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Sant Kabir Nagar News: मां के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, गूंजते रहे जयकारे
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समय माता मंदिर में दर्शन को लगी भीड-संवाद
- फोटो : 1
संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही शहर के समय माता मंदिर, बरदहिया स्थित दुर्गा मंदिर और वन देवी मंदिर समेत ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
भक्तों ने माता को पूजा सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिरों में गूंजते जय माता दी के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।
नवरात्र को लेकर मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने मां के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसरों में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को शक्ति, साहस और पराक्रम की देवी माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिसके कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। देवी का स्वरूप सौम्य होने के साथ ही दुष्टों का संहार करने वाला माना जाता है। समय माता मंदिर के मुख्य पुजारी चंदन बाबा ने बताया कि मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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भक्तों ने माता को पूजा सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिरों में गूंजते जय माता दी के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।
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नवरात्र को लेकर मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने मां के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसरों में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को शक्ति, साहस और पराक्रम की देवी माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिसके कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। देवी का स्वरूप सौम्य होने के साथ ही दुष्टों का संहार करने वाला माना जाता है। समय माता मंदिर के मुख्य पुजारी चंदन बाबा ने बताया कि मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होती है।