{"_id":"58ac90084f1c1b3d32b23159","slug":"special-26-was-prepared-by-the-script-of-swindle","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘स्पेशल 26’ देखकर तैयार हुई ठगी की पटकथा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
‘स्पेशल 26’ देखकर तैयार हुई ठगी की पटकथा
Updated Wed, 22 Feb 2017 12:37 AM IST
विज्ञापन
पुलिस के हत्थे चढ़े जालसाज
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कर्ज से मुक्त होने के लिए स्कूल संचालक और देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के महेशपुर गांव निवासी रमेश प्रजापति ने फर्जी आयकर टीम बनाई थी। उसे यह योजना ‘स्पेशल 26’ फिल्म देखने के बाद आयी। इस कारण उसने यह फिल्म पांच पर देखी। वारदात को अंजाम देने के लिए खलीलाबाद में स्व. सीताराम सर्राफ की दुकान की रेकी भी की गई थी और फिर छापा मारा गया। दरोगा और सिपाही वर्दी पहने लोगों के हावभाव की वजह से टीम अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पायी है। व्यापारियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए फर्जी टीम को पकड़ लिया। रमेश को छोड़कर अधिकांश सदस्य रकम के लालच में फर्जी आयकर टीम में शामिल हुए।
मास्टरमाइंड रमेश स्नातक है। वह रुद्रपुर के रामलक्षन चौराहे पर आर एस मेमोरियल एकेडमी नाम से स्कूल चलाते हैं। पुलिस की पूछताछ में रमेश ने बताया कि स्कूल के संचालन में वह करीब 20 लाख रुपये का कर्जदार हो गया था और वह लोगों के तगादों से परेशान था। ‘स्पेशल 26’ फिल्म देखने के बाद उसे यह विचार आया। इसके लिए देवरिया जिले के ही वृजेश शाही, संदीप यादव, रंजू चौहान और सी-7 कर्नल रोड देहरादूून के निवासी नईम राहत के अलावा गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र निवासी राम प्रताप को शामिल कर योजना बनाई। इसके लिए टीम के सदस्यों को भी फिल्म दिखाई गई और किरदार तय किए गए।
गोरखपुर के कूड़ाघाट में पुलिस की दो सेट वर्दी और स्टार, बेल्ट आदि खरीदा गया। गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र निवासी उपेंद्र प्रजापति ने उसे मुंगेर निर्मित 32 बोर की पिस्टल मुहैया कराई। सात दिन पहले रमेश खलीलाबाद आया था और यहां ज्वेलरी की दुकानों पर भ्रमण करके हाल जाना था। रेकी के दौरान स्व. सीताराम सर्राफ की ज्वेलरी की दुकान पर अधिक भीड़ देखी थी। इस दौरान दुकान पर पहुंचे रजनीश वर्मा उर्फ प्रिंस से बातचीत की। बीते रविवार को फिर वह प्रिंस की दुकान पर पहुंचा था।
विज्ञापन
तय योजना के तहत राम प्रताप को लखनऊ भेजकर किराए पर नीली बत्ती लगी इनोवा मंगवायी। खलीलाबाद से पहले मलोरना के पास टीम के सदस्यों ने कपड़े बदले। वृजेश शाही दरोगा बने और संदीप यादव सिपाही बने। नईम राहत आयकर के सहायक आयुक्त व रमेश खुद आयुक्त आयकर बने और गले में आईकार्ड लटकाया। चूक कैसे हुई और टीम के सदस्यों के साथ पकड़े गए यह समझ में नहीं आया। दरोगा का किरदार निभाने वाले वृजेश शाही ने बताया कि वह फैजाबाद से कृषि से बीएससी कर रहे हैं। रमेश प्रजापति के संपर्क में एक दोस्त के जरिए आए थे और पैसा कमाने की लालच में आरोपी बन गए।
सिपाही की किरदार निभाने वाले संदीप यादव और रंजू चौहान 12वीं पास हैं। रंजू कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रही हैं। रमेश प्रजापित उसके एक दोस्त के परिचित हैं। उसी के माध्यम से वह उनके संपर्क में आई। उसे सीबीआई की महिला अधिकारी बन कर रोल अदा करने के लिए कहा गया था और उसके एवज में उसे पैसे दिए जाने की बात कहीं गई थी।
विज्ञापन
मास्टरमाइंड रमेश स्नातक है। वह रुद्रपुर के रामलक्षन चौराहे पर आर एस मेमोरियल एकेडमी नाम से स्कूल चलाते हैं। पुलिस की पूछताछ में रमेश ने बताया कि स्कूल के संचालन में वह करीब 20 लाख रुपये का कर्जदार हो गया था और वह लोगों के तगादों से परेशान था। ‘स्पेशल 26’ फिल्म देखने के बाद उसे यह विचार आया। इसके लिए देवरिया जिले के ही वृजेश शाही, संदीप यादव, रंजू चौहान और सी-7 कर्नल रोड देहरादूून के निवासी नईम राहत के अलावा गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र निवासी राम प्रताप को शामिल कर योजना बनाई। इसके लिए टीम के सदस्यों को भी फिल्म दिखाई गई और किरदार तय किए गए।
विज्ञापन
गोरखपुर के कूड़ाघाट में पुलिस की दो सेट वर्दी और स्टार, बेल्ट आदि खरीदा गया। गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र निवासी उपेंद्र प्रजापति ने उसे मुंगेर निर्मित 32 बोर की पिस्टल मुहैया कराई। सात दिन पहले रमेश खलीलाबाद आया था और यहां ज्वेलरी की दुकानों पर भ्रमण करके हाल जाना था। रेकी के दौरान स्व. सीताराम सर्राफ की ज्वेलरी की दुकान पर अधिक भीड़ देखी थी। इस दौरान दुकान पर पहुंचे रजनीश वर्मा उर्फ प्रिंस से बातचीत की। बीते रविवार को फिर वह प्रिंस की दुकान पर पहुंचा था।
विज्ञापन
तय योजना के तहत राम प्रताप को लखनऊ भेजकर किराए पर नीली बत्ती लगी इनोवा मंगवायी। खलीलाबाद से पहले मलोरना के पास टीम के सदस्यों ने कपड़े बदले। वृजेश शाही दरोगा बने और संदीप यादव सिपाही बने। नईम राहत आयकर के सहायक आयुक्त व रमेश खुद आयुक्त आयकर बने और गले में आईकार्ड लटकाया। चूक कैसे हुई और टीम के सदस्यों के साथ पकड़े गए यह समझ में नहीं आया। दरोगा का किरदार निभाने वाले वृजेश शाही ने बताया कि वह फैजाबाद से कृषि से बीएससी कर रहे हैं। रमेश प्रजापति के संपर्क में एक दोस्त के जरिए आए थे और पैसा कमाने की लालच में आरोपी बन गए।
सिपाही की किरदार निभाने वाले संदीप यादव और रंजू चौहान 12वीं पास हैं। रंजू कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रही हैं। रमेश प्रजापित उसके एक दोस्त के परिचित हैं। उसी के माध्यम से वह उनके संपर्क में आई। उसे सीबीआई की महिला अधिकारी बन कर रोल अदा करने के लिए कहा गया था और उसके एवज में उसे पैसे दिए जाने की बात कहीं गई थी।