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सजने लगीं दुकानें,महोत्सव पर संशय

Fri, 30 Dec 2016 11:35 PM IST
Sant Kabir Nagar
Sant Kabir Nagar Updated Fri, 30 Dec 2016 11:35 PM IST
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Dress flashed Shops, Festival doubt
मगहर कबीर चौरा परिसर में सजे खजले की दुकान। - फोटो : अमर उजाला
मगहर महोत्सव की तिथि जैसे- जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दूर दराज से दुकानदार यहां पहुंच कर अपनी दुकानें सजाने में जुट गए हैं। तैयारियों की भव्यता की तरफ व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदारों और प्रशासनिक सुस्ती की वजह से कार्यक्रम को लेकर लोग असमंजस की स्थिति में है। 
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दरअसल, मगहर महोत्सव 1987 से चल रहा है, जो प्रत्येक वर्ष 12 से 18 जनवरी के बीच मनाया जाता है। महोत्सव के मद्देनजर खजले की दुकान सजाए बुलंदशहर के रहने वाले राजकुमार सिंह, महिपाल सिंह, झूला सजाए हाथरस के निवासी वीरेंद्र कुमार और कटिहार से आए जादू की दुकान सजाए हरि सिंह ने कहा कि करीब 20 साल से यहां प्रत्येक वर्ष महोत्सव में आते है। महोत्सव में अच्छा कारोबार हो जाता है,यहीं उम्मीद लेकर फिर यहां आए।  
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 वहीं मगहर  महोत्सव समिति के संस्थापक सदस्य वेद प्रकाश चौबे ने कहा कि प्रशासन की मंशा ठीक नहीं लग रही है। कारण कि प्रशासन महोत्सव को लेकर रुचि नहीं दिखा रहा है। परंपरागत मेला तो लगेगा ही, चाहे प्रशासन भले ही हाथ खींच ले। संस्थापक सदस्य पवन श्रीवास्तव ने कहा कि महोत्सव हो, इसकेे लिए वे लोग महोत्सव के अध्यक्ष व डीएम से मिलकर महोत्सव कराने की मांग कर चुके हैं। प्रशासन मेला लगवाने में असमर्थता दिखा रहा हैं। महोत्सव के लिए अंतिम समय तक प्रयास किया जाएगा। संस्थापक सदस्य अवधेश सिंह ने कहा कि महोत्सव होगा, इसके लिए प्रयास जारी है। लेकिन प्रशासन की मंशा कुछ ठीक नहीं लग रही । पहले महोत्सव चंदे के पैसे से होता था, बाद में उत्तर प्रदेश शासन ने ही पूर्व में महोत्सव के लिए 25 लाख रुपये दिए थे, जो अब तक उन्हीं पैसों से होता आ रहा है। यदि निर्धारित तिथि पर महोत्सव नहीं हुआ तो आए दुकानदारों का नुकसान होगा।
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महोत्सव समिति के सदस्य पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि जिया अंसारी ने कहा की यह महोत्सव हर हाल में तय समय पर ही होना चाहिए। महोत्सव संस्थापक सदस्यों की उदासीनता ने इस पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यह लोग बैठकों में चुपके से जाती हैं और अपनी बात भी दमदारी से नहीं रख पाते है।अगर यही हाल रहा तो महोत्सव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। वह जल्द ही कस्बे के कुछ संभ्रांत नागरिकों को लेकर डीएम से मिलकर महोत्सव कराया जाए, इसके लिए वार्ता करेंगे। चेयरमैन अश्वनी कुमार गुप्त ने कहा की उनका महोत्सव से कोई वास्ता नहीं है, न ही महोत्सव का वह सदस्य ही हैं।


बाहर से जो दुकानदार आए हैं, उनका स्वागत है। साफ सफाई नगर पंचायत की जिम्मेदारी है। रहा सवाल महोत्सव का तो इसके लिए समिति के लोग जिम्मेदार हैं। उनकी राय में महोत्सव को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि महोत्सव अपने उद्देश्य से भटक चुका है। डीएम सुरेश कुमार ने बताया कि संभावित विधान सभा चुनाव की तैयारियों को लेकर व्यस्तता बढ़ी है। ऐसे में कार्यक्रम की भव्यता और उसकी गरिमा को दृष्टिगत रखते हुए यथोचित निर्णय लिया जाएगा।  
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