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Sant Kabir Nagar News: कान में बज रही सीटी तो न करें नजरअंदाज..संक्रमण का खतरा
Wed, 24 Dec 2025 01:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 24 Dec 2025 01:35 AM IST
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अस्पताल में मरीज देखते चिकित्सक-संवाद
- फोटो : chineni news
संतकबीरनगर। कान में सीटी बजना, भारीपन महसूस होना या सुनने में कमी को हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। कड़ाके की ठंड के बीच जिले में कान में संक्रमण (ईयर इंफेक्शन) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल में पिछले करीब आठ माह से ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
इन दिनों बर्फीली हवाओं के चलते तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कंपकंपी छुटा देने वाली ठंड का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम, खांसी के साथ अब कान से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कान शरीर का ऐसा अंग है जिसे लोग अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर युवा वर्ग टोपी या मफलर पहनने से परहेज करता है, जिससे ठंडी हवा सीधे कानों को प्रभावित कर रही है। समय पर इलाज न मिलने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
जिला अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक न होने से कान की बीमारी लेकर आने वाले मरीजों को अन्य विभागों के चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। इससे जटिल मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम होने पर नाक और कान के बीच स्थित यूस्टेशियन ट्यूब के माध्यम से नाक का पानी कान तक पहुंच जाता है। इससे कान के मध्य भाग में संक्रमण हो जाता है। कई मामलों में कफ जमने से यह ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, इससे न केवल संक्रमण बढ़ता है बल्कि सुनने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है।
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कान में संक्रमण के लक्षण
- कान में भारीपन महसूस होना।
- मवाद आना, कान का बहना।
- सिरदर्द, भूख न लगना।
- कानों में सीटी की आवाज आना।
- उल्टी आना, चक्कर आना आदि।
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बचाव के उपाय
- बच्चों को कान में रूई लगाकर नहलाएं।
- गर्म कपड़े और टोपी आदि लगाकर रखें।
- संक्रमण होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।
- बिना चिकित्सक की सलाह के कान में दवा न डालें।
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इन दिनों बर्फीली हवाओं के चलते तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कंपकंपी छुटा देने वाली ठंड का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम, खांसी के साथ अब कान से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कान शरीर का ऐसा अंग है जिसे लोग अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर युवा वर्ग टोपी या मफलर पहनने से परहेज करता है, जिससे ठंडी हवा सीधे कानों को प्रभावित कर रही है। समय पर इलाज न मिलने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
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जिला अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक न होने से कान की बीमारी लेकर आने वाले मरीजों को अन्य विभागों के चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। इससे जटिल मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम होने पर नाक और कान के बीच स्थित यूस्टेशियन ट्यूब के माध्यम से नाक का पानी कान तक पहुंच जाता है। इससे कान के मध्य भाग में संक्रमण हो जाता है। कई मामलों में कफ जमने से यह ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, इससे न केवल संक्रमण बढ़ता है बल्कि सुनने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है।
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कान में संक्रमण के लक्षण
- कान में भारीपन महसूस होना।
- मवाद आना, कान का बहना।
- सिरदर्द, भूख न लगना।
- कानों में सीटी की आवाज आना।
- उल्टी आना, चक्कर आना आदि।
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बचाव के उपाय
- बच्चों को कान में रूई लगाकर नहलाएं।
- गर्म कपड़े और टोपी आदि लगाकर रखें।
- संक्रमण होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।
- बिना चिकित्सक की सलाह के कान में दवा न डालें।