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एंटी करप्शन,पुलिस टीम ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप

Thu, 01 Sep 2016 11:50 PM IST
sant kabir nagar 
sant kabir nagar  Updated Thu, 01 Sep 2016 11:50 PM IST
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Anti-corruption police on the charge on the other team
दराेगा विनोद कुमार - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर की एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को पौली चौकी इंचार्ज विनोद कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। लेकिन देर रात आरोपी दरोगा धनघटा थाने से भाग निकला। इससे पुलिस की सक्रियता पर सवाल उठने लगे। वहीं इस घटना के बाद से स्थानीय पुलिस और एंटी करप्शन टीम ने एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगाना शुरू कर दिया। एंटी करप्शन टीम जहां पुलिस की मिलीभगत से आरोपी दरोगा को भगाने का आरोप मढ़ रही है, वहीं पुलिस एंटी करप्शन की कस्टडी से आरोपी दरोगा के भागने की वजह बता कर अपना पल्ला झाड़ रही है।
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एंटी करप्शन विभाग के इंसपेक्टर सभाजीत त्रिपाठी ने बताया कि परसा गांव की पीड़ित महिला छाया देवी से बुधवार को अपराह्न करीब डेढ़ बजे जब आरोपी दरोगा विनोद कुमार अपने पौली ब्लॉक मुख्यालय स्थित आवास पर दस हजार रुपये घूस ले रहे थे, तभी उन्हें रंगे हाथ पकड़ा गया था। करीब दो बजे वह आरोपी को लेकर धनघटा थाने पहुंचे। मुकदमे की फर्द लिखते-लिखते देरी हो गई। आरोप है कि इसी बीच 30-40 लोग थाने पहुंच कर हो हल्ला मचाने लगे। बाद में एएसपी, सीओ समेत काफी पुलिस कर्मी थाने पहुंच गई। रात साढे़ आठ बजे आरोपी दरोगा को थाने के पुलिसकर्मियों के साथ सीएचसी मलौली मेडिकल परीक्षण कराने लाया गया था। 
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परीक्षण कराया कर रात 9.40 बजे वापस धनघटा थाने लाया गया। इस समय थाने में बिजली नहीं थी, लिखापढ़ी के लिए जनरेटर चालू कराने को कहा गया। लेकिन पुलिस कर्मियों ने जनरेटर खराब होना बताया। मोबाइल के टार्च की रोशनी से किसी तरह फर्द तैयार की गई। इसी बीच एफआईआर दर्ज करने के लिए वह थाने के मुंशी को तहरीर देने गए, इस दौरान उनकी टीम के चार सदस्य आरोपी दरोगा को घेर कर बैठे थे। तभी एसओ धनघटा ने आरोपी को बातचीत के लिए बाहर बुलाया और बाद में हल्ला मचाया कि दरोगा भाग गया। पुलिस ने जानबूझकर हल्ला मचाने के लिए कुछ लोगों को थाने बुलाया लिया था और फिर साजिश रचकर आरोपी दरोगा को थाने से भगा दिया। आरोप यहां तक है कि जानबूझकर जनरेटर खराब बताकर अंधेरा किया गया।
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 बृहस्पतिवार भोर में तीन बजे तक वह अपनी टीम के साथ थाने पर मौजूद रहे, लेकिन तब तक एफआईआर की कॉपी पुलिस ने नहीं दी। आरोपी दरोगा के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामले की विवेचना तो एंटी करप्शन टीम करेंगी ही, साथ ही आरोपी दरोगा के भागने के केस की भी विवेचना पुलिस से न करा कर एंटी करप्शन से कराए जाने की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट मुख्यालय लखनऊ के एसपी को भेजी है। 
वहीं एसओ धनघटा महेंद्र प्रताप चतुर्वेदी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप को बेबुनियाद बताया है। उनके अनुसार आरोपी दरोगा से जो भी बातचीत हुई वह एंटी करप्शन टीम के सामने हुई। जब आरोपी  भागा तब वह एंटी करप्शन टीम    की कस्टडी में ही था। वह थाने के गेट पर उग्र भीड़ को संभालने में  लगे थे।

एसपी शैलेष कुमार पांडेय ने बताया कि एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर की की तरफ से जैसे ही तहरीर जब मिली धनघटा पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर लिया। रिश्वत लेने के मामले में आरोपी दरोगा के पकड़े जाने और फिर भाग जाने की दोनों तहरीर एंटी करप्शन के इंसपेक्टर की तरफ से एक साथ पुलिस को दी गई। आरोपी दरोगा पुलिस की    कस्टडी से नहीं बल्कि एंटी करप्शन टीम की कस्टडी से भागा है। दरोगा की तलाश के लिए धनघटा एसओ और स्वाट टीम प्रभारी के नेतृत्व में अलग- अलग टीमें बनाई गईं हैं। आरोपी दरोगा के थाने से भागने के मामले की जांच अलग से कराई जाएगी। आरोपी दरोगा जल्द ही पुलिस की कस्टडी में होगा।


एसपी  एंटी करप्शन ललित कुमार सिंह ने बताया कि एंटी करप्शन की गोरखपुर यूनिट में इस वर्ष अब तक दस ट्रैपिंग कर चुकी है। लेकिन नौ मामलों में कोई आरोपी नहीं भागा। दसवें मामले में आरोपी दरोगा विनोद कुमार कस्टडी से भाग गया। विभाग के इंस्पेक्टर सभाजीत ने जो सूचना दी है, उसके मुताबिक आरोपी दरोगा को भगाने में पुलिस का हाथ है। आरोपी दरोगा कैसे भागा यह तो जांच का विंदु है। फिलहाल दोनों मामले में दर्ज केस की विवेचना एंटी करप्शन  से ही कराए जाने की इंसपेक्टर की सिफारिश पर उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श किया जाएगा। 
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