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डीएपी की किल्लत से किसान परेशान
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डीएपी की किल्लत से किसान परेशान
अक्तूबर में हुई बारिश से किसान निर्धारित समय पर नहीं कर पाए दलहन-तिलहन की बुआई
खेतों में नमी का फायदा उठा कर एक साथ दहलन-तिलहन और गेहूं की बुआई करने से डीएपी की हुई किल्लत
जरूरत के सापेक्ष जिले को नहीं मिल पा रही डीएपी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले में डीएपी खाद की किल्लत से किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। समितियों पर जहां खाद लेने के लिए भीड़ जुट रही है, वहीं, अधिकांश प्राइवेट दुकानों पर खाद उपलब्ध नहीं है। समितियों पर पहुंचने वाले किसानों की संख्या की जरूरत के हिसाब से खाद नहीं पहुंच रही है। इससे अधिकतर किसान लौट रहे हैं। डीएपी की बढ़ी मांग की मुख्य वजह है कि अक्तूबर में हुई बारिश से खेतों में नमी होने का फायदा उठा कर किसान एक साथ दलहन-तिलहन और गेहूं की बुआई शुुरू कर दिए हैं। वैसे विभाग का दावा है कि 22 नवंबर तक स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
दलहन और तिलहन की बुआई वैैसे अक्तूबर में हो जाती है, लेकिन 17 और 18 अक्तूबर को बारिश हुई थी। इसकी वजह से खेतों में जलभराव अथवा नमी अधिक होने से दलहन और तिलहन की फसलों की बुआई अक्तूबर में नहीं हो पाई। खेत में पर्याप्त नमी होने के कारण नवंबर के प्रथम सप्ताह में ही किसानों ने गेहूं की बुआई के साथ ही दलहन और तिलहन की फसलों की बुआई शुरू कर दी। एक साथ एवं जल्दी बुआई शुरू होने से उर्वरक की जरूरत सभी किसानों को एक साथ पड़ी। वैसे सामान्य तौर पर 15 नवंबर से 30 नवंबर के बीच गेहूं की बुआई का समय निर्धारित है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष अक्तूबर में 2700 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हुई थी, जबकि इस वर्ष 1500 मीट्रिक टन की खपत रही। जबकि पिछले वर्ष नवंबर में 5000 मीट्रिक टन की खपत हुई थी। जबकि इस वर्ष नवंबर में अब तक 2690 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हो चुकी है। जिले में रबी की फसल के लिए कुल 9500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत जताई जा रही है, जबकि अभी तक 5230 मीट्रिक टन ही डीएपी उपलब्ध हो पाई है। जबकि गेहूं की फसल तैयार होने तक यूरिया की जरूरत 11 से 12 हजार मीट्रिक टन की है और जिले में वर्तमान में 8500 मीट्रिक टन यूरिया बफर गोदाम में रखी गई है। अब तक जिले में 2690 मीट्रिक टन डीएपी, 3620 मीट्रिक टन एसएसपी और एनपीके 1352 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है। कुल फास्फेटिक वितरण 7662 मीट्रिक टन हो चुका है। इधर, अपनी मांगों को लेकर दो नवंबर से ही समितियों के सचिव हड़ताल पर रहे। शुक्रवार को समितियों के सचिवों की हड़ताल समाप्त हुई। सचिवों की हड़ताल से भी दिक्कत हुई। जिले में करीब 350 प्राइवेट उर्वरक की दुकानें हैं। इसमें 200 से अधिक दुकानों पर डीएपी है। समस्या यह भी है कि एक सचिव के पास दो से अधिक समितियों का प्रभार है। एक साथ सभी समितियों पर खाद पहुंचने से उन्हें वितरण में दिक्कत हो रही है। एक समिति पर उर्वरक बिक्री करने के बाद ही दूसरी समिति पर सचिव उर्वरक की बिक्री कर रहे हैं। किसान अतुल पांडेय, आनंद, मोहित, मेवालाल, हरिश्चंद्र चौधरी आदि ने बताया कि डीएपी की कमी से गेहूं की बुआई करने में दिक्कत आ रही है। समितियों पर जहां भीड़ जुटने से कतार में लगने पर भी खाद नहीं मिल पा रही है, वहीं, प्राइवेट दुकानों पर भी डीएपी नहीं मिल रही है।
