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Sant Kabir Nagar News: मौसम में बदलाव से बिगड़ रही बच्चों की सेहत
Thu, 13 Feb 2025 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 13 Feb 2025 11:38 PM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी में बच्चे की जांच करते बाल रोग विशेषज्ञ।
संतकबीरनगर। बदलते मौसम का मिजाज बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक दिन में तेज धूप और रात में गलन के चलते बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। जिसके चलते निमोनिया और कोल्ड डायरिया के मामले बढ़ रहे हैं। इलाज में लेट लतीफी बीमारी को गंभीर बना रही है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से 140 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। इसमें से 20 से 25 बच्चे निमोनिया और कोल्ड डायरियां से पीड़ित आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह के मुताबिक बच्चों के इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। निमोनिया और कोल्ड डायरियां हल्के लक्षणों से होती है। तत्काल उचित इलाज मिल तो रोग से बचाव मुमकिन है। लेट लतीफी से संक्रमण बढ़ने पर सूखी खांसी आती है। फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी से कमजोरी महसूस होने लगती है।
वहीं, बुखार होने पर भी इलाज में देरी भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहाकि जो बच्चे गंभीर होते हैं उन्हें ही भर्ती किया जाता है। इधर, लगातार तापमान में उतार चढ़ाव हो रहा है। जिसमे बच्चों को बचाकर रखना होगा। दिन में तपिश है और रात के मौसम में नरमी है, ऐसे में बच्चे बीमारी की चपेट में आते हैं।
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बीते छह दिन का तापमान
तिथि अधिकतम न्यूनतम
आठ फरवरी 23 8
नौ फरवरी 25 9
10 फरवरी 26 11
11 फरवरी 28 13
12 फरवरी 29 13
13 फरवरी 26 12
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जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से 140 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। इसमें से 20 से 25 बच्चे निमोनिया और कोल्ड डायरियां से पीड़ित आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह के मुताबिक बच्चों के इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। निमोनिया और कोल्ड डायरियां हल्के लक्षणों से होती है। तत्काल उचित इलाज मिल तो रोग से बचाव मुमकिन है। लेट लतीफी से संक्रमण बढ़ने पर सूखी खांसी आती है। फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी से कमजोरी महसूस होने लगती है।
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वहीं, बुखार होने पर भी इलाज में देरी भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहाकि जो बच्चे गंभीर होते हैं उन्हें ही भर्ती किया जाता है। इधर, लगातार तापमान में उतार चढ़ाव हो रहा है। जिसमे बच्चों को बचाकर रखना होगा। दिन में तपिश है और रात के मौसम में नरमी है, ऐसे में बच्चे बीमारी की चपेट में आते हैं।
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तिथि अधिकतम न्यूनतम
आठ फरवरी 23 8
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