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Sant Kabir Nagar News: पुलिस चौकी हटाने को लेकर सीएमएस और एसपी में ठनी
Sun, 11 Jun 2023 11:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 11 Jun 2023 11:32 PM IST
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पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल के महिला छात्रावास में बनी पुलिस चौकी को हटाने के लिए सीएमएस ने एसपी को पत्र लिखा है। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अस्पताल से आने वाले मेमो को लेने से इनकार कर दिया है। सीएमएस का आरोप है कि एसपी से पुलिस चौकी हटाने की बाबत नाराज होकर मेमो नहीं लिया जा रहा है। इससे अस्पताल में आने वाले घायल व मृतक की पहचान और पोस्टमार्टम कराने में समस्या उत्पन्न हो रही है। हालांकि एसपी ने सीएमएस के आरोपों को खारिज कर दिया है।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी के सामने महिला छात्रावास है। इसमें फ्रंट पर पुलिस चौकी है। पीछे एंबुलेंस कर्मी रहते हैं। सीएमएस ने एसपी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि छात्रावास महिला स्टाफ नर्स के लिए बना है। अस्पताल में रहने की जगह नहीं है, जिसकी वजह से पुलिस चौकी के स्थान को खाली कर दिया जाए, जिससे स्टाफ नर्स वहां रह सकें और स्वास्थ्य सुविधा बेहतर दे सके।
इधर सीएमएस का पत्र जाने के बाद कोतवाली पुलिस ने अस्पताल से आने वाले मेमो को लेने से ही इनकार कर दिया। अब स्थिति यह हो गई है कि अस्पताल प्रशासन मेमो को कई बार भेजता है, तब जाकर उस पर कार्रवाई होती है। सीएमएस का कहना है कि जो लावारिस हालत में घायल व मृतक आ रहे हैं, उनकी पहचान कराना पुलिस का काम है। डॉक्टर का काम तो सिर्फ इलाज करना है, अगर इसी तरह से मेमो नहीं लिए जाएंगे तो विकट स्थिति खड़ी हो जाएगी। छात्रावास तो खाली करना ही है।
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वहीं पुलिस विभाग की मानें तो नियमानुसार जो मेमो आता है, उसे लिया जाता है और कार्रवाई की जाती है। अस्पताल प्रशासन हर घटना में तानाशाही रवैया अपनाता है। घायल का इलाज तो अस्पताल में ही होगा, पुलिस कर्मी उसका इलाज तो नहीं करेंगे। अस्पताल के कर्मचारी घायलों को पुलिस को सौंप कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहते हैं। बताया जाता है कि सीएमएस का पत्र अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गया है। (संवाद)
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इमरजेंसी से प्रतिदिन दो से तीन मेमो जाते हैं कोतवाली
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से प्रतिदिन दो से तीन मेमो कोतवाली भेजे जाते हैं, इसमें किसी के दुर्घटना में घायल व मृत होने की दशा में अस्पताल कर्मी मेमो लेकर कोतवाली जाते हैं, जिसके बाद पुलिस मेमो के अनुसार आगे की कार्रवाई करती है।
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अस्पताल परिसर के महिला छात्रावास में बनी पुलिस चौकी को हटाने के लिए एसपी को पत्र भेजा तो वह नाराज हो गए। पुलिस के लोग मेमो लेने से इनकार दे रहे हैं, और अस्पताल के कर्मचारी को दौड़ा रहे हैं। अस्पताल में आने वाले लावारिस घायल व शव की पहचान कराने में संकट खड़ा हो गया है। दो दिनों से अस्पताल प्रशासन के जरिये भेजे जाने वाले मेमो पुलिसकर्मी वापस कर दे रहे हैं। पुलिस चौकी तो खाली करना होगा।
-डॉ. महेश प्रसाद सीएमएस
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सीएमएस के जरिये पुलिस चौकी खाली करने का कोई पत्र नहीं मिला है। पुलिस तो उनकी सुरक्षा के लिए है। अस्पताल से आने वाले हर मेमो पर पुलिस कार्रवाई करती है, जो नियमानुसार होता है, वह मेमो लिया जाता है। पुलिसकर्मी किसी घायल का इलाज तो करेंगे नहीं, यह काम तो डॉक्टर का है। सीएमएस का आरोप बेबुनियाद है।
