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Sant Kabir Nagar News: रेज्ड बेड प्लांटर तकनीकी से करें खेती, पाएं दो गुना लाभ
Sun, 02 Jul 2023 10:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 02 Jul 2023 10:37 PM IST
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संतकबीरनगर। कृषि विज्ञान केंद्र बगहीं पर दो दिवसीय रेज्ड बेड प्लांटर तकनीकी से अरहर की खेती से संबंधित प्रशिक्षण का रविवार को समापन हुआ। जिसमें अरहर की तकनीकी खेती करके होने वाले फायदे संबंधित जानकारी कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी।
कृषि वैज्ञानिक अभियांत्रिकी डॉ. देवेश कुमार रेज्ड बेड प्लांटर तकनीकी से अरहर की खेती से लाभ एवं आय को बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खरीफ की दलहनी फसलों में अरहर प्रमुख फसल है। उन्नत मशीनरी तकनीकी से इसका उत्पादन दो गुना किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान अरहर की गुणवत्ता एवं महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि अरहर की बुवाई किसानों को मेड़ पर करनी चाहिए। अरहर के लिए भूमि बलुई, दोमट या दोमट तथा पीएच मान 7-8 के बीच हो। वर्षा प्रारंभ होने के साथ खेती शुरू कर देनी चाहिए। देर से पकने वाली प्रजातियों का बीज 15 किलो ग्राम प्रति हेक्टेअर की दर से बोना चाहिए। किसान भाई इसके साथ तिल, बाजरा, ऊर्द एवं मूंग की भी फसलें भी ले सकते हैं।
मेड़ पर बुवाई ज्यादा लाभदायक है। बारिश से फसलें खराब नहीं होती। अब कतारों के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर रखें। पौध अंतराल 20-30 सेमी रखना चाहिए। अरहर की मुख्य प्रजातियां अमर, आजाद, नरेन्द्र अरहर-1, नरेन्द्र अरहर-2, पीडीए-11, मालवीय विकास, मालवीय चमत्कार एवं आइपीए 203 है। पकने की अवधि 250-270 दिन है। उपज क्षमता 25-32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। उक्त कार्य क्रम में 25 किसानों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर चंद्र कांत मणि, योगेंद्र कुमार त्रिपाठी, राज नारायण राय, राम रतन भास्कर, लाल जी यादव, चंद्र प्रकाश शुक्ल आदि किसान मौजूद रहे।
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कृषि वैज्ञानिक अभियांत्रिकी डॉ. देवेश कुमार रेज्ड बेड प्लांटर तकनीकी से अरहर की खेती से लाभ एवं आय को बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खरीफ की दलहनी फसलों में अरहर प्रमुख फसल है। उन्नत मशीनरी तकनीकी से इसका उत्पादन दो गुना किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान अरहर की गुणवत्ता एवं महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि अरहर की बुवाई किसानों को मेड़ पर करनी चाहिए। अरहर के लिए भूमि बलुई, दोमट या दोमट तथा पीएच मान 7-8 के बीच हो। वर्षा प्रारंभ होने के साथ खेती शुरू कर देनी चाहिए। देर से पकने वाली प्रजातियों का बीज 15 किलो ग्राम प्रति हेक्टेअर की दर से बोना चाहिए। किसान भाई इसके साथ तिल, बाजरा, ऊर्द एवं मूंग की भी फसलें भी ले सकते हैं।
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मेड़ पर बुवाई ज्यादा लाभदायक है। बारिश से फसलें खराब नहीं होती। अब कतारों के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर रखें। पौध अंतराल 20-30 सेमी रखना चाहिए। अरहर की मुख्य प्रजातियां अमर, आजाद, नरेन्द्र अरहर-1, नरेन्द्र अरहर-2, पीडीए-11, मालवीय विकास, मालवीय चमत्कार एवं आइपीए 203 है। पकने की अवधि 250-270 दिन है। उपज क्षमता 25-32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। उक्त कार्य क्रम में 25 किसानों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर चंद्र कांत मणि, योगेंद्र कुमार त्रिपाठी, राज नारायण राय, राम रतन भास्कर, लाल जी यादव, चंद्र प्रकाश शुक्ल आदि किसान मौजूद रहे।
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