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गांवों में कोटे की दुकान को लेकर बवाल
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:19 PM IST
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अनशन शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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सांथा विकास खंड के अतरी नानकार ग्राम पंचायत में सात माह पूर्व अनियमितता में निलंबित हुए कोटे को बहाल कर दिए जाने का मामला तूल पकड़ लिया है। महिला ग्राम प्रधान ने खुलेआम एसडीएम पर मोटी रकम लेकर कोटा बहाल करने का आरोप मढ़ा है। जबकि बुधवार को नरेंद्र पांडेय के नेतृत्व में गांव के तमाम लोगों ने कोटे को निरस्त करके नए सिरे से कोटा चयन करने और एसडीएम को हटाने की मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। दूूसरी तरफ कोटेदार के समर्थन में आए कुछ लोगों ने आपूर्ति कार्यालय पर प्रदर्शन किया और आपूर्ति निरीक्षक को मांग पत्र दिया।
अतरी नानकार गांव के ग्रामीण लामबंद होकर नरेंद्र पांडेय के नेतृत्व में तहसील परिसर में पहुंचे और जलूस निकालकर एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में तहसील परिसर में एसडीएम कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीण नरेंद्र पांडेय, पूर्णमासी, रामानुज आदि का आरोप था कि मार्च 2016 में ग्रामीणों की शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर अतरी नानकार का कोटा निलंबित किया गया था। आरोप था कि अक्टूबर 2016 में एसडीएम रामजीवन ने मोटी रकम लेकर जांच रिपोर्ट का अल्पीकरण करते हुए कोटे को बहाल कर दिया। जिम्मेदार अधिकारी एसडीएम के इस कृत्य से जहां न्याय व्यवस्था पर प्रश्रचिह्न खड़ा हो रहा है वहीं ऐसे कृत्य से कोटेदार का मनोबल बढ़ रहा है। आरोप था कि एक सप्ताह पूर्व एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी गई थी, लेकिन एसडीएम रामजीवन के जरिए ग्रामीणों की शिकायत को नकारते हुए कोटा बहाल किया गया। एसडीएम के स्थानांतरण व निलंबित कोटे की दुकान को निरस्त कर नए सिरे से कोटे का चयन किए जाने की मांग पूरी होने तक यह आमरण अनशन चलता रहेगा । इस दौरान सुभावती देवी, विद्यावती देवी, अमरनाथ, रामनरेश, श्यामधर, लालपरी, सरोज, राजेश्वरी, किरन, राजेश, प्रकाश, चंद्रबली, पूर्णमासी, प्रमोद, जगरनाथ आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी तरफ कोटेदार के समर्थन में भोला अंसारी और खड़ग बहादुर के नेतृत्व में तमाम लोग तहसील परिसर में पहुंचे और आपूर्ति कार्यालय पर प्रदर्शन किए। बाद में आपूर्ति निरीक्षक को मांग पत्र दिया।
इंसेट
अतरीनानकर की प्रधान गुजराती देवी का आरोप था कि एसडीएम रामजीवन के जरिए धनउगाही करके उनके गांव का निलंबित कोटा बहाल किया गया है । एक सप्ताह पूर्व जब उनके द्वारा ग्रामीणों की शिकायत उनके संज्ञान में लाते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी, तभी उनका कार्य व्यवहार कोटेदार के पक्ष में था । मेंहदावल तहसील क्षेत्र में अब तक निलंबित तमाम कोटे की दुकान एसडीएम के जरिए धन लेकर बहाल किया गया है।
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इंसेट
अतरीनानकार का कोटा पूर्व में अनियमितता पाए जाने पर निलंबित किया गया था। बाद में कोटेेदार की सिक्योरिटी धनराशि जब्त करते हुए कोटा बहाल कर दिया गया और उसे चेतावनी दी गई कि भविष्य में यदि अनियमितता मिली तो निरस्तीकरण की कार्रवाई भी कर दी जाएगी। जहां से कोटा संबद्ध था, उस कोटेदार से उठान और वितरण का रजिस्टर मांगा गया है। जहां तक पैसा लेकर कोटा बहाल करने का जो आरोप लगाया जा रहा है वह निराधार है। कुछ लोगों के जरिए कोटेदार का धनादोहन करने के लिए आमरण अनशन करके दबाव बनाया जा रहा है।
रामजीवन ,एसडीएम
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अतरी नानकार गांव के ग्रामीण लामबंद होकर नरेंद्र पांडेय के नेतृत्व में तहसील परिसर में पहुंचे और जलूस निकालकर एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में तहसील परिसर में एसडीएम कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीण नरेंद्र पांडेय, पूर्णमासी, रामानुज आदि का आरोप था कि मार्च 2016 में ग्रामीणों की शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर अतरी नानकार का कोटा निलंबित किया गया था। आरोप था कि अक्टूबर 2016 में एसडीएम रामजीवन ने मोटी रकम लेकर जांच रिपोर्ट का अल्पीकरण करते हुए कोटे को बहाल कर दिया। जिम्मेदार अधिकारी एसडीएम के इस कृत्य से जहां न्याय व्यवस्था पर प्रश्रचिह्न खड़ा हो रहा है वहीं ऐसे कृत्य से कोटेदार का मनोबल बढ़ रहा है। आरोप था कि एक सप्ताह पूर्व एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी गई थी, लेकिन एसडीएम रामजीवन के जरिए ग्रामीणों की शिकायत को नकारते हुए कोटा बहाल किया गया। एसडीएम के स्थानांतरण व निलंबित कोटे की दुकान को निरस्त कर नए सिरे से कोटे का चयन किए जाने की मांग पूरी होने तक यह आमरण अनशन चलता रहेगा । इस दौरान सुभावती देवी, विद्यावती देवी, अमरनाथ, रामनरेश, श्यामधर, लालपरी, सरोज, राजेश्वरी, किरन, राजेश, प्रकाश, चंद्रबली, पूर्णमासी, प्रमोद, जगरनाथ आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी तरफ कोटेदार के समर्थन में भोला अंसारी और खड़ग बहादुर के नेतृत्व में तमाम लोग तहसील परिसर में पहुंचे और आपूर्ति कार्यालय पर प्रदर्शन किए। बाद में आपूर्ति निरीक्षक को मांग पत्र दिया।
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अतरीनानकर की प्रधान गुजराती देवी का आरोप था कि एसडीएम रामजीवन के जरिए धनउगाही करके उनके गांव का निलंबित कोटा बहाल किया गया है । एक सप्ताह पूर्व जब उनके द्वारा ग्रामीणों की शिकायत उनके संज्ञान में लाते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी, तभी उनका कार्य व्यवहार कोटेदार के पक्ष में था । मेंहदावल तहसील क्षेत्र में अब तक निलंबित तमाम कोटे की दुकान एसडीएम के जरिए धन लेकर बहाल किया गया है।
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अतरीनानकार का कोटा पूर्व में अनियमितता पाए जाने पर निलंबित किया गया था। बाद में कोटेेदार की सिक्योरिटी धनराशि जब्त करते हुए कोटा बहाल कर दिया गया और उसे चेतावनी दी गई कि भविष्य में यदि अनियमितता मिली तो निरस्तीकरण की कार्रवाई भी कर दी जाएगी। जहां से कोटा संबद्ध था, उस कोटेदार से उठान और वितरण का रजिस्टर मांगा गया है। जहां तक पैसा लेकर कोटा बहाल करने का जो आरोप लगाया जा रहा है वह निराधार है। कुछ लोगों के जरिए कोटेदार का धनादोहन करने के लिए आमरण अनशन करके दबाव बनाया जा रहा है।
रामजीवन ,एसडीएम