-सत्यजीत गुप्त, एसपी
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संतकबीरनगर। जिला अस्पताल के महिला छात्रावास में बनी पुलिस चौकी को हटाने के लिए सीएमएस ने एसपी को पत्र लिखा है। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अस्पताल से आने वाले मेमो को लेने से इनकार कर दिया है। सीएमएस का आरोप है कि एसपी से पुलिस चौकी हटाने की बाबत नाराज होकर मेमो नहीं लिया जा रहा है। इससे अस्पताल में आने वाले घायल व मृतक की पहचान और पोस्टमार्टम कराने में समस्या उत्पन्न हो रही है। हालांकि एसपी ने सीएमएस के आरोपों को खारिज कर दिया है।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी के सामने महिला छात्रावास है। इसमें फ्रंट पर पुलिस चौकी है। पीछे एंबुलेंस कर्मी रहते हैं। सीएमएस ने एसपी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि छात्रावास महिला स्टाफ नर्स के लिए बना है। अस्पताल में रहने की जगह नहीं है, जिसकी वजह से पुलिस चौकी के स्थान को खाली कर दिया जाए, जिससे स्टाफ नर्स वहां रह सकें और स्वास्थ्य सुविधा बेहतर दे सके।
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इधर सीएमएस का पत्र जाने के बाद कोतवाली पुलिस ने अस्पताल से आने वाले मेमो को लेने से ही इनकार कर दिया। अब स्थिति यह हो गई है कि अस्पताल प्रशासन मेमो को कई बार भेजता है, तब जाकर उस पर कार्रवाई होती है। सीएमएस का कहना है कि जो लावारिस हालत में घायल व मृतक आ रहे हैं, उनकी पहचान कराना पुलिस का काम है। डॉक्टर का काम तो सिर्फ इलाज करना है, अगर इसी तरह से मेमो नहीं लिए जाएंगे तो विकट स्थिति खड़ी हो जाएगी। छात्रावास तो खाली करना ही है।
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वहीं पुलिस विभाग की मानें तो नियमानुसार जो मेमो आता है, उसे लिया जाता है और कार्रवाई की जाती है। अस्पताल प्रशासन हर घटना में तानाशाही रवैया अपनाता है। घायल का इलाज तो अस्पताल में ही होगा, पुलिस कर्मी उसका इलाज तो नहीं करेंगे। अस्पताल के कर्मचारी घायलों को पुलिस को सौंप कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहते हैं। बताया जाता है कि सीएमएस का पत्र अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गया है। (संवाद)
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इमरजेंसी से प्रतिदिन दो से तीन मेमो जाते हैं कोतवाली
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से प्रतिदिन दो से तीन मेमो कोतवाली भेजे जाते हैं, इसमें किसी के दुर्घटना में घायल व मृत होने की दशा में अस्पताल कर्मी मेमो लेकर कोतवाली जाते हैं, जिसके बाद पुलिस मेमो के अनुसार आगे की कार्रवाई करती है।
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अस्पताल परिसर के महिला छात्रावास में बनी पुलिस चौकी को हटाने के लिए एसपी को पत्र भेजा तो वह नाराज हो गए। पुलिस के लोग मेमो लेने से इनकार दे रहे हैं, और अस्पताल के कर्मचारी को दौड़ा रहे हैं। अस्पताल में आने वाले लावारिस घायल व शव की पहचान कराने में संकट खड़ा हो गया है। दो दिनों से अस्पताल प्रशासन के जरिये भेजे जाने वाले मेमो पुलिसकर्मी वापस कर दे रहे हैं। पुलिस चौकी तो खाली करना होगा।
-डॉ. महेश प्रसाद सीएमएस
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सीएमएस के जरिये पुलिस चौकी खाली करने का कोई पत्र नहीं मिला है। पुलिस तो उनकी सुरक्षा के लिए है। अस्पताल से आने वाले हर मेमो पर पुलिस कार्रवाई करती है, जो नियमानुसार होता है, वह मेमो लिया जाता है। पुलिसकर्मी किसी घायल का इलाज तो करेंगे नहीं, यह काम तो डॉक्टर का है। सीएमएस का आरोप बेबुनियाद है।
-सत्यजीत गुप्त, एसपी