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Sant Kabir Nagar News: खराब खानपान और कैल्शियम की कमी के कारण कमजोर हो रहीं बच्चों की हड्डियां
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जिला अस्पताल में बच्चे की जांच करते चिकित्सक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में इन दिनों कम उम्र के बच्चों और किशोरों में हड्डियां टूटने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह का कहना है कि बदलती जीवनशैली, पौष्टिक आहार की कमी, कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी के कारण बच्चों की हड्डियां पहले की तुलना में अधिक कमजोर हो रही हैं। यही वजह है कि हल्की चोट या मामूली गिरने पर भी फ्रैक्चर के मामले सामने आ रहे हैं।
डॉ. अमित सिंह ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में ऐसे कई मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी हड्डियां सामान्य चोट लगने पर भी टूट जा रही हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बच्चों का असंतुलित खान-पान तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी है।
उन्होंने कहा कि जन्म के बाद शिशु को कम से कम छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। मां के दूध से बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व, कैल्शियम और रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है, जो उसकी हड्डियों और शरीर के समुचित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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बच्चों को नियमित रूप से दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, अंडा और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाने चाहिए। साथ ही रोजाना कुछ समय धूप में रहने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी मिलता है, जिससे कैल्शियम का अवशोषण बेहतर होता है और हड्डियां मजबूत रहती हैं।
उन्होंने बताया कि मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। खेलकूद और नियमित व्यायाम की कमी भी हड्डियों की मजबूती पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की दिनचर्या, भोजन और शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. अमित सिंह ने कहा कि समय रहते सही खान-पान, नियमित व्यायाम और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति से हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है। यदि बच्चों में बार-बार हड्डी टूटने, जोड़ों में दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
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संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में इन दिनों कम उम्र के बच्चों और किशोरों में हड्डियां टूटने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह का कहना है कि बदलती जीवनशैली, पौष्टिक आहार की कमी, कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी के कारण बच्चों की हड्डियां पहले की तुलना में अधिक कमजोर हो रही हैं। यही वजह है कि हल्की चोट या मामूली गिरने पर भी फ्रैक्चर के मामले सामने आ रहे हैं।
डॉ. अमित सिंह ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में ऐसे कई मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी हड्डियां सामान्य चोट लगने पर भी टूट जा रही हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बच्चों का असंतुलित खान-पान तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी है।
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उन्होंने कहा कि जन्म के बाद शिशु को कम से कम छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। मां के दूध से बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व, कैल्शियम और रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है, जो उसकी हड्डियों और शरीर के समुचित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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बच्चों को नियमित रूप से दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, अंडा और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाने चाहिए। साथ ही रोजाना कुछ समय धूप में रहने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी मिलता है, जिससे कैल्शियम का अवशोषण बेहतर होता है और हड्डियां मजबूत रहती हैं।
उन्होंने बताया कि मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। खेलकूद और नियमित व्यायाम की कमी भी हड्डियों की मजबूती पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की दिनचर्या, भोजन और शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. अमित सिंह ने कहा कि समय रहते सही खान-पान, नियमित व्यायाम और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति से हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है। यदि बच्चों में बार-बार हड्डी टूटने, जोड़ों में दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।