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Sant Kabir Nagar News: ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा...छींकने-खांसने से भी टूट सकती हैं हड्डियां

Mon, 08 Jul 2024 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Mon, 08 Jul 2024 01:15 AM IST
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Danger of osteoporosis...bones can break even by sneezing and coughing
- ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की बीमारी है, 25 से 60 वर्ष तक के लोगों चपेट में आ रहे
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। हड्डियों की कमजोरी अब सिर्फ उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या नहीं रही है, कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। आहार में पोषक तत्वों की कमी और गड़बड़ लाइफस्टाइल के कारण अब समय से पहले हड्डियां कमजोर और खनिज घनत्व में कमी देखी जा रही है। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी है तेजी से बढ़ती हड्डियों की बीमारी है जिसकी शुरुआत 25 की आयु में हो सकती है। हड्डियों के खनिज घनत्व और द्रव्यमान की कमी के कारण ये इतनी कमजोर हो जाती हैं कि जरा सी चोट या गिरने से भी फ्रैक्चर का खतरा हो सकता है। इतना ही नहीं ऑस्टियोपोरोसिस की गंभीर स्थिति में छींकने-खांसने से भी हड्डियों के टूटने का जोखिम हो सकता है।

जिला अस्पताल के हड्डी रोग के 100 से डेढ़ सौ के ओपीडी में रोज 40 मरीज शरीर और पैरों में दर्द और हल्की चोट पर हड्डी टूटने की समस्या लेकर पहुंच रहे है। चिकित्सक की परामर्श पर जांच कराने पर कैल्शियम और विटामिन डी की कमी का पता चल रहा है। जिसके कारण हड्डी कमजोर हो रही है। हड्डी कमजोर होने की पहली अवस्था आस्टोपीनिया के रूप में देखने को मिलता है। जबकि समय पर इलाज और जरूरी सर्तकता न बरतने पर आगे चलकर यह रोग आस्टियोपोरोसिस का रूप ले लेता है। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डी अधिक कमजोर हो जाती है। जो छोटी चोट में भी टूट सकता है। ये महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है।
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क्यों होती है ये समस्या

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवओंभू के मुताबिक सामान्यतौर पर हमारी हड्डियां लगातार नवीनीकरण की अवस्था में होती हैं। यानी कि हड्डियों के पुराने ऊतक नष्ट होते रहते हैं और नए ऊतकों का निर्माण होता रहता है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ ये प्रक्रिया बाधित होने लग जाती है। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या में ऊतक तो नष्ट होते जाते हैं पर नए ऊतकों का निर्माण नहीं हो पाता है।
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किन लोगों में इसका खतरा अधिक
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. एलसी यादव के मुताबिक खान-पान में गड़बड़ी के साथ उम्र, पारिवारिक इतिहास और हार्मोनल समस्याओं के कारण ऑस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम बढ़ जाता है।अध्ययनों में पाया गया है कि सेक्स हार्मोन की कमी हड्डियों को कमजोर कर देती है। रजोनिवृत्ति के समय महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट आ जाती है, इसी तरह से प्रोस्टेट कैंसर के उपचार की स्थिति में पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर प्रभावित हो जाता है। इस तरह की स्थितियां आपमें हड्डियों से संबंधित समस्याओं को बढ़ाने के साथ कई तरह की अन्य विकारों का भी कारण बन सकती हैं।


न रोगों के शिकार हैं तो भी बरतें सावधानी



ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम कुछ प्रकार की चिकित्सा समस्या वाले लोगों में भी अधिक देखा जाता रहा है। आप भी अगर इनमें से किसी रोग के शिकार हैं तो सावधान हो जाएं।

सीलिएक डिजीज।

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज।

किडनी या लिवर रोग और कैंसर।

मल्टीपल मायलोमा।

रूमेटाइड आर्थराइटिस।
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