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जिला अस्पताल में होंगी सभी जांचें
sant kabir nagar
Updated Fri, 01 Jul 2016 11:08 PM IST
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जिला अस्पताल का निरीक्षण करते सहायक निदेशक।
- फोटो : अमर उजाला
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संयुक्त जिला अस्पताल को जल्द ही उच्चीकृत कर सेंट्रल सविलांस हास्पिटल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। जहां पर डेंगू, चिकन पॉक्स, इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया समेत अनेक बीमारियाें की जांच के साथ ही उपचार भी होगा।
यह सुविधा मिलने के बाद मरीजों को मेडिकल कॉलेज या दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इंसेफेलाइटिस से बचाव और उससे निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को केंद्र सरकार के नेशनल विक्टर बांड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के सहायक निदेशक डॉ. कौशल कुमार ने यह जानकारी दी।
दरअसल, अब तक जो भी गंभीर रोगी जिला अस्पताल में इलाज के लिए आते उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। कई बार में इसके चलते मरीजों की जान भी चली जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नेशनल विक्टर बांड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के सहायक निदेशक ने बताया कि इस क्षेत्र में इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकन पाक्स जैसी गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। यहां पर न तो उसके लिए जांच किट है और न ही मशीनें हैं। यह सब सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल को सेंट्रल सर्विलांस हास्पिटल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत अस्पताल में हर तरह की जांच किट उपलब्ध होगी।
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इससे पूर्व सहायक निदेशक सबसे पहले वे आईसीयू वार्ड में गए। यहां उन्होंने यहां अब तक भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वे जनरल वार्ड, टीबी अस्पताल, ओपीडी, इमरजेंसी समेत अन्य विभागों में पहुंचे और चिकित्सकों से बातचीत कर जमीनी हकीकत जानी। सहायक निदेशक ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर वह यहां आए है। जिला अस्पताल में जेई और एईएस समेत अन्य बीमारियों से निपटने के लिए क्या उपाय हैं इसके बारे में जानकारी ली जा रही है।
इंसेफेलाइटिस जांच के लिए संबंधित आवश्यक किट उपलब्ध कराने के साथ ही मरीजों को हर संभव मदद जिला अस्पताल में ही मिलेेगी। इसके लिए जो भी संसाधनों की जरूरत होगी उसे उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर डॉक्टर एके सिन्हा, डॉक्टर सुनील कुमार, राजकुुमार, मृत्युंजय गुप्त समेत अन्य मौजूद रहे।
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यह सुविधा मिलने के बाद मरीजों को मेडिकल कॉलेज या दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इंसेफेलाइटिस से बचाव और उससे निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को केंद्र सरकार के नेशनल विक्टर बांड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के सहायक निदेशक डॉ. कौशल कुमार ने यह जानकारी दी।
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दरअसल, अब तक जो भी गंभीर रोगी जिला अस्पताल में इलाज के लिए आते उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। कई बार में इसके चलते मरीजों की जान भी चली जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नेशनल विक्टर बांड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के सहायक निदेशक ने बताया कि इस क्षेत्र में इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकन पाक्स जैसी गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। यहां पर न तो उसके लिए जांच किट है और न ही मशीनें हैं। यह सब सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल को सेंट्रल सर्विलांस हास्पिटल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत अस्पताल में हर तरह की जांच किट उपलब्ध होगी।
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इससे पूर्व सहायक निदेशक सबसे पहले वे आईसीयू वार्ड में गए। यहां उन्होंने यहां अब तक भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वे जनरल वार्ड, टीबी अस्पताल, ओपीडी, इमरजेंसी समेत अन्य विभागों में पहुंचे और चिकित्सकों से बातचीत कर जमीनी हकीकत जानी। सहायक निदेशक ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर वह यहां आए है। जिला अस्पताल में जेई और एईएस समेत अन्य बीमारियों से निपटने के लिए क्या उपाय हैं इसके बारे में जानकारी ली जा रही है।
इंसेफेलाइटिस जांच के लिए संबंधित आवश्यक किट उपलब्ध कराने के साथ ही मरीजों को हर संभव मदद जिला अस्पताल में ही मिलेेगी। इसके लिए जो भी संसाधनों की जरूरत होगी उसे उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर डॉक्टर एके सिन्हा, डॉक्टर सुनील कुमार, राजकुुमार, मृत्युंजय गुप्त समेत अन्य मौजूद रहे।