परेशान किसान अधिकारियों को कर रहे फोन
डीएपी की किल्लत से परेशान किसान डीएम, एडीएम, सीडीओ और जिला कृषि अधिकारी तक को फोन कर रहे हैं। किसान अधिकारियों को डीएपी नहीं मिलने की दिक्कत बता रहे हैं और समस्या का हल कराने की मांग कर रहे है। एडीएम मनोज कुमार सिंह के पास धर्मसिंहवा क्षेत्र के कुछ किसानों ने फोन किया और अपनी समस्या बताई। एडीएम ने मामले का संज्ञान लिया और तत्काल जिला कृषि अधिकारी को सूचना दी। डीएम दिव्या मित्तल ने बताया कि खाद, बीज की बिक्री सुचारु रूप से हो और किसानों को रसीद भी प्राप्त हो, इसकी जांच के लिए टीमें गठित की गई है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं।
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कोट
नवंबर में एक साथ गेहूं और दलहन-तिलहन की फसल की बुुआई शुुुरू करने से डीएपी की मांग बढ़ गई है। नवंबर में 5050 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है। इसमें 2500 मीट्रिक टन मिली है। जबकि 1000 मीट्रिक टन गोदाम में उपलब्ध है। 2000 मीट्रिक टन डीएपी की मांग की गई है। 22 नवंबर के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। किसानों को पहले जितनी जरूरत हो, उतनी ही उर्वरक दुकानों अथवा समितियों से ले जाएं, बाद में फिर जरूरत पर डीएपी खरीद कर सकेंगे। वैसे डीएपी की जगह दो बीघे खेत में एक बोरी सुपरफास्फेट, आधी-आधी बोरी पोटोस और यूरिया मिला कर किसान यदि बुआई करें तो डीएपी से अधिक फायदा होगा। किसी तरह की समस्या होने पर कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 7839882274 पर फोन करके सूचना दें तो समस्या का समाधान कराया जाएगा।
- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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अक्तूबर में हुई बारिश से किसान निर्धारित समय पर नहीं कर पाए दलहन-तिलहन की बुआई
खेतों में नमी का फायदा उठा कर एक साथ दहलन-तिलहन और गेहूं की बुआई करने से डीएपी की हुई किल्लत
जरूरत के सापेक्ष जिले को नहीं मिल पा रही डीएपी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले में डीएपी खाद की किल्लत से किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। समितियों पर जहां खाद लेने के लिए भीड़ जुट रही है, वहीं, अधिकांश प्राइवेट दुकानों पर खाद उपलब्ध नहीं है। समितियों पर पहुंचने वाले किसानों की संख्या की जरूरत के हिसाब से खाद नहीं पहुंच रही है। इससे अधिकतर किसान लौट रहे हैं। डीएपी की बढ़ी मांग की मुख्य वजह है कि अक्तूबर में हुई बारिश से खेतों में नमी होने का फायदा उठा कर किसान एक साथ दलहन-तिलहन और गेहूं की बुआई शुुरू कर दिए हैं। वैसे विभाग का दावा है कि 22 नवंबर तक स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
दलहन और तिलहन की बुआई वैैसे अक्तूबर में हो जाती है, लेकिन 17 और 18 अक्तूबर को बारिश हुई थी। इसकी वजह से खेतों में जलभराव अथवा नमी अधिक होने से दलहन और तिलहन की फसलों की बुआई अक्तूबर में नहीं हो पाई। खेत में पर्याप्त नमी होने के कारण नवंबर के प्रथम सप्ताह में ही किसानों ने गेहूं की बुआई के साथ ही दलहन और तिलहन की फसलों की बुआई शुरू कर दी। एक साथ एवं जल्दी बुआई शुरू होने से उर्वरक की जरूरत सभी किसानों को एक साथ पड़ी। वैसे सामान्य तौर पर 15 नवंबर से 30 नवंबर के बीच गेहूं की बुआई का समय निर्धारित है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष अक्तूबर में 2700 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हुई थी, जबकि इस वर्ष 1500 मीट्रिक टन की खपत रही। जबकि पिछले वर्ष नवंबर में 5000 मीट्रिक टन की खपत हुई थी। जबकि इस वर्ष नवंबर में अब तक 2690 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हो चुकी है। जिले में रबी की फसल के लिए कुल 9500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत जताई जा रही है, जबकि अभी तक 5230 मीट्रिक टन ही डीएपी उपलब्ध हो पाई है। जबकि गेहूं की फसल तैयार होने तक यूरिया की जरूरत 11 से 12 हजार मीट्रिक टन की है और जिले में वर्तमान में 8500 मीट्रिक टन यूरिया बफर गोदाम में रखी गई है। अब तक जिले में 2690 मीट्रिक टन डीएपी, 3620 मीट्रिक टन एसएसपी और एनपीके 1352 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है। कुल फास्फेटिक वितरण 7662 मीट्रिक टन हो चुका है। इधर, अपनी मांगों को लेकर दो नवंबर से ही समितियों के सचिव हड़ताल पर रहे। शुक्रवार को समितियों के सचिवों की हड़ताल समाप्त हुई। सचिवों की हड़ताल से भी दिक्कत हुई। जिले में करीब 350 प्राइवेट उर्वरक की दुकानें हैं। इसमें 200 से अधिक दुकानों पर डीएपी है। समस्या यह भी है कि एक सचिव के पास दो से अधिक समितियों का प्रभार है। एक साथ सभी समितियों पर खाद पहुंचने से उन्हें वितरण में दिक्कत हो रही है। एक समिति पर उर्वरक बिक्री करने के बाद ही दूसरी समिति पर सचिव उर्वरक की बिक्री कर रहे हैं। किसान अतुल पांडेय, आनंद, मोहित, मेवालाल, हरिश्चंद्र चौधरी आदि ने बताया कि डीएपी की कमी से गेहूं की बुआई करने में दिक्कत आ रही है। समितियों पर जहां भीड़ जुटने से कतार में लगने पर भी खाद नहीं मिल पा रही है, वहीं, प्राइवेट दुकानों पर भी डीएपी नहीं मिल रही है।
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परेशान किसान अधिकारियों को कर रहे फोन
डीएपी की किल्लत से परेशान किसान डीएम, एडीएम, सीडीओ और जिला कृषि अधिकारी तक को फोन कर रहे हैं। किसान अधिकारियों को डीएपी नहीं मिलने की दिक्कत बता रहे हैं और समस्या का हल कराने की मांग कर रहे है। एडीएम मनोज कुमार सिंह के पास धर्मसिंहवा क्षेत्र के कुछ किसानों ने फोन किया और अपनी समस्या बताई। एडीएम ने मामले का संज्ञान लिया और तत्काल जिला कृषि अधिकारी को सूचना दी। डीएम दिव्या मित्तल ने बताया कि खाद, बीज की बिक्री सुचारु रूप से हो और किसानों को रसीद भी प्राप्त हो, इसकी जांच के लिए टीमें गठित की गई है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं।
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कोट
नवंबर में एक साथ गेहूं और दलहन-तिलहन की फसल की बुुआई शुुुरू करने से डीएपी की मांग बढ़ गई है। नवंबर में 5050 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है। इसमें 2500 मीट्रिक टन मिली है। जबकि 1000 मीट्रिक टन गोदाम में उपलब्ध है। 2000 मीट्रिक टन डीएपी की मांग की गई है। 22 नवंबर के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। किसानों को पहले जितनी जरूरत हो, उतनी ही उर्वरक दुकानों अथवा समितियों से ले जाएं, बाद में फिर जरूरत पर डीएपी खरीद कर सकेंगे। वैसे डीएपी की जगह दो बीघे खेत में एक बोरी सुपरफास्फेट, आधी-आधी बोरी पोटोस और यूरिया मिला कर किसान यदि बुआई करें तो डीएपी से अधिक फायदा होगा। किसी तरह की समस्या होने पर कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 7839882274 पर फोन करके सूचना दें तो समस्या का समाधान कराया जाएगा।
- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी