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Sant Kabir Nagar News: जब देवरिया जेल में मनाई थी राम भक्तों ने दीपावली
Mon, 08 Jan 2024 11:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 08 Jan 2024 11:02 PM IST
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16 अक्तूबर 1990 को मेंहदावल में पहले चक्र में 11 कार सेवकों की हुई थी गिरफ्तारी
तारेश सिंह
मेंहदावल। 16 अक्तूबर 1990 की रात थी। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। राम मंदिर आंदोलन चरम था। अयोध्या में कार सेवा के लिए राम भक्तों ने कमर कस ली थी। लेकिन 30 अक्तूबर को कार सेवा से पहले ही राम भक्तों की गिरफ्तारी की शासन की नीति बन गई। उस दौरान प्रथम चक्र में मेंहदावल नगर से कुल 11 राम भक्त जो कार सेवा की तैयारी में थे। पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दीपावली राम भक्तों ने देवरिया के जिला जेल में मनाई थी।
मेंहदावल नगर पंचायत के नायक टोला निवासी 62 वर्षीय दशरथ किशोर सिंह उर्फ मकोदर सिंह ने बताया कि 16 अक्तूबर 1990 की रात थी। अचानक मेंहदावल पुलिस रात में राम भक्तों के घर दस्तक देते हुए कार सेवा के लिए तैयार 11 कारसेवकों को पकड़कर थाने लाई। दूसरे दिन कारसेवकों को बस्ती पहुंचा दिया। बस्ती मंडल के तीनों जिलों के 740 कारसेवकों की गिरफ्तारी हुई थी।
बताया कि बस्ती से परिवहन निगम की बसों में 40-40 की संख्या में कारसेवकों को पुलिस की देखरेख में देवरिया जिला जेल पहुंचाया गया। 18 अक्तूबर 1990 को राम भक्तों ने दीपावली देवरिया जेल में मनाई।
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वहीं, 55 वर्षीय कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि देवरिया जेल में 21 दिन हम लोग रहे। उस समय तैनात जेलर त्रिपाठी ने हम कार सेवकों की खूब आवभगत की। देवरिया की जनता भी भोजन-जलपान तक की व्यवस्था हर दिन जेल में पहुंचाने का कार्य कर रही थी। अयोध्या के राम मंदिर का एक अलग ही जुनून था। हर घर से लोग अयोध्या कारसेवकों के साथ जाने के लिए तैयार थे।
राम भक्त प्रहलाद वर्मा ने बताया कि आधी रात को घर पर पुलिस ने छापा मारा और गाड़ी में भरकर हमें थाने पहुंचा दिया गया। हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए कि यह गिरफ्तारी क्यों हो रही है। भोर में जब बस्ती पहुंचाया गया तो वहां बस्ती, सिद्धार्थनगर के लोग भी पुलिस अभिरक्षा में थे। तब पता चला कि अयोध्या हम लोग न पहुंचें, इसलिए उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार हम लोगों की गिरफ्तारी करवा रही है। कुल 31 दिन हम लोग जेल में रहे। 21 दिन देवरिया जिला जेल में तथा शेष दिन गोरखपुर में परिवहन निगम के वर्कशॉप को अस्थायी जेल बनाकर वहां हमें रखा गया। 30 अक्तूबर 1990 को जब राम भक्तों पर गोली चलने की घटना हुई तो यह सुनकर काफी दुख हुआ। यह संघर्षों का परिणाम है कि कारसेवकों के बलिदान के चलते राम मंदिर का निर्माण और 22 जनवरी को रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा नए युग का आरंभ कर रही है।
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16 अक्तूबर 1990 को मेंहदावल में पहले चक्र में 11 कार सेवकों की हुई थी गिरफ्तारी
तारेश सिंह
मेंहदावल। 16 अक्तूबर 1990 की रात थी। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। राम मंदिर आंदोलन चरम था। अयोध्या में कार सेवा के लिए राम भक्तों ने कमर कस ली थी। लेकिन 30 अक्तूबर को कार सेवा से पहले ही राम भक्तों की गिरफ्तारी की शासन की नीति बन गई। उस दौरान प्रथम चक्र में मेंहदावल नगर से कुल 11 राम भक्त जो कार सेवा की तैयारी में थे। पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दीपावली राम भक्तों ने देवरिया के जिला जेल में मनाई थी।
मेंहदावल नगर पंचायत के नायक टोला निवासी 62 वर्षीय दशरथ किशोर सिंह उर्फ मकोदर सिंह ने बताया कि 16 अक्तूबर 1990 की रात थी। अचानक मेंहदावल पुलिस रात में राम भक्तों के घर दस्तक देते हुए कार सेवा के लिए तैयार 11 कारसेवकों को पकड़कर थाने लाई। दूसरे दिन कारसेवकों को बस्ती पहुंचा दिया। बस्ती मंडल के तीनों जिलों के 740 कारसेवकों की गिरफ्तारी हुई थी।
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बताया कि बस्ती से परिवहन निगम की बसों में 40-40 की संख्या में कारसेवकों को पुलिस की देखरेख में देवरिया जिला जेल पहुंचाया गया। 18 अक्तूबर 1990 को राम भक्तों ने दीपावली देवरिया जेल में मनाई।
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वहीं, 55 वर्षीय कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि देवरिया जेल में 21 दिन हम लोग रहे। उस समय तैनात जेलर त्रिपाठी ने हम कार सेवकों की खूब आवभगत की। देवरिया की जनता भी भोजन-जलपान तक की व्यवस्था हर दिन जेल में पहुंचाने का कार्य कर रही थी। अयोध्या के राम मंदिर का एक अलग ही जुनून था। हर घर से लोग अयोध्या कारसेवकों के साथ जाने के लिए तैयार थे।
राम भक्त प्रहलाद वर्मा ने बताया कि आधी रात को घर पर पुलिस ने छापा मारा और गाड़ी में भरकर हमें थाने पहुंचा दिया गया। हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए कि यह गिरफ्तारी क्यों हो रही है। भोर में जब बस्ती पहुंचाया गया तो वहां बस्ती, सिद्धार्थनगर के लोग भी पुलिस अभिरक्षा में थे। तब पता चला कि अयोध्या हम लोग न पहुंचें, इसलिए उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार हम लोगों की गिरफ्तारी करवा रही है। कुल 31 दिन हम लोग जेल में रहे। 21 दिन देवरिया जिला जेल में तथा शेष दिन गोरखपुर में परिवहन निगम के वर्कशॉप को अस्थायी जेल बनाकर वहां हमें रखा गया। 30 अक्तूबर 1990 को जब राम भक्तों पर गोली चलने की घटना हुई तो यह सुनकर काफी दुख हुआ। यह संघर्षों का परिणाम है कि कारसेवकों के बलिदान के चलते राम मंदिर का निर्माण और 22 जनवरी को रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा नए युग का आरंभ कर रही है।