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बजट के संकट से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग
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बजट के संकट से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग
- कोरोना की जंग लड़ रहे फ्रंटलाइन वर्करों के मानदेय का भुगतान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। स्वास्थ्य विभाग बजट के संकट से जूझ रहा है। कोरोना से जंग लड़ रहे फ्रंटलाइन वर्कर सहित अन्य कर्मियों का मानदेय का भुगतान पर संकट खड़ा हो गया है। जनवरी माह का भुगतान नहीं होने से कर्मियों में आक्रोश बढ़ रहा है।
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मी लगातार संघर्ष कर रहे हैं। खासकर आशा व आशा संगिनी गांवों में कोविड सर्वे, टीकाकरण आदि कार्य में जुटी हुई हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्य कर्मी भी इस महामारी को रोकने के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन इनके मानदेय व वेतन भुगतान को लेकर संकट बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में बजट की उपलब्धता नहीं है। आशा कार्यकर्ता व आशा संगिनी का जनवरी माह का मानदेय भुगतान ब्लॉकों में रुका हुआ है, जबकि अन्य योजनाओं का भी भुगतान नहीं हो पा रहा है।
वैसे जिले में 2000 के करीब आशा कार्यकर्ता व 73 आशा संगिनी कार्यरत हैं। नाथनगर, सेमरियावां, खलीलाबाद, बेलहरकला, मेंहदावल सहित कई ऐसे ब्लॉक हैं, जहां भुगतान नहीं हो पाया है। ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी बजट न होने की बात कह रहे हैं। इससे पूर्व जिले में पिछले जून माह में भी बजट का संकट खड़ा हुआ था। अपर सीएमओ आरसीएच डॉ. मोहन झा ने कहा कि बजट की कमी है। इसको दूर करने के लिए शासन को 16 करोड़ रुपये बजट का डिमांड भेजा गया है। आश्वासन मिला है कि जल्द ही बजट उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट मिलते ही भुगतान करा दिया जाएगा।
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- कोरोना की जंग लड़ रहे फ्रंटलाइन वर्करों के मानदेय का भुगतान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। स्वास्थ्य विभाग बजट के संकट से जूझ रहा है। कोरोना से जंग लड़ रहे फ्रंटलाइन वर्कर सहित अन्य कर्मियों का मानदेय का भुगतान पर संकट खड़ा हो गया है। जनवरी माह का भुगतान नहीं होने से कर्मियों में आक्रोश बढ़ रहा है।
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मी लगातार संघर्ष कर रहे हैं। खासकर आशा व आशा संगिनी गांवों में कोविड सर्वे, टीकाकरण आदि कार्य में जुटी हुई हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्य कर्मी भी इस महामारी को रोकने के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन इनके मानदेय व वेतन भुगतान को लेकर संकट बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में बजट की उपलब्धता नहीं है। आशा कार्यकर्ता व आशा संगिनी का जनवरी माह का मानदेय भुगतान ब्लॉकों में रुका हुआ है, जबकि अन्य योजनाओं का भी भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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वैसे जिले में 2000 के करीब आशा कार्यकर्ता व 73 आशा संगिनी कार्यरत हैं। नाथनगर, सेमरियावां, खलीलाबाद, बेलहरकला, मेंहदावल सहित कई ऐसे ब्लॉक हैं, जहां भुगतान नहीं हो पाया है। ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी बजट न होने की बात कह रहे हैं। इससे पूर्व जिले में पिछले जून माह में भी बजट का संकट खड़ा हुआ था। अपर सीएमओ आरसीएच डॉ. मोहन झा ने कहा कि बजट की कमी है। इसको दूर करने के लिए शासन को 16 करोड़ रुपये बजट का डिमांड भेजा गया है। आश्वासन मिला है कि जल्द ही बजट उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट मिलते ही भुगतान करा दिया जाएगा।
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