर पालिका के कर्मचारियों ने की। मगहर के आमी नदी के किनारे शिवमंदिर से बाईपास तक घाट के किनारे प्रकाश की व्यवस्था पूर्ण करा ली गई है। इसी प्रकार मेंहदावल में कुबेर नाथ, बखिरा में भंगेश्वरनाथ हरिहरपुर में कठिनईया के किनारे और धनघटा में घाघरा के तटों पर लोगों ने अपने अपने लिए पूजा स्थल निर्धारित किए। राप्ती के तट पर भी ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर से जगह जगह पूजा स्थलों की सफाई किए जाने की खबर है। रविवार की शाम पोखरो और नदियों पर डूबते हुए सूूर्य को महिलाएं अर्घ्य देंगी।
संतकबीरनगर। पंडित वाचस्पति द्विवेदी ने बताया कि रविवार को सायंकाल सूरज डूबने के पहले नदी के घाट पर पहुंच कर अपना स्थान निर्धारित कर लेें। वहा पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दे इसके बाद उसी स्थान पर सोमवार की सुबह पहुंच कर अर्घ्य दें और घाट पर बेदी बनाकर छठ माता का पूजन करें।
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खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर के पोखरे, सुगर मिल और बिधियानी के पोखरे के पास साफ सफाई नगर पालिका के कर्मचारियों ने की। मगहर के आमी नदी के किनारे शिवमंदिर से बाईपास तक घाट के किनारे प्रकाश की व्यवस्था पूर्ण करा ली गई है। इसी प्रकार मेंहदावल में कुबेर नाथ, बखिरा में भंगेश्वरनाथ हरिहरपुर में कठिनईया के किनारे और धनघटा में घाघरा के तटों पर लोगों ने अपने अपने लिए पूजा स्थल निर्धारित किए। राप्ती के तट पर भी ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर से जगह जगह पूजा स्थलों की सफाई किए जाने की खबर है। रविवार की शाम पोखरो और नदियों पर डूबते हुए सूूर्य को महिलाएं अर्घ्य देंगी।
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संतकबीरनगर। पंडित वाचस्पति द्विवेदी ने बताया कि रविवार को सायंकाल सूरज डूबने के पहले नदी के घाट पर पहुंच कर अपना स्थान निर्धारित कर लेें। वहा पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दे इसके बाद उसी स्थान पर सोमवार की सुबह पहुंच कर अर्घ्य दें और घाट पर बेदी बनाकर छठ माता का पूजन करें।
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