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Sant Kabir Nagar News: वर्गीकृत सीमेन से छुट्टा पशुओं पर लगेगी लगाम
Sun, 02 Apr 2023 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 02 Apr 2023 11:56 PM IST
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संतकबीरनगर। जिले के पशुपालकों के लिए सुखद खबर है। गायों से अधिक से अधिक बछिया पैदा हो सकें, उसके लिए प्रदेश सरकार और अमेरिकन कंपनी के बीच करार के तहत वर्गीकृत सीमेन का उत्पादन किया जा रहा है। वर्गीकृत सीमेन से गर्भ धारण करने पर 90 प्रतिशत मामलों में गाय बछिया को जन्म देती है। इस सीमेन की कुल लागत 1,200 रुपये के आस-पास आती है। इस पर पहले से ही सरकार 75 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। छुट्टा पशुओं की तादाद कम करने के लिए इस सीमेन को कारगर बताया जा रहा है।
पशुपालकों को यह सीमेन 300 रुपये में प्राप्त हो रही थी। अधिक मूल्य की वजह से बिक्री में हो रही कमी को देखते हुए शासन स्तर से इसका मूल्य 70 प्रतिशत और घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है। जिले में कुल गोवंश की संख्या लगभग 78 हजार है। प्रजनन योग्य गोवंश की संख्या 24 हजार के आस-पास है। ऐसे में रोज छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लगातार किसानों की शिकायतें मिलती रहती हैं कि छुट्टा पशु उनके खेतों को चर कर फसल बर्बाद कर रहे हैं।
इसी के मद्देनजर पशुपालन विभाग ने यह प्रयास किया है कि बछड़ों की संख्या को कुछ भी कर के नियंत्रित किया जाए। इसी के तहत वर्गीकृत सीमेन से गायों को गर्भधारण कराया जा रहा है। पशुपालन विभाग मुख्यालय ने जिले को 1000 सीमेन पहले ही उपलब्ध करा दिया था। अगले सप्ताह तक 800 और सीमेन मिल जाएगा। इच्छुक किसान नजदीकी पशु अस्पताल पर संपर्क करके इसे प्राप्त कर सकते हैं।
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शाहीवाल और गिर नस्ल की गायों को होगा फायदा
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी ओम प्रकाश मिश्रा ने बताया कि वर्गीकृत सीमेन शाहीवाल और गिर नस्ल की गाय को ध्यान में रख कर बनाया गया है। शाहीवाल और गिर नस्ल की गायें अच्छा दूध देती हैं। इससे भविष्य में अच्छी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि वर्गीकृत सीमेन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। मार्च माह में 148 सीमेन की बिक्री हुई है, जो कि पशुपालन के विभाग के आंकड़ों के हिसाब से अच्छी प्रगति है।
धन की कमी से गो-आश्रय स्थल हो गए वंचित
निराश्रित पशुओं को आश्रय देने के लिए बनाए गए पशु आश्रय स्थल में गर्भ धारण करने वाली गायों को वर्गीकृत सीमेन नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे धन की कमी मुख्य वजह बताई जा रही है। ऐसे में वहां छुट्टा पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। डॉ. ओम प्रकाश मिश्रा ने बताया कि यदि पशु आश्रय स्थल के पशुओं को वर्गीकृत सीमेन से गर्भ धारण कराया जाए तो काफी हद तक छुट्टा पशुओं पर लगाम लगाई जा सकती है।
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पशुपालकों को यह सीमेन 300 रुपये में प्राप्त हो रही थी। अधिक मूल्य की वजह से बिक्री में हो रही कमी को देखते हुए शासन स्तर से इसका मूल्य 70 प्रतिशत और घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है। जिले में कुल गोवंश की संख्या लगभग 78 हजार है। प्रजनन योग्य गोवंश की संख्या 24 हजार के आस-पास है। ऐसे में रोज छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लगातार किसानों की शिकायतें मिलती रहती हैं कि छुट्टा पशु उनके खेतों को चर कर फसल बर्बाद कर रहे हैं।
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इसी के मद्देनजर पशुपालन विभाग ने यह प्रयास किया है कि बछड़ों की संख्या को कुछ भी कर के नियंत्रित किया जाए। इसी के तहत वर्गीकृत सीमेन से गायों को गर्भधारण कराया जा रहा है। पशुपालन विभाग मुख्यालय ने जिले को 1000 सीमेन पहले ही उपलब्ध करा दिया था। अगले सप्ताह तक 800 और सीमेन मिल जाएगा। इच्छुक किसान नजदीकी पशु अस्पताल पर संपर्क करके इसे प्राप्त कर सकते हैं।
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शाहीवाल और गिर नस्ल की गायों को होगा फायदा
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी ओम प्रकाश मिश्रा ने बताया कि वर्गीकृत सीमेन शाहीवाल और गिर नस्ल की गाय को ध्यान में रख कर बनाया गया है। शाहीवाल और गिर नस्ल की गायें अच्छा दूध देती हैं। इससे भविष्य में अच्छी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि वर्गीकृत सीमेन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। मार्च माह में 148 सीमेन की बिक्री हुई है, जो कि पशुपालन के विभाग के आंकड़ों के हिसाब से अच्छी प्रगति है।
धन की कमी से गो-आश्रय स्थल हो गए वंचित
निराश्रित पशुओं को आश्रय देने के लिए बनाए गए पशु आश्रय स्थल में गर्भ धारण करने वाली गायों को वर्गीकृत सीमेन नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे धन की कमी मुख्य वजह बताई जा रही है। ऐसे में वहां छुट्टा पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। डॉ. ओम प्रकाश मिश्रा ने बताया कि यदि पशु आश्रय स्थल के पशुओं को वर्गीकृत सीमेन से गर्भ धारण कराया जाए तो काफी हद तक छुट्टा पशुओं पर लगाम लगाई जा सकती है।