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Sant Kabir Nagar News: बदलते मौसम में वायरल संक्रमण से पीड़ित हो रहे बच्चे, अस्पताल में बढ़ी भीड़
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जिला अस्पताल में भर्ती बच्चे। संवाद
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संतकबीरनगर। बारिश, धूप और तापमान में लगातार हो रहे बदलाव का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त और संक्रमण से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। इन दिनों रोजाना 200 से अधिक बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें गंभीर लक्षण वाले करीब 15 से 20 बच्चों को प्रतिदिन भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार मौसम में उतार-चढ़ाव के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। भर्ती बच्चों को पूरी तरह स्वस्थ होने में सामान्यतः एक सप्ताह से 10 दिन तक का समय लग रहा है।
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हालत बिगड़ने पर भर्ती कर रहे चिकित्सक
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस समय बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, बुखार और विभिन्न प्रकार के संक्रमण के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। जिन बच्चों की स्थिति सामान्य उपचार से नियंत्रित नहीं हो रही है, उन्हें अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में उपचार दिया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि कुछ बच्चों में बुखार के साथ उल्टी-दस्त और कमजोरी की समस्या भी देखी जा रही है। ऐसे बच्चों को घर भेजने के बजाय आवश्यक जांच और उपचार के लिए वार्ड में रखा जा रहा है, ताकि उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। अधिकतर बच्चों को उपचार के बाद करीब एक सप्ताह से 10 दिन में राहत मिल रही है।
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वार्डों की नियमित मॉनीटरिंग
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमाशंकर सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल फीवर के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। अस्पताल में बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, आवश्यक जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। वार्डों और ओपीडी की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि भर्ती बच्चों की स्थिति पर चिकित्सकों की टीम लगातार नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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उबला पानी और पौष्टिक आहार जरूरी
चिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वच्छ या उबला हुआ पानी पिलाएं और बाहर के खुले खाद्य पदार्थों से बचाएं। भोजन ताजा और पौष्टिक होना चाहिए, ताकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।
मौसम में अचानक बदलाव के दौरान बच्चों को भीगने और अत्यधिक गर्मी या ठंड के संपर्क से बचाने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों ने कहा कि लगातार तेज बुखार, उल्टी-दस्त, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या बच्चा सामान्य से अधिक सुस्त दिखाई दे तो स्वयं दवा देने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मौसम बदलने के साथ वायरल संक्रमण के मामलों में वृद्धि स्वाभाविक है लेकिन समय पर पहचान, उचित उपचार और सावधानी से बच्चों को गंभीर संक्रमण से बचाया जा सकता है।
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चिकित्सकों के अनुसार मौसम में उतार-चढ़ाव के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। भर्ती बच्चों को पूरी तरह स्वस्थ होने में सामान्यतः एक सप्ताह से 10 दिन तक का समय लग रहा है।
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हालत बिगड़ने पर भर्ती कर रहे चिकित्सक
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस समय बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, बुखार और विभिन्न प्रकार के संक्रमण के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। जिन बच्चों की स्थिति सामान्य उपचार से नियंत्रित नहीं हो रही है, उन्हें अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में उपचार दिया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि कुछ बच्चों में बुखार के साथ उल्टी-दस्त और कमजोरी की समस्या भी देखी जा रही है। ऐसे बच्चों को घर भेजने के बजाय आवश्यक जांच और उपचार के लिए वार्ड में रखा जा रहा है, ताकि उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। अधिकतर बच्चों को उपचार के बाद करीब एक सप्ताह से 10 दिन में राहत मिल रही है।
वार्डों की नियमित मॉनीटरिंग
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमाशंकर सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल फीवर के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। अस्पताल में बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, आवश्यक जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। वार्डों और ओपीडी की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि भर्ती बच्चों की स्थिति पर चिकित्सकों की टीम लगातार नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उबला पानी और पौष्टिक आहार जरूरी
चिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वच्छ या उबला हुआ पानी पिलाएं और बाहर के खुले खाद्य पदार्थों से बचाएं। भोजन ताजा और पौष्टिक होना चाहिए, ताकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।
मौसम में अचानक बदलाव के दौरान बच्चों को भीगने और अत्यधिक गर्मी या ठंड के संपर्क से बचाने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों ने कहा कि लगातार तेज बुखार, उल्टी-दस्त, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या बच्चा सामान्य से अधिक सुस्त दिखाई दे तो स्वयं दवा देने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मौसम बदलने के साथ वायरल संक्रमण के मामलों में वृद्धि स्वाभाविक है लेकिन समय पर पहचान, उचित उपचार और सावधानी से बच्चों को गंभीर संक्रमण से बचाया जा सकता है।