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ईंट लाद रहे मजदूर की करंट लगने से मौत

Sun, 02 Sep 2018 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 02 Sep 2018 11:29 PM IST
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labourer dead due to current
मजदूर की मौत की सूचना मिलने पर परिजन भट्ठे पर पहुंच गए। - फोटो : अमर उजाला
हरिहरपुर। रविवार को महुली थाना क्षेत्र के खरवनियां खुर्द गांव के सीवान में स्थित भट्ठे पर ईंट लादते समय करंट की चपेट में आने से मजदूर की मौत हो गई। सूचना मिलने पर परिजन भट्ठे पर पहुंच गए। महुली पुलिस शव को लेकर परिजनों के साथ थाने पहुंची। परिजनों व भट्ठा मालिक की मौजूदगी में पंचनामा के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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ठाठर गांव निवासी मजदूर दयाशंकर उर्फ नंदू निषाद (40) क्षेत्र के खरवनियां खुर्द गांव के सीवान में स्थित ईंट भट्ठे पर पहुंचा। ईंटों को रखने के लिए वह जैसे ही ट्राली पर खड़ा हुआ कि ऊपर से गुजर रहे हाई वोल्टेज बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना फोन के जरिए लोगों ने परिजनों और पुलिस को दी। मौके पर महुली पुलिस पहुंच गई।
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इस संबंध में एसओ महुली सौदागर राय का कहना है कि थाने पहुंचे परिजनों और भट्ठा मालिक व अन्य संबंधित लोगों के बीच बनी आपसी सहमति के आधार पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मौके मौजूद ईंट भट्ठा मालिक ने मृतक के परिजन को आर्थिक मदद भी की है।
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इस संबंध में विद्युत उपकेंद्र हरिहरपुर के जेई संजय यादव का कहना है कि करंट की चपेट आए मृतक से संबंधित मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पीड़ित परिजनों को विभागीय मदद का भरोसा दिलाया।

बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
हरिहरपुर। मजदूरी के सहारे परिवार का भरण-पोषण कर रहे ग्राम पंचायत खरवनियां खुर्द के ठाठर गांव निवासी 40 वर्षीय दयाशंकर उर्फ नंदू निषाद की करंट की चपेट में आने से हुई मौत से उसके चारों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। दयाशंकर उर्फ नंदू निषाद के मौत की खबर जैसे ही परिजनों को मिली, जो जहां था वहीं से ईट भट्ठे की ओर भागा।


17 वर्षीय बेटे निखिल के साथ पत्नी उर्मिला रोते बिलखते घटना स्थल की ओर चल दी। उसकी 13 वर्षीय बेटी संजनी, दस वर्षीय बेटी करिश्मा का रो-रोकर बुरा हाल था। सबसे छोटा बेटा आठ वर्षीय कृष्णा अपनी मां और भाई बहनों को रोता देख रो रहा था। वहां मौजूद हर कोई नंदू की मौत की खबर से स्तब्ध था। लोग यही कह रहे थे कि मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाला अब इस दुनियां में नहीं रहा। अब परिवार को दो वक्त की रोटियां भी मुश्किल से नसीब होंगी।
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