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संस्कृत मातृ भाषा ही नहीं विद्या है : डॉ. जोखन
Sun, 11 Jun 2023 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 11 Jun 2023 11:27 PM IST
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हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय खलीलाबाद में दस दिवसीय चल रहे संस्कृत भारती के संभाषण
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संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय खलीलाबाद में चल रहे संस्कृत भारती के संभाषण शिविर में रविवार को भाषाओं के जन्मोत्सव पर चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। गोरक्ष प्रांत के मंत्री डॉ. जोखन पांडेय ने कहा कि संस्कृत मातृभाषा ही नहीं विद्या है। इसका अध्ययन मानव मात्र के लिए कल्याण कारी है। अत: ऐसी समृद्ध समस्त भाषाओं की जन्मदात्री इस भाषा का अध्ययन एवं प्रचार प्रसार संपूर्ण भारत ही नहीं अपितु विश्व के समस्त लोगों तक पहुंचाना चाहिए।
कार्यकर्ता संस्कृत के वैशिष्ट्य को लोगों तक पहुंचाकर मानव मात्र के कल्याण के लिए प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से इस वर्ग का आयोजन किया गया है। यहां से प्रशिक्षित कार्यकर्ता गांव- गांव जाकर जन- जन तक संस्कृत भाषा को पहुंचाएं। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज गोंडा के असिस्टेंट प्रोफेसर आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। संस्कृत भाषा का अध्ययन मानव मात्र के लिए आवश्यक है। शिवम पांडेय ने कहा कि यहां बहुत आसानी से संस्कृत बोलने की सीख मिल रह रही है।
इस अवसर पर अवनीश तिवारी, आभाष मिश्र, देव चौबे, मोनू चौबे, रितेश चौबे, सूर्यांश यादव, प्रणव पांडेय, शिवा पांडेय, हिंदू पांडेय आदि लोग मौजूद रहे।
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कार्यकर्ता संस्कृत के वैशिष्ट्य को लोगों तक पहुंचाकर मानव मात्र के कल्याण के लिए प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से इस वर्ग का आयोजन किया गया है। यहां से प्रशिक्षित कार्यकर्ता गांव- गांव जाकर जन- जन तक संस्कृत भाषा को पहुंचाएं। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज गोंडा के असिस्टेंट प्रोफेसर आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। संस्कृत भाषा का अध्ययन मानव मात्र के लिए आवश्यक है। शिवम पांडेय ने कहा कि यहां बहुत आसानी से संस्कृत बोलने की सीख मिल रह रही है।
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इस अवसर पर अवनीश तिवारी, आभाष मिश्र, देव चौबे, मोनू चौबे, रितेश चौबे, सूर्यांश यादव, प्रणव पांडेय, शिवा पांडेय, हिंदू पांडेय आदि लोग मौजूद रहे।