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Sant Kabir Nagar News: खतौनी में नाम सुधार टेढ़ी खीर...फार्मर रजिस्ट्री बनी जी का जंजाल
Fri, 17 Apr 2026 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:18 PM IST
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- खतौनी को दुरुस्त कराने में लग रहा 15 से 20 दिन का समय
- खतौनी और आधार कार्ड के नाम में मेल न होने से नहीं हो पा रही फार्मर रजिस्ट्री
संतकबीरनगर/धनघटा। फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसान परेशान हैं। स्थिति यह है कि तहसील में जाने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री के लिए खतौनी और आधार कार्ड के नाम में समानता जरूरी है। जिन किसानों के नाम में आधार कार्ड और खतौनी में भिन्नता है, उनके लिए खतौनी में नाम में सुधार कराना जरूरी है।
खतौनी के नाम में सुधार के लिए धनघटा तहसील पर आए परशुराम का कहना है कि उनका आधार कार्ड में नाम परशुराम है तो खतौनी में रशुराम दर्ज हो गया है। जिसके कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। परशुराम का कहना है कि कहने के लिए खतौनी में नाम का सुधार 1 से 2 दिन में हो जाता है, लेकिन लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक पहुंचने में 15 से 20 दिन का समय व्यतीत हो जा रहा है। इसके बावजूद खतौनी में सुधार नहीं हो पा रहा है।
सीताराम का कहना है कि आधार कार्ड में सीताराम दर्ज है तो खतौनी रामराज के नाम से दर्ज हो गई है। इसमें सुधार कराने के लिए करीब एक महीने से तहसील का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक सुधार नहीं हुआ। पांचू का कहना है कि आधार कार्ड में उनका नाम पांचू है तो खतौनी में सांचू दर्ज हो गया है। इसमें सुधार के लिए लेखपाल ने मुआयना किया, लेकिन अभी तक सुधार नहीं हुआ। जिसके कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
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इसी तरह खतौनी में अपने नाम का सुधार कराने के लिए रामदीन, राममिलन, सोमनाथ, जयशंकर आदि लोग तहसील का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन 15 से 20 दिन बाद भी उनकी खतौनी दुरुस्त नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि खतौनी दुरुस्त न होने की वजह से फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। फार्मर रजिस्ट्री न होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में तहसीलदार रामजी का कहना है कि खतौनी में हुई गड़बड़ी को ठीक करने के लिए लेखपालों को आदेश दे दिया गया है। एक से दो दिन में खतौनी में सुधार हो जा रहा है और कागज को ठीक करने के बाद संबंधित किसान की फार्मर रजिस्ट्री की जा रही है।
वरासत न होने के चलते भी आ रही दिक्कत
महुली। फार्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। रजिस्ट्री के लिए किसानों को जरूरी कागजात मुहैया कराना टेढ़ी खीर हो गई है। किसानों का कहना है कि वरासत न होने के चलते खतौनी में नाम नहीं चढ़ पाया है जिससे रजिस्ट्री होने में परेशानी हो रही है। शासन के निर्देश पर लेखपाल के साथ राजस्व टीम गांवों में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूरा करने में लगे हैं। महुली में फार्मर रजिस्ट्री करने पहुंचे लेखपाल अभिषेक सिंह यादव ने बताया कि राजस्व अभिलेख में नाम न होने के चलते कई किसान रजिस्ट्री से वंचित हो जा रहे हैं। कुछ किसानों के आधार कार्ड में भी गड़बड़ी के चलते उनकी रजिस्ट्री अधर में लटकी हुई है। बताते चलें कि फार्मर रजिस्ट्री न होने से किसानों को सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है। रजिस्ट्री के बिना किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाली खाद, बीज और जरूरी सुविधाओं सहित किसान सम्मान निधि भी मिलने में बाधा आएगी। जगदीशपुर के लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने बताया कि उनके गांव में किसान रजिस्ट्री का कार्य पूरा कर लिया गया है।
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- खतौनी और आधार कार्ड के नाम में मेल न होने से नहीं हो पा रही फार्मर रजिस्ट्री
संतकबीरनगर/धनघटा। फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसान परेशान हैं। स्थिति यह है कि तहसील में जाने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री के लिए खतौनी और आधार कार्ड के नाम में समानता जरूरी है। जिन किसानों के नाम में आधार कार्ड और खतौनी में भिन्नता है, उनके लिए खतौनी में नाम में सुधार कराना जरूरी है।
खतौनी के नाम में सुधार के लिए धनघटा तहसील पर आए परशुराम का कहना है कि उनका आधार कार्ड में नाम परशुराम है तो खतौनी में रशुराम दर्ज हो गया है। जिसके कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। परशुराम का कहना है कि कहने के लिए खतौनी में नाम का सुधार 1 से 2 दिन में हो जाता है, लेकिन लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक पहुंचने में 15 से 20 दिन का समय व्यतीत हो जा रहा है। इसके बावजूद खतौनी में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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सीताराम का कहना है कि आधार कार्ड में सीताराम दर्ज है तो खतौनी रामराज के नाम से दर्ज हो गई है। इसमें सुधार कराने के लिए करीब एक महीने से तहसील का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक सुधार नहीं हुआ। पांचू का कहना है कि आधार कार्ड में उनका नाम पांचू है तो खतौनी में सांचू दर्ज हो गया है। इसमें सुधार के लिए लेखपाल ने मुआयना किया, लेकिन अभी तक सुधार नहीं हुआ। जिसके कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
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इसी तरह खतौनी में अपने नाम का सुधार कराने के लिए रामदीन, राममिलन, सोमनाथ, जयशंकर आदि लोग तहसील का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन 15 से 20 दिन बाद भी उनकी खतौनी दुरुस्त नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि खतौनी दुरुस्त न होने की वजह से फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। फार्मर रजिस्ट्री न होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में तहसीलदार रामजी का कहना है कि खतौनी में हुई गड़बड़ी को ठीक करने के लिए लेखपालों को आदेश दे दिया गया है। एक से दो दिन में खतौनी में सुधार हो जा रहा है और कागज को ठीक करने के बाद संबंधित किसान की फार्मर रजिस्ट्री की जा रही है।
वरासत न होने के चलते भी आ रही दिक्कत
महुली। फार्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। रजिस्ट्री के लिए किसानों को जरूरी कागजात मुहैया कराना टेढ़ी खीर हो गई है। किसानों का कहना है कि वरासत न होने के चलते खतौनी में नाम नहीं चढ़ पाया है जिससे रजिस्ट्री होने में परेशानी हो रही है। शासन के निर्देश पर लेखपाल के साथ राजस्व टीम गांवों में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूरा करने में लगे हैं। महुली में फार्मर रजिस्ट्री करने पहुंचे लेखपाल अभिषेक सिंह यादव ने बताया कि राजस्व अभिलेख में नाम न होने के चलते कई किसान रजिस्ट्री से वंचित हो जा रहे हैं। कुछ किसानों के आधार कार्ड में भी गड़बड़ी के चलते उनकी रजिस्ट्री अधर में लटकी हुई है। बताते चलें कि फार्मर रजिस्ट्री न होने से किसानों को सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है। रजिस्ट्री के बिना किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाली खाद, बीज और जरूरी सुविधाओं सहित किसान सम्मान निधि भी मिलने में बाधा आएगी। जगदीशपुर के लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने बताया कि उनके गांव में किसान रजिस्ट्री का कार्य पूरा कर लिया गया है।