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Sant Kabir Nagar News: पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व हो जातेे हैं नष्ट

Wed, 14 Oct 2026 01:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 01:54 AM IST
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Burning stubble destroys soil nutrients.
संतकबीरनगर। कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि अभियांत्रिकी अनुभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सीपीएन गौतम ने किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की जानकारी दी गई।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने बताया कि एक टन फसल अवशेष जलाने से लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फॉस्फोरस, 2.5 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर की हानि होती है। इससे मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्व नष्ट होते हैं और किसानों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
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उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे आंखों में जलन, त्वचा संबंधी समस्याओं और सूक्ष्म कणों के कारण हृदय एवं फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा मिट्टी का तापमान बढ़ने से लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे मृदा की उर्वरता प्रभावित होती है।
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केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सीपीएन गौतम ने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करना पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कृषि उत्पादन लागत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसानों को वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर फसल अवशेषों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए।
डॉ. तरुण कुमार ने कहा कि कृषि वानिकी और जैविक पदार्थों के प्रभावी उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है।